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राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल से अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने की सौजन्य भेंट

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भोपाल। मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल से उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने आज लोकभवन में सौजन्य भेंट की। यह मुलाकात सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें राज्य के विकास, उच्च शिक्षा व्यवस्था तथा जनकल्याण से जुड़े विभिन्न समसामयिक विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

लोकभवन में आयोजित इस शिष्टाचार भेंट के दौरान अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने राज्यपाल को उच्च शिक्षा विभाग की विभिन्न गतिविधियों, योजनाओं तथा विभागीय प्राथमिकताओं की जानकारी दी। साथ ही प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास तथा विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर भी चर्चा हुई।

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बैठक में राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहन, आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर भी सकारात्मक संवाद हुआ। उच्च शिक्षा व्यवस्था को समयानुकूल और अधिक प्रभावी बनाने के लिए शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की गई।

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि ज्ञान, शोध, नवाचार और सामाजिक चेतना के केंद्र होने चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा राष्ट्रीय भावना के विकास पर विशेष बल देने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के साथ-साथ अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। युवाओं को बदलती वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के लिए आधुनिक शिक्षा पद्धति, डिजिटल संसाधनों तथा उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित किए जाने चाहिए।

अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने राज्यपाल को उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, अधोसंरचना विकास, विद्यार्थियों के हित में संचालित कार्यक्रमों तथा विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ, समावेशी और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।

बैठक में विश्वविद्यालयों में अनुसंधान संस्कृति को प्रोत्साहित करने, नवाचार आधारित शिक्षा प्रणाली विकसित करने, डिजिटल लाइब्रेरी, ई-लर्निंग, स्मार्ट कक्षाओं तथा आधुनिक प्रयोगशालाओं जैसी सुविधाओं के विस्तार पर भी चर्चा की गई। साथ ही विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं, स्टार्टअप, नवाचार एवं कौशल विकास से जोड़ने के प्रयासों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है जो समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों को सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता से जोड़ने पर बल दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण निर्मित करने के लिए शिक्षकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ पारदर्शिता, जवाबदेही और अकादमिक उत्कृष्टता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सौजन्य भेंट के दौरान राज्य के समग्र विकास में शिक्षा की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों अधिकारियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि उच्च शिक्षा का स्तर बेहतर होने से प्रदेश में मानव संसाधन का विकास होगा, जिससे उद्योग, सेवा क्षेत्र, विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा सामाजिक विकास के विभिन्न क्षेत्रों को नई गति मिलेगी।

यह शिष्टाचार भेंट राज्य के संवैधानिक प्रमुख और प्रशासनिक नेतृत्व के बीच बेहतर समन्वय तथा शिक्षा क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए शासन स्तर पर निरंतर संवाद और समन्वय आवश्यक है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर बैठकें और विचार-विमर्श आयोजित किए जाते हैं।

लोकभवन में हुई यह सौजन्य भेंट राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रभावी प्रशासन तथा विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति शासन की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है। प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार, आधुनिक सुविधाओं के विस्तार तथा युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को विकास का आधार बनाकर मध्यप्रदेश को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए शासन और प्रशासन समन्वित रूप से कार्य कर रहे हैं।

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