
55 देशों के 1205 रचनाकारों की भागीदारी वाला 220 घंटे का अनवरत कवि सम्मेलन दर्ज हुआ विश्व कीर्तिमान में
सुलतानपुर। दुनिया के सबसे बड़े कवि सम्मेलन में सहभागिता कर सुलतानपुर की वरिष्ठ साहित्यकार सुनीता श्रीवास्तव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान दर्ज कराई है। हिंदी साहित्य के वैश्विक मंच पर आयोजित इस ऐतिहासिक कवि सम्मेलन को विश्व रिकॉर्ड में शामिल किया गया है, जिसमें सुनीता श्रीवास्तव ने काव्य पाठ कर जिले का गौरव बढ़ाया।
यह आयोजन विश्व हिंदी दिवस से प्रारंभ होकर हिंदी की वैश्विक यात्रा को समर्पित था। कार्यक्रम को ‘हॉर्वर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड’ द्वारा विश्व रिकॉर्ड में सम्मिलित किया गया। विशेष बात यह रही कि यह कवि सम्मेलन 220 घंटे तक अनवरत आयोजित किया गया, जो अपने आप में एक अद्वितीय उपलब्धि है।
55 देशों के रचनाकारों की सहभागिता
आयोजन में विश्व के 55 देशों से हिंदी कवियों एवं साहित्यकारों ने भाग लिया। कुल 1205 रचनाकारों की सक्रिय सहभागिता के साथ यह कार्यक्रम निरंतर 220 घंटे तक संचालित हुआ। सबसे अधिक देशों की भागीदारी और लगातार 220 घंटे तक आयोजन होने के आधार पर इसे विश्व रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
सुनीता श्रीवास्तव को इस आयोजन में काव्य पाठ हेतु आमंत्रित किया गया था। उन्हें निमंत्रण संस्था के संस्थापक एवं कवि बादल बाजपुरी तथा संरक्षक एवं कवि पंकज प्रकाश द्वारा प्रदान किया गया। उनके प्रभावशाली काव्य पाठ को श्रोताओं ने सराहा और डिजिटल मंच पर देश-विदेश के साहित्यप्रेमियों ने प्रशंसा व्यक्त की।
‘बुलंदी’ संस्था का उल्लेखनीय योगदान
इस भव्य आयोजन का संचालन ‘बुलंदी’ संस्था द्वारा किया गया, जो उत्तराखंड के बाजपुर से संचालित होती है। संस्था का उद्देश्य नवोदित कलाकारों और साहित्यकारों को मंच प्रदान करना है। संस्था पूर्व में भी वर्ष 2021 और 2022 में 207 घंटे तथा 400 घंटे के अनवरत वर्चुअल कवि सम्मेलनों का आयोजन कर विश्व कीर्तिमान स्थापित कर चुकी है, जिन्हें इंडिया वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया था।
साहित्य जगत में सक्रिय भूमिका निभा रही बुलंदी संस्था ने अल्प समय में बड़े-बड़े आयोजनों के माध्यम से अपना विशिष्ट स्थान बनाया है। यह संस्था निस्वार्थ भाव से हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए कार्यरत है।
शहर में हर्ष का वातावरण
सुनीता श्रीवास्तव की इस उपलब्धि से सुलतानपुर शहर में हर्ष का वातावरण है। साहित्यकारों, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने उन्हें बधाई दी है। स्थानीय साहित्य मंचों ने इसे जिले के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है।
वरिष्ठ साहित्यकारों का कहना है कि वैश्विक मंच पर सुलतानपुर की उपस्थिति न केवल स्थानीय रचनाकारों के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि हिंदी भाषा की समृद्ध परंपरा को भी नई ऊर्जा प्रदान करती है।
सुनीता श्रीवास्तव ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि हिंदी भाषा और समस्त साहित्यकारों की है। उन्होंने कहा कि हिंदी की वैश्विक पहचान को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं और ऐसे आयोजन भाषा को विश्व पटल पर नई ऊंचाई प्रदान करते हैं।
साहित्य प्रेमियों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजनों से नई पीढ़ी को भी साहित्य की ओर प्रेरणा मिलती है और भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़ाव सुदृढ़ होता है।









