
भोपाल। मध्यप्रदेश में आगामी 19 मार्च से प्रारंभ होने जा रहे ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ चर्चा कर अभियान की कार्य योजना को अंतिम रूप दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण प्रदेश की प्राथमिकता है और इस अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से व्यापक जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि पिछले वर्ष संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के दौरान प्रदेश भर में जल संरक्षण और जल संरचनाओं के संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुए थे। कई जिलों में तालाबों, कुओं और अन्य जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए सामूहिक प्रयास किए गए, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। उन्होंने निर्देश दिए कि इस वर्ष अभियान को और अधिक प्रभावी और परिणाममूलक बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए और सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि जलग्रहण क्षेत्रों में किए गए अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर की जाए, ताकि जल स्रोतों का प्राकृतिक प्रवाह बाधित न हो। इसके साथ ही नदियों के उद्गम स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जाएं। उन्होंने विशेष रूप से Kshipra River, Betwa River और Gambhir River के पुनर्जीवन के लिए व्यापक योजना बनाने के निर्देश दिए।
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि प्रदेश में जल संरचनाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए व्यापक अभियान चलाया जाए। तालाब, कुएं, बावड़ियां और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ वर्षा जल संचयन यानी रेनवॉटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था को व्यापक स्तर पर लागू किया जाए। नगरीय निकायों में जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण और हरित क्षेत्रों के विकास को भी प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों में नालों के शोधन और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि जल स्रोतों में प्रदूषण न पहुंचे। इसके साथ ही बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग की जिम्मेदारी है।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि अभियान में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। स्कूलों, कॉलेजों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं को अभियान से जोड़कर जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाई जाएगी। विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से जल संरक्षण को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जल संरक्षण की योजनाएं तैयार करें और अभियान को प्रभावी रूप से लागू करें। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन का आधार है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल स्रोतों का संरक्षण हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के माध्यम से प्रदेश में जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे। सरकार को उम्मीद है कि जनभागीदारी के सहयोग से यह अभियान प्रदेश में जल संरक्षण की एक नई मिसाल स्थापित करेगा।









