
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता के लिए प्राप्त आवेदनों के निस्तारण में तेजी लाने के उद्देश्य से गृह मंत्रालय ने दो अतिरिक्त अधिकार प्राप्त समितियों (एम्पावर्ड कमेटी) का गठन किया है।
कुछ दिनों पहले ही राज्य में एक पूर्ववर्ती अधिकार प्राप्त समिति को पुनः सक्रिय किया गया था। अब बड़ी संख्या में प्राप्त आवेदनों को देखते हुए दो और समितियां गठित करने का निर्णय लिया गया है।
उप सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे नेतृत्व
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, नई समितियों की अध्यक्षता भारत सरकार के उप सचिव स्तर से नीचे न होने वाले अधिकारी करेंगे। इन अधिकारियों का नामांकन भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त द्वारा किया जाएगा।
अधिसूचना में कहा गया है कि नागरिकता नियम, 2009 के नियम 11A(1) और नियम 13A के प्रयोजनों के लिए पश्चिम बंगाल राज्य हेतु दो अतिरिक्त अधिकार प्राप्त समितियों का गठन किया गया है।
समिति की संरचना
नोटिफिकेशन के अनुसार, प्रत्येक समिति में—
पश्चिम बंगाल के पोस्टमास्टर जनरल द्वारा नामांकित एक डाक अधिकारी (कम से कम अंडर सेक्रेटरी रैंक) शामिल होगा।
दो आमंत्रित सदस्य होंगे, जिनमें राज्य सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (गृह) या एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) कार्यालय का एक प्रतिनिधि और रेलवे के संबंधित डिविजनल रेलवे मैनेजर का एक प्रतिनिधि शामिल रहेगा।
पहले से मौजूद समिति भी सक्रिय
गृह मंत्रालय द्वारा पहले से मौजूद एम्पावर्ड कमेटी को हाल ही में पुनः सक्रिय किया गया था। वर्तमान में उसका नेतृत्व वेस्ट बंगाल के सेंसस ऑपरेशन डायरेक्टरेट के डिप्टी रजिस्ट्रार जनरल कर रहे हैं। इससे पहले जनगणना संचालन के डायरेक्टर इस समिति का नेतृत्व करते थे।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य में पहले से एक समिति कार्यरत थी, लेकिन आवेदनों की अधिक संख्या को देखते हुए दो अतिरिक्त पैनल गठित करने का निर्णय लिया गया है, ताकि प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
CAA लागू होने के बाद बढ़े आवेदन
केंद्र सरकार ने 11 मार्च 2024 को गजट अधिसूचना जारी कर Citizenship (Amendment) Act, 2019 के नियमों को अधिसूचित किया था। इस कानून का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए उन गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया को तेज करना है, जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश कर चुके हैं।
सरकार का कहना है कि नई समितियों के गठन से लंबित आवेदनों के निस्तारण में तेजी आएगी और पात्र आवेदकों को शीघ्र राहत मिल सकेगी।







