
स्थानीय निकाय चुनाव की घोषणा की पूरी संभावना, राजनीतिक हलचल तेज
मुंबई। महाराष्ट्र में लंबे समय से लंबित स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर आज बड़ा ऐलान होने की संभावना है। राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission, Maharashtra) ने आज दोपहर 4 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिसमें नगरपालिकाओं, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की जा सकती है। इस घोषणा के साथ ही राज्य की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है, क्योंकि पिछले तीन वर्षों से ये चुनाव स्थगित चल रहे थे।
लंबे इंतज़ार के बाद चुनावी प्रक्रिया पर स्पष्टता
राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया 2020-21 से ही लंबित है। कोविड-19 महामारी, ओबीसी आरक्षण और वार्ड पुनर्गठन (Ward Formation) जैसे मुद्दों के चलते चुनावों की तारीखें लगातार आगे बढ़ती रहीं।
राज्य निर्वाचन आयोग ने हाल ही में 31 अक्टूबर तक सभी नगरपालिकाओं और नगर परिषदों के वार्ड गठन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश जारी किया था। अब जबकि यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, आयोग के सामने चुनाव की घोषणा करने में कोई तकनीकी बाधा नहीं बची है।
पहले चरण में 246 नगरपालिकाओं और 42 नगर पंचायतों का चुनाव
सूत्रों के मुताबिक, आयोग पहले चरण में लगभग 246 नगरपालिकाओं और 42 नगर पंचायतों के चुनाव की घोषणा कर सकता है। इन निकायों का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है और फिलहाल प्रशासक इनके कामकाज का संचालन कर रहे हैं।
दूसरे चरण में जिला परिषदों, पंचायत समितियों और महानगरपालिकाओं — विशेष रूप से मुंबई, ठाणे, पुणे, नागपुर और नासिक जैसे महानगरों के चुनाव — की घोषणा की संभावना है।
ओबीसी आरक्षण पर मिली कानूनी स्पष्टता
स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र सरकार और चुनाव आयोग के बीच लंबे समय तक कानूनी और प्रशासनिक गतिरोध बना रहा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार “त्रिस्तरीय समिति” (Triple Test Formula) के तहत ओबीसी आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया अब पूरी मानी जा रही है।
राज्य सरकार ने हाल ही में ओबीसी समुदाय की जनसंख्या और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के आंकड़े आयोग को सौंप दिए हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग ने वार्ड संरचना को अंतिम रूप दिया है। इसी कारण अब चुनावों की घोषणा को लेकर कानूनी अड़चन नहीं रह गई है।
राजनीतिक दलों में उत्साह और रणनीति-बैठकें तेज
चुनाव की संभावना के साथ ही महाराष्ट्र के प्रमुख राजनीतिक दलों—शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट), शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट), भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट और अजित पवार गुट)—में तेजी से हलचल बढ़ गई है।
मुंबई, ठाणे, पुणे और नागपुर जैसे नगर निगम चुनावों को सभी दल “सेमी-फाइनल” की तरह देख रहे हैं, क्योंकि इन्हीं परिणामों से आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा तय होने की संभावना मानी जा रही है।
बीजेपी और शिंदे गुट मिलकर गठबंधन के रूप में चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, जबकि उद्धव ठाकरे गुट अपने पुराने गढ़ों—विशेषकर मुंबई और ठाणे—में संगठन को मज़बूत करने पर जोर दे रहा है।
मतदाता सूची और खर्च सीमा पर भी बड़ा निर्णय
हाल ही में निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र के बीएमसी (BMC) चुनाव में उम्मीदवारों के खर्च की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी है। आयोग का कहना है कि बढ़ती महंगाई और चुनावी प्रक्रिया के खर्च को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
वहीं, मतदाता सूची को लेकर भी कई राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई है। उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग से मांग की है कि मतदाता सूची की सफाई (voter list cleanup) पूरी होने के बाद ही चुनाव कराए जाएं, ताकि फर्जी नामों को हटाया जा सके और मतदाताओं को सही अवसर मिल सके।
चुनावी प्रक्रिया: अगला कदम क्या होगा?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोग द्वारा यदि कार्यक्रम की घोषणा की जाती है, तो उसके बाद
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आचार संहिता (Model Code of Conduct) तुरंत लागू हो जाएगी।
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नामांकन की तारीखें, स्क्रूटनी और मतदान का कार्यक्रम जारी किया जाएगा।
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गिनती की प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से होगी, जैसा कि 2017 के चुनावों में किया गया था।
चुनाव आयोग का उद्देश्य दिसंबर 2025 तक पहले चरण के चुनावों को पूरा करने का है, ताकि नई नगरपालिकाएं जनवरी 2026 से कार्यभार संभाल सकें।
नागरिक मुद्दे चुनाव का मुख्य केंद्र
स्थानीय निकाय चुनावों में इस बार नागरिक सुविधाओं—पेयजल, सड़क, कचरा प्रबंधन, स्वच्छता और स्थानीय विकास योजनाओं—को लेकर जनता में काफी असंतोष देखा जा रहा है। मुंबई और पुणे जैसे शहरों में यातायात, जलभराव और प्रदूषण मुख्य मुद्दे रहेंगे, जबकि ग्रामीण नगर पंचायतों में किसानों की समस्याएं और बेरोजगारी पर चर्चा प्रमुख होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र के स्थानीय चुनाव इस बार न केवल शहरी शासन बल्कि राज्य-स्तरीय राजनीतिक समीकरणों को भी गहराई से प्रभावित करेंगे।
निष्कर्ष
आज दोपहर 4 बजे की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हैं।
यह ऐलान न केवल प्रशासनिक स्तर पर नई ऊर्जा लेकर आएगा, बल्कि महाराष्ट्र की सियासत में भी नई जंग का बिगुल बजा देगा।
तीन साल से अधिक समय से रुके इन स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा के साथ, राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।









