
समाज में बदलती जीवनशैली और बढ़ती भागदौड़ के बीच मनुष्य की आदतें उसके व्यक्तित्व और भविष्य को गहराई से प्रभावित करती हैं इसी विषय को केंद्र में रखकर दादरा अमेठी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता एवं साहित्यकार Sunil Shrivastava ने अपनी मार्मिक कविता ‘आदत पड़ी है…’ के माध्यम से एक गहरा सामाजिक संदेश दिया है यह कविता केवल शब्दों का संयोजन नहीं बल्कि जीवन की सच्चाइयों का दर्पण है जो यह बताती है कि आदतें ही इंसान को बनाती और बिगाड़ती हैं। कविता की शुरुआत में ही कवि ने आदत की प्रकृति को सरल लेकिन प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत किया है कि आदत ऐसी चीज है जो एक बार लग जाए तो आसानी से छूटती नहीं है चाहे वह अच्छी हो या बुरी यह पंक्तियां वर्तमान समाज की उस स्थिति को दर्शाती हैं जहां लोग कई बार अपनी गलत आदतों के कारण स्वयं को नुकसान पहुंचाते रहते हैं लेकिन उससे बाहर निकलना उनके लिए कठिन हो जाता है यह स्थिति विशेष रूप से युवाओं में देखने को मिलती है जहां नशा, आलस्य और नकारात्मक सोच जैसी आदतें धीरे-धीरे जीवन को प्रभावित करने लगती हैं। कविता का दूसरा भाग व्यसनों की ओर इशारा करता है जहां कवि यह स्पष्ट करता है कि जब किसी व्यक्ति को बुरी आदतों की लत लग जाती है तो वह उसके तन, मन और धन तीनों को प्रभावित करती है यह एक सामाजिक सच्चाई है कि व्यसन केवल व्यक्ति को ही नहीं बल्कि उसके परिवार और समाज को भी प्रभावित करता है नशे की लत, जुआ, गलत संगति जैसी आदतें व्यक्ति के जीवन को धीरे-धीरे कमजोर कर देती हैं और उसे पतन की ओर ले जाती हैं कवि ने इस विषय को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया है जिससे पाठक स्वयं को उससे जोड़ पाता है।
इसके विपरीत कविता का अगला भाग सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है जहां अच्छी आदतों के महत्व को बताया गया है कवि के अनुसार यदि व्यक्ति में अच्छी आदतें विकसित हो जाएं तो उसका जीवन सुखमय हो जाता है यश, कीर्ति और सम्मान उसके साथ चलते हैं यह संदेश आज के समय में अत्यंत महत्वपूर्ण है जब लोग त्वरित सफलता की चाह में शॉर्टकट अपनाने लगते हैं ऐसे में यह कविता याद दिलाती है कि स्थायी सफलता केवल अच्छे संस्कार और सकारात्मक आदतों से ही प्राप्त होती है। कविता का सबसे भावनात्मक हिस्सा वह है जहां कवि स्वयं के अंदर झांकते हुए स्वीकार करता है कि वह माया मोह में उलझा हुआ है और ईश्वर का स्मरण नहीं कर पा रहा है यह आत्ममंथन की स्थिति हर व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी आती है जब वह अपनी कमजोरियों को पहचानता है और सुधार की इच्छा करता है यह भाग आध्यात्मिक चेतना को जागृत करता है और व्यक्ति को अपने भीतर झांकने के लिए प्रेरित करता है। अंतिम पंक्तियों में कवि ईश्वर से प्रार्थना करता है कि उसे ऐसी आदत मिले जिसमें वह प्रतिदिन प्रभु का स्मरण कर सके और जीवन में मजबूती के साथ आगे बढ़ सके यह भाव न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है बल्कि मानसिक शांति और आत्मबल की आवश्यकता को भी उजागर करता है आज के तनावपूर्ण जीवन में यह संदेश अत्यंत प्रासंगिक है जहां लोग मानसिक शांति की तलाश में विभिन्न उपाय अपनाते हैं।
साहित्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की कविताएं समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती हैं क्योंकि ये सीधे व्यक्ति के मन और विचारों को प्रभावित करती हैं ‘आदत पड़ी है…’ जैसी रचनाएं न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं बल्कि सामाजिक जागरूकता के लिए भी अत्यंत उपयोगी हैं यह कविता हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमारी आदतें कैसी हैं और हम उन्हें किस दिशा में ले जा रहे हैं। आज के समय में जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है ऐसे में इस प्रकार की रचनाएं लोगों को सही दिशा दिखाने का कार्य करती हैं यह कविता विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणादायक है क्योंकि यह उन्हें यह समझाती है कि जीवन में सफलता पाने के लिए सही आदतों का होना कितना जरूरी है इसके साथ ही यह भी संदेश देती है कि यदि व्यक्ति अपनी गलत आदतों को पहचान कर उन्हें बदलने का प्रयास करे तो वह अपने जीवन को बेहतर बना सकता है। ‘आदत पड़ी है…’ केवल एक कविता नहीं बल्कि जीवन का मार्गदर्शन है यह हमें यह सिखाती है कि आदतें ही हमारे जीवन की दिशा तय करती हैं इसलिए हमें अपनी आदतों के प्रति सजग रहना चाहिए और उन्हें सकारात्मक दिशा में विकसित करना चाहिए ताकि हम एक बेहतर व्यक्ति और एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकें









