
उमरिया। प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए व्यापक स्तर पर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान को जिले में कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन के मार्गदर्शन में प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया जा रहा है। इसी क्रम में करकेली सेक्टर क्रमांक-1 अंतर्गत ग्राम पंचायत उंचेहरा में जल गंगा संवर्धन अभियान के द्वितीय चरण के तहत श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों, प्रस्फुटन समिति के सदस्यों एवं लाड़ली बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए नदी तट की साफ-सफाई की और जल संरक्षण का संदेश दिया। श्रमदान के दौरान नदी किनारे जमा गंदगी, कचरा, जवारे विसर्जन में प्रयुक्त सामग्री एवं अन्य अपशिष्ट को एकत्रित कर उसका उचित निपटान किया गया। सामूहिक प्रयास से पूरे क्षेत्र को स्वच्छ बनाने का कार्य किया गया, जिससे जल स्रोतों की स्वच्छता और उपयोगिता में सुधार हो सके। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया। उन्हें समझाया गया कि जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखना और जल का संतुलित उपयोग करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे भविष्य में भी इस प्रकार के अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाएं। प्रस्फुटन समिति के माध्यम से ग्रामीणों को यह संदेश दिया गया कि सामूहिक प्रयासों से ही जल संरक्षण को सफल बनाया जा सकता है। अभियान के अंतर्गत जन अभियान परिषद की टीम के साथ मिलकर कार्य करने के लिए भी प्रेरित किया गया। इस अवसर पर प्रस्फुटन समिति की अध्यक्ष खुशबू सिंह राजपूत, सचिव उषा सिंह राजपूत, पंचगण सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर श्रमदान करते हुए यह संकल्प लिया कि वे अपने क्षेत्र के जल स्रोतों को स्वच्छ और संरक्षित बनाए रखने में निरंतर योगदान देंगे। यह कार्यक्रम न केवल स्वच्छता अभियान तक सीमित रहा, बल्कि जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम भी साबित हुआ। ग्रामीणों की सहभागिता से यह स्पष्ट हुआ कि समाज के सहयोग से ही पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण उद्देश्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सकता है।









