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HQ Report
रीवा, मंगलवार। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार किए जा रहे निरीक्षणों की श्रृंखला में बीड़ा स्वास्थ्य केंद्र से एक गंभीर अनियमितता सामने आई है। जिला कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल द्वारा सोमवार प्रातः किए गए औचक निरीक्षण में यह खुलासा हुआ कि केंद्र में तैनात कुल 17 कर्मचारियों में से केवल 4 चिकित्सकीय स्टाफ ही उपस्थिति में पाए गए, जबकि 13 कर्मचारी किसी भी सूचना के बिना अनुपस्थित थे। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर अभी कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
निरीक्षण का विवरण: अचानक पहुंचे कलेक्टर, देखकर चौंक गईं व्यवस्थाएँ
बीड़ा स्वास्थ्य केंद्र में प्रातः करीब 10 बजे पहुंचे कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने सबसे पहले उपस्थिति रजिस्टर का अवलोकन किया। रजिस्टर में हस्ताक्षर तो दर्ज थे, लेकिन मौके पर कर्मचारी नदारद।
कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनात कर्मचारी—जैसे कि फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ, वार्ड बॉय, लैब तकनीशियन और सहायक कर्मचारी—उपस्थित नहीं पाए गए।
कलेक्टर ने पाया कि केवल 4 कर्मचारी ही सक्रिय रूप से ड्यूटी पर कार्यरत थे, जिनसे केंद्र की स्थिति, रोगियों की संख्या, उपलब्ध सुविधाओं और दवा स्टॉक की जानकारी ली गई। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर स्पष्ट रूप से नाराज दिखीं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है। उन्होंने उपस्थिति रजिस्टर तुरंत जप्त करने के निर्देश दिए और जिला स्वास्थ्य अधिकारी को संपूर्ण मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा।
कलेक्टर प्रतिभा पाल का कड़ा रुख: “जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ स्वीकार नहीं”
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कहा कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में प्रशासन पूरी मेहनत से कार्य कर रहा है, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ेंगे, तो सारी योजनाएँ और प्रयास विफल हो जाएंगे।
उन्होंने स्पष्ट कहा:
“स्वास्थ्य केंद्र जनता की पहली उम्मीद है। यदि डॉक्टर और स्टाफ समय पर उपस्थित नहीं होंगे, तो ग्रामीणों को चिकित्सा सुविधा मिलने की बजाय परेशानी उठानी पड़ेगी। ऐसी ढिलाई किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
कलेक्टर ने जिला अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी अनुपस्थित कर्मचारियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस, वेतन कटौती, और संभावित निलंबन कार्रवाई की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए।
ग्रामीणों ने बताईं अपनी समस्याएं: डॉक्टर समय पर नहीं आते, दवाइयाँ अक्सर उपलब्ध नहीं
निरीक्षण की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण भी स्वास्थ्य केंद्र पहुँच गए। ग्रामीणों ने मौके पर कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी कई गंभीर शिकायतें साझा कीं।
कुछ ग्रामीणों ने बताया कि—
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केंद्र में डॉक्टर अक्सर देर से आते हैं,
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दवाइयों का स्टॉक कई दिनों तक खाली रहता है,
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प्रसूति सेवाएँ सुचारू नहीं हैं,
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और आपात स्थिति में प्राथमिक चिकित्सा तक उपलब्ध नहीं रहती।
कई बुजुर्ग महिलाओं ने बताया कि रक्तचाप और शुगर जैसी सामान्य जाँचों के लिए भी उन्हें कई किलोमीटर दूर रीवा शहर जाना पड़ता है, जबकि केंद्र में लैब की सुविधा होनी चाहिए।
कलेक्टर ने सभी शिकायतें गंभीरता से सुनीं और मौके पर ही संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया। उन्होंने गाँव के प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि 15 दिनों के भीतर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार दिखेगा और हर शिकायत पर कार्रवाई होगी।
स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं की समीक्षा: दवा स्टॉक की कमी और उपकरणों की स्थिति पर भी उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने दवा भंडारण कक्ष, ओपीडी, मातृ-शिशु कक्ष, लैब रूम और आपातकालीन यूनिट का भी निरीक्षण किया।
जांच के दौरान निम्न कमियाँ पाई गईं—
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कई आवश्यक दवाएँ स्टॉक में मौजूद नहीं थीं।
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ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग मशीनों में से दो खराब थीं।
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लैब उपकरणों में भी रख-रखाव की कमी देखी गई।
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साफ-सफाई की स्थिति भी असंतोषजनक थी।
कलेक्टर ने मामले को गंभीर मानते हुए दवा वितरण प्रणाली को मजबूत करने, उपकरणों की मरम्मत की तुरंत व्यवस्था करने और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
जिला प्रशासन का सक्रिय रुख: अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर भी जारी रहेंगे निरीक्षण
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने स्पष्ट किया कि बीड़ा स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण केवल एक शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि—
“आने वाले दिनों में जिले के सभी प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर औचक निरीक्षण किए जाएंगे। स्टाफ की उपस्थिति, दवा उपलब्धता, उपकरण स्थिति और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं का मूल्यांकन किया जाएगा।”
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जिन केंद्रों में इस तरह की लापरवाही मिलेगी, वहाँ कार्रवाई और भी कठोर की जाएगी।
इस घोषणा से कर्मचारियों में भी एक प्रकार की सतर्कता का माहौल बन गया है।
स्वास्थ्य सेवाएँ और प्रशासन की जवाबदेही: ग्रामीणों की अपेक्षाएँ और जमीनी हकीकत
रीवा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए सरकार कई योजनाएँ चला रही है—जननी सुरक्षा योजना, आयुष्मान भारत, टीकाकरण कार्यक्रम, एनएचएम योजनाएँ आदि।
लेकिन जमीनी स्तर पर कर्मचारियों की लापरवाही, संसाधनों की कमी और प्रशासनिक ढिलाई के कारण इन योजनाओं का पूरा लाभ जनता तक नहीं पहुँच पाता।
बीड़ा स्वास्थ्य केंद्र में पाया गया मामला इसी बड़ी समस्या का उदाहरण है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन समय-समय पर ऐसे निरीक्षण करता रहे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, तभी स्थिति में सुधार संभव है।
जनप्रतिनिधियों ने भी जताई चिंता
स्थानीय जनप्रतिनिधियों—पंच, सरपंच, वार्ड सदस्यों और सामाजिक कार्यकर्ताओं—ने भी इस मामले को गंभीर बताया।
उन्होंने कहा कि—
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स्वास्थ्य केंद्र जनता के जीवन से सीधे जुड़ा संवेदनशील क्षेत्र है।
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यहाँ लापरवाही का सीधा असर बीमार, बुजुर्ग, महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है।
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प्रशासन द्वारा की गई सख्त कार्रवाई से सकारात्मक संदेश जाएगा और कर्मचारियों की जिम्मेदारी बढ़ेगी।
उन्होंने कलेक्टर प्रतिभा पाल के निरीक्षण को समयोचित कदम बताते हुए इसे जिले में स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल कहा।
अनुपस्थित कर्मचारियों पर संभावित कार्रवाई: वेतन कटौती, नोटिस और निलंबन के संकेत
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग अनुपस्थित कर्मचारियों के विरुद्ध निम्न कार्रवाई कर सकता है—
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कारण बताओ नोटिस जारी,
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अनुपस्थिति अवधि का वेतन रोकना,
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रिकॉर्ड में अनुशासनहीनता दर्ज करना,
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और गंभीर मामलों में निलंबन तक की कार्रवाई।








