
भोपाल। मध्यप्रदेश में जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से ‘जल संचय, जन भागीदारी’ (JSJB) 2.0 अभियान को लेकर प्रदेश स्तर पर महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने भोपाल स्थित मंत्रालय से वर्चुअल माध्यम से केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C. R. Patil के साथ अभियान की प्रगति की समीक्षा की तथा प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और संभागीय आयुक्तों से संवाद किया। बैठक में अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में देशभर में जल संरक्षण को लेकर व्यापक जागरूकता आई है और यह एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि जल संचय, जन भागीदारी अभियान का उद्देश्य केवल जल संरचनाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना और उन्हें इस अभियान से जोड़ना है।
बैठक में बताया गया कि ‘जल संचय, जन भागीदारी’ अभियान के पहले चरण JSJB 1.0 में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की थी। इस अभियान में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान प्राप्त किया, जबकि प्रदेश का खंडवा जिला पूरे देश में प्रथम स्थान पर रहा। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए जिला प्रशासन और स्थानीय नागरिकों की सराहना करते हुए कहा कि यह जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री Prahlad Singh Patel भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के कार्यों में पंचायत स्तर पर जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। यदि गांवों में तालाबों, कुओं और अन्य जल संरचनाओं का संरक्षण किया जाए तो जल संकट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। जलग्रहण क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने, तालाबों और नदियों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने तथा सघन पौधरोपण जैसे कार्यों को अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों में भी जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण और हरित क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जाए। युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय समुदायों को जल संरक्षण के कार्यों से जोड़ा जाए, ताकि यह अभियान एक जन आंदोलन का रूप ले सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संकट केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
बैठक के दौरान विभिन्न जिलों के कलेक्टरों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे जल संरक्षण कार्यों की जानकारी भी साझा की। अधिकारियों ने बताया कि कई जिलों में तालाबों के जीर्णोद्धार, नालों के शोधन, वर्षा जल संचयन और पौधरोपण जैसे कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक के अंत में कहा कि ‘जल संचय, जन भागीदारी’ 2.0 अभियान के माध्यम से मध्यप्रदेश जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है। उन्होंने सभी अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे अपने-अपने जिलों में इस अभियान को गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ लागू करें तथा अधिक से अधिक नागरिकों को इससे जोड़ें।
प्रदेश सरकार का मानना है कि जनभागीदारी और प्रशासनिक समन्वय के माध्यम से जल संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा दी जा सकती है। यही कारण है कि ‘जल संचय, जन भागीदारी’ अभियान को प्रदेश में व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके और पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जा सके।









