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मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं सर्वोच्च प्राथमिकता, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई: कलेक्टर प्रियंक मिश्रा

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HQ Report

भोपाल। कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्रा ने जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक लेकर स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की व्यापक समीक्षा की। बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण कार्यक्रमों, वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम, टीबी उन्मूलन अभियान, आंगनवाड़ी सेवाओं तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी स्वीकार नहीं की जाएगी तथा योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचाना सभी विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती इला तिवारी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी श्री सुनील सोलंकी तथा स्वास्थ्य कार्यक्रमों के विभिन्न नोडल अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने जिले में संचालित स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रमों की प्रगति, उपलब्धियों तथा चुनौतियों का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर कलेक्टर ने बिंदुवार समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

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कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्रा ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी संबंधित विभागों की साझा जवाबदेही है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रसव पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव, नवजात शिशुओं की देखभाल, पूर्ण टीकाकरण तथा कुपोषण की रोकथाम से जुड़े कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं की समीक्षा केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मैदानी स्तर पर नियमित निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए, ताकि समस्याओं के मूल कारणों की सही पहचान हो सके। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति अपेक्षित स्तर पर नहीं मिलती है तो संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे और उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए आउटरीच गतिविधियों को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि दूरस्थ बस्तियों, शहरी गरीब क्षेत्रों तथा निर्माण स्थलों सहित उन सभी स्थानों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं, जहां नियमित रूप से नागरिकों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र हितग्राही तक स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचना सुनिश्चित किया जाए।

वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में डेंगू, मलेरिया तथा अन्य मच्छरजनित रोगों के संभावित हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान कर नियमित लार्वा सर्वे कराया जाए। साथ ही नागरिकों को स्वच्छता, जलभराव रोकने तथा मच्छरों से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किए जाएं। उन्होंने कहा कि रोकथाम संबंधी उपाय समय पर किए जाने से संक्रमण की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

टीबी उन्मूलन अभियान की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने टीबी मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली फूड बास्केट व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों, स्वयंसेवी संस्थाओं, उद्योगों तथा सामाजिक संगठनों को इस अभियान से जोड़कर मरीजों को पोषण सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि टीबी जैसी बीमारी के उपचार में पौष्टिक आहार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और समाज की सहभागिता से इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित पोषण सेवाओं तथा आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन की भी विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आंगनवाड़ी केंद्र नियमित रूप से संचालित हों और बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा धात्री माताओं को निर्धारित सेवाएं और पोषण आहार समय पर उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि पोषण अभियान की सफलता के लिए स्वास्थ्य एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

विशेष रूप से निर्माण स्थलों पर कार्य करने वाली महिला श्रमिकों एवं उनके बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर कलेक्टर ने गंभीरता दिखाई। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग संयुक्त रूप से कार्ययोजना तैयार कर ऐसे निर्माण स्थलों का नियमित भ्रमण करें। वहां कार्यरत महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, गर्भवती महिलाओं का पंजीयन, बच्चों का टीकाकरण, पोषण आहार की उपलब्धता तथा आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिक परिवारों तक स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं की पहुंच बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।

बैठक के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती इला तिवारी ने सिविल अस्पताल गोविंदपुरा में संस्थागत प्रसव के मामलों की कम संख्या तथा पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों की कम भर्ती पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों से इसके कारणों की जानकारी ली और सुधारात्मक उपायों पर चर्चा की।

इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि शासन द्वारा अस्पताल में पर्याप्त संख्या में चिकित्सकीय एवं पैरामेडिकल स्टाफ सहित आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद अपेक्षित सेवाएं नहीं मिलना गंभीर विषय है और इसकी समीक्षा की जा रही है।

समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद सेवाओं के संचालन में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तथा सिविल अस्पताल गोविंदपुरा के अस्पताल अधीक्षक बैठक में भी अनुपस्थित रहे। इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्रा ने अस्पताल अधीक्षक की एक वेतनवृद्धि रोकने तथा कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी और जिम्मेदारी तय करते हुए आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि जिला स्वास्थ्य समिति की बैठकों में लिए गए निर्णयों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित किया जाए। प्रत्येक कार्यक्रम की नियमित समीक्षा हो, प्रगति रिपोर्ट तैयार की जाए तथा मैदानी निरीक्षणों के माध्यम से योजनाओं की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन किया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य केवल लक्ष्य पूरा करना नहीं, बल्कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पोषण, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, किशोरी स्वास्थ्य, एनीमिया नियंत्रण तथा जनजागरूकता कार्यक्रमों को एकीकृत रूप से संचालित किया जाए, ताकि योजनाओं का अधिकतम लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे।

कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्रा ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन करना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक तक स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करें तथा नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार लाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी विभागों के समन्वित प्रयासों से जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी, कुपोषण में कमी आएगी, टीबी उन्मूलन अभियान को गति मिलेगी तथा नागरिकों को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

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