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सेंसेक्स 500 अंक लुढ़का, निफ्टी 24,250 के नीचे फिसला; बैंकिंग शेयरों में बिकवाली से बाजार पर दबाव

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HQ Report
मुंबई, 20 जुलाई 2026। सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव भरी रही। घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 500 अंक तक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 50 भी 24,250 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में सबसे अधिक दबाव बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों पर देखने को मिला। एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में तेज गिरावट ने प्रमुख सूचकांकों को नीचे खींच लिया। वैश्विक बाजारों में कमजोरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और निवेशकों की सतर्कता भारतीय बाजार पर भारी पड़ी।
शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में आई तेज गिरावट का असर सोमवार सुबह एशियाई बाजारों और फिर भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिला। अमेरिकी बाजार में डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 406.55 अंक यानी 0.77 प्रतिशत टूटकर 52,146.42 पर बंद हुआ। वहीं एसएंडपी 500 सूचकांक 76.08 अंक यानी 1.01 प्रतिशत गिरकर 7,457.69 पर बंद हुआ। प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में बिकवाली के कारण अमेरिकी बाजार दबाव में रहे, जिसका असर वैश्विक निवेशकों की धारणा पर पड़ा।
भारतीय बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में लगभग 500 अंक तक गिर गया, जबकि निफ्टी 24,250 के नीचे फिसल गया। बैंक निफ्टी में भी कमजोरी दिखाई दी और प्रमुख निजी बैंकों के शेयरों में लगातार बिकवाली दर्ज की गई। एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर सबसे अधिक दबाव में रहे। निवेशकों ने इन शेयरों में मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे पूरे बैंकिंग सेक्टर पर असर पड़ा।
विश्लेषकों का कहना है कि हाल के दिनों में बैंकिंग शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। ऐसे में वैश्विक संकेत कमजोर होने के बाद निवेशकों ने मुनाफा सुरक्षित करना बेहतर समझा। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है, जिससे महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है जिनकी उत्पादन लागत सीधे तेल और ईंधन पर निर्भर करती है। एयरलाइंस, पेंट, टायर, सीमेंट और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की कंपनियों के लिए बढ़ती तेल कीमतें चुनौती बन सकती हैं। दूसरी ओर तेल उत्पादन और अन्वेषण से जुड़ी कंपनियों को इसका कुछ लाभ मिल सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू स्तर पर अर्थव्यवस्था के मजबूत संकेत अब भी बने हुए हैं। कई बड़ी कंपनियों ने जून तिमाही के अच्छे नतीजे पेश किए हैं। आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और कई आईटी कंपनियों के परिणाम उम्मीद से बेहतर रहे हैं। इसके बावजूद वैश्विक अनिश्चितता फिलहाल निवेशकों को सतर्क बनाए हुए है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। पिछले कारोबारी सत्र में एफआईआई ने शॉर्ट कवरिंग की थी, जिससे बाजार को सहारा मिला था। हालांकि सोमवार को कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते निवेशकों का रुख फिर सतर्क दिखाई दिया। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी ने बाजार को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की, लेकिन शुरुआती बिकवाली का दबाव अधिक रहा।
आईटी सेक्टर में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। कुछ बड़ी आईटी कंपनियों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन वैश्विक टेक शेयरों में कमजोरी का असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी दिखाई दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी शुरुआती कारोबार के दौरान दबाव देखने को मिला, हालांकि कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जारी रही।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 24,250 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि यह स्तर बरकरार रहता है तो बाजार में दोबारा खरीदारी लौट सकती है, लेकिन इसके नीचे कमजोरी बढ़ने की आशंका बनी रहेगी। वहीं सेंसेक्स के लिए भी प्रमुख समर्थन स्तरों पर निवेशकों की नजर रहेगी।
विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के दौर में घबराकर निवेश संबंधी फैसले न लें। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) जारी रखना बेहतर रणनीति मानी जा रही है। अल्पकालिक कारोबार करने वाले निवेशकों को जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।
इस सप्ताह निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों, वैश्विक बाजारों की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। यदि वैश्विक बाजारों में स्थिरता लौटती है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है तो भारतीय शेयर बाजार में भी सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्कता और संतुलित निवेश रणनीति अपनाना सबसे उपयुक्त माना जा रहा है।
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