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बैतूल की नगर सेठानी मां महाकाली की झांकी में सपत्नीक शामिल हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल

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टिकारी रोड स्थित मां महाकाली मंदिर में रात्रि 12 बजे महाआरती में की विधिवत पूजा-अर्चना, 75 वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा बैतूल की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
बैतूल। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के मध्यप्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने बैतूल के टिकारी रोड स्थित ‘बैतूल की नगर सेठानी’ मां महाकाली जी की भव्य झांकी में सपत्नीक शामिल होकर माता रानी के दर्शन किए तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उन्होंने रात्रि 12 बजे संपन्न होने वाली महाआरती में सहभागिता करते हुए विधिवत पूजा-अर्चना की। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना का विशेष महत्व होता है। भक्तजन माता रानी के दर्शन कर परिवार, समाज और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इसी धार्मिक आस्था और श्रद्धा के वातावरण में मां महाकाली की झांकी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता देखने को मिलती है। हेमंत खंडेलवाल ने इस अवसर को सौभाग्यपूर्ण बताते हुए माता रानी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना की।
टिकारी रोड स्थित मां महाकाली की झांकी बैतूल की धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह झांकी विगत 75 वर्षों से निरंतर आयोजित की जा रही है। इतने लंबे समय से चली आ रही यह परंपरा श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, सामूहिक सहभागिता और धार्मिक आयोजनों के प्रति समर्पण को दर्शाती है। हर वर्ष नवरात्रि के अवसर पर माता रानी के दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना कर परिवार तथा समाज की मंगलकामना करते हैं। समय के साथ यह आयोजन बैतूल के धार्मिक जीवन में विशेष स्थान प्राप्त कर चुका है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही ऐसी परंपराएं स्थानीय संस्कृति और धार्मिक विरासत को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मां महाकाली की झांकी के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, विश्वास और आध्यात्मिक जुड़ाव का अवसर मिलता है, वहीं यह आयोजन नगर की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती प्रदान करता है।

मां महाकाली की झांकी में रात्रि 12 बजे संपन्न होने वाली महाआरती श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। इस दौरान माता रानी की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है और भक्तजन श्रद्धा के साथ आरती में शामिल होते हैं। महाआरती के समय उमड़ने वाला श्रद्धालुओं का जनसमूह मां महाकाली के प्रति लोगों के गहरे विश्वास और समर्पण को प्रदर्शित करता है। धार्मिक आयोजनों में आरती का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे भक्त और आराध्य के बीच आस्था एवं समर्पण की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाता है। नवरात्रि के दिनों में मंदिरों और देवी झांकियों में होने वाली पूजा-अर्चना से वातावरण भक्तिमय हो उठता है। बैतूल की इस झांकी में भी श्रद्धालु मां के दर्शन कर आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हैं। महाआरती में सहभागिता धार्मिक परंपरा से जुड़ने के साथ-साथ समाज में भक्ति और सामूहिक सद्भाव की भावना को भी प्रोत्साहित करती है।
इस आयोजन की निरंतरता बनाए रखने में सितारा मंडल के आयोजकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हेमंत खंडेलवाल ने 75 वर्षों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा को सहेजने और समृद्ध करने के प्रयासों के लिए सितारा मंडल के समस्त आयोजकों की सराहना करते हुए उन्हें साधुवाद दिया। किसी धार्मिक आयोजन को लंबे समय तक निरंतर संचालित करने के लिए सामूहिक सहयोग, समर्पण और व्यवस्थागत प्रयासों की आवश्यकता होती है। आयोजकों के प्रयासों से ऐसी परंपराएं स्थानीय समाज के जीवन में जीवंत बनी रहती हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित होने का अवसर मिलता है। नवरात्रि के दौरान आयोजित देवी झांकियां धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनती हैं। इनके माध्यम से परिवार, समाज और विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ पूजा-अर्चना में शामिल होते हैं। बैतूल की मां महाकाली झांकी भी लंबे समय से चली आ रही परंपरा के कारण नगरवासियों की आस्था से गहराई से जुड़ी हुई है।

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मां महाकाली के दर्शन और महाआरती में सहभागिता के अवसर पर हेमंत खंडेलवाल ने प्रार्थना की कि माता रानी की कृपा से बैतूल सहित संपूर्ण मध्यप्रदेश के निवासियों के जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मकता का संचार हो। शारदीय नवरात्रि भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का प्रमुख पर्व है, जो शक्ति की उपासना, भक्ति और सदाचार का संदेश देता है। मां महाकाली की आराधना को शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा से भी जोड़ा जाता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु माता रानी से अपने परिवार की खुशहाली, समाज की उन्नति और प्रदेश के कल्याण की कामना करते हैं। बैतूल की नगर सेठानी मां महाकाली की झांकी में आयोजित महाआरती और श्रद्धालुओं की सहभागिता ने स्थानीय धार्मिक परंपरा की निरंतरता को रेखांकित किया। 75 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा का संरक्षण बैतूल की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
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