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मोबाइल से दूरी, अख़बार से दोस्ती: यूपी के स्कूलों में बच्चे पढ़ेंगे न्यूज़पेपर, सेहत और सोच दोनों के लिए ज़रूरी कदम

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लखनऊ | डिजिटल स्क्रीन पर बढ़ती निर्भरता और बच्चों में घटती पढ़ने की आदत को देखते हुए उत्तर प्रदेश में एक सराहनीय पहल की गई है। अब प्रदेश के कई स्कूलों में बच्चों को मोबाइल से दूर रखकर अख़बार पढ़ने की आदत डाली जाएगी। इस कदम का उद्देश्य न केवल शैक्षणिक सुधार है, बल्कि बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना भी है।

क्या है नई पहल?

शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार, स्कूलों में नियमित रूप से न्यूज़पेपर रीडिंग सेशन आयोजित किए जाएंगे। कक्षा के तय समय में छात्र अख़बार पढ़ेंगे, खबरों पर चर्चा करेंगे और महत्वपूर्ण मुद्दों को समझने का अभ्यास करेंगे। इससे बच्चों में समसामयिक घटनाओं की समझ विकसित होगी और उनकी भाषा, शब्दावली व विचार क्षमता मजबूत होगी।

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मोबाइल की लत बन रही चिंता

विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग बच्चों में—

  • आंखों की कमजोरी
  • एकाग्रता की कमी
  • चिड़चिड़ापन
  • नींद की समस्या
  • शारीरिक गतिविधियों में गिरावट

जैसी परेशानियां बढ़ा रहा है। स्कूल स्तर पर मोबाइल से दूरी बनाना बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।

अख़बार पढ़ने से क्या होंगे फायदे?

  • एकाग्रता और धैर्य में वृद्धि
  • भाषा और शब्द भंडार में सुधार
  • तार्किक सोच का विकास
  • सामाजिक और राजनीतिक समझ
  • फेक न्यूज़ से बचने की क्षमता

अख़बार बच्चों को स्क्रीन की तेज़ रोशनी से भी राहत देता है, जिससे आंखों पर कम दबाव पड़ता है।

शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका

शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों को उम्र के अनुसार खबरें चुनने में मदद करें और चर्चा को सकारात्मक दिशा दें। वहीं अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे घर पर बच्चों के मोबाइल समय को सीमित करें और अख़बार या किताब पढ़ने के लिए प्रेरित करें।

सेहत के लिए भी फायदेमंद कदम

डॉक्टरों का मानना है कि स्क्रीन टाइम कम करने से बच्चों की नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है, तनाव घटता है और आंखों से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं। साथ ही, अख़बार पढ़ने जैसी आदतें बच्चों को शांत और संतुलित बनाती हैं।

भविष्य के लिए मजबूत नींव

यह पहल बच्चों को केवल परीक्षा केंद्रित नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है। अख़बार पढ़कर बच्चे सवाल करना सीखेंगे, राय बनाना जानेंगे और समाज को समझने की क्षमता विकसित करेंगे।

मोबाइल से दूरी और अख़बार से दोस्ती की यह पहल समय की जरूरत है। अगर इसे सही ढंग से लागू किया गया, तो यह बच्चों की सेहत, सोच और भविष्य—तीनों को सकारात्मक दिशा दे सकती है। डिजिटल युग में संतुलन ही सबसे बड़ा समाधान है, और यूपी के स्कूलों का यह कदम उसी संतुलन की ओर बढ़ता हुआ प्रयास माना जा रहा है।

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