
अयोध्या/नई दिल्ली। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख स्तंभ, भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद तथा प्रख्यात रामकथा वाचक आदरणीय डॉ. रामविलास वेदांती जी का निधन हो गया। उनके निधन से न केवल रामभक्त समाज बल्कि देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक क्षेत्र को अपूरणीय क्षति पहुंची है। उनका संपूर्ण जीवन प्रभु श्रीराम और रामकाज को समर्पित रहा।
डॉ. रामविलास वेदांती जी श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के उन अग्रणी संत-नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने संघर्ष के कठिन काल में भी अडिग रहकर आंदोलन को दिशा और ऊर्जा प्रदान की। वे रामकथा के मर्मज्ञ विद्वान थे और उनके प्रवचन श्रोताओं के हृदय में श्रद्धा, संस्कार और राष्ट्रबोध का संचार करते थे। उनका व्यक्तित्व सादगी, तप, त्याग और वैचारिक दृढ़ता का प्रतीक रहा।
विशेष रूप से यह उल्लेखनीय है कि उन्होंने प्रभु श्रीराम की कथा का वाचन करते हुए ही देह त्याग किया। इसे रामभक्त समाज एक दिव्य संयोग मान रहा है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि प्रभु श्रीराम ने अपने अनन्य भक्त को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान किया है।
राजनीतिक जीवन में भी डॉ. वेदांती जी ने सदैव धर्म, संस्कृति और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। सांसद के रूप में उन्होंने जनसेवा को अपना कर्तव्य माना और संसद के मंच से भी भारतीय संस्कृति एवं सनातन मूल्यों की सशक्त आवाज बने रहे।
उनके निधन की खबर से संत समाज, राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं, अनुयायियों और असंख्य रामभक्तों में शोक की लहर है। देशभर से श्रद्धांजलि संदेशों का तांता लगा हुआ है और लोग उन्हें एक तपस्वी, निर्भीक और समर्पित रामसेवक के रूप में स्मरण कर रहे हैं।
डॉ. रामविलास वेदांती जी का जाना समाज के लिए एक बड़ी क्षति है, जिसकी भरपाई सहज नहीं है। ईश्वर से प्रार्थना है कि वे दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके अनुयायियों व शोकसंतप्त परिजनों को इस गहन दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
ॐ शांति।








