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कौशल शिक्षा को सशक्त बनाने पर राष्ट्रीय स्तर की बैठक, नई शिक्षा नीति और उद्योगों के साथ साझेदारी पर हुआ मंथन

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नई दिल्ली। देश में व्यावसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा को और अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण तथा रोजगारोन्मुख बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) द्वारा देशभर के कौशल विश्वविद्यालयों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, कौशल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, उद्योगों के साथ संस्थागत साझेदारी, अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों के विस्तार, रोजगार के अवसरों में वृद्धि तथा राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफ) को और अधिक मजबूत बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में विभिन्न राज्यों के कौशल विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों, शिक्षा विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं तथा कौशल विकास क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, आधुनिक तकनीकों और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल शिक्षा को विकसित करने पर अपने सुझाव साझा किए। इस दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि युवाओं को ऐसी शिक्षा और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, जिससे वे रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार के अवसरों का भी लाभ उठा सकें।

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बैठक में कहा गया कि नई शिक्षा नीति-2020 का प्रमुख उद्देश्य शिक्षा को अधिक लचीला, बहुआयामी, समावेशी और कौशल आधारित बनाना है। इसी दिशा में कौशल विश्वविद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालयों में ऐसे पाठ्यक्रम विकसित किए जाने पर बल दिया गया, जो उद्योगों की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप हों तथा विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव के साथ आधुनिक तकनीकी दक्षता भी प्रदान करें।

प्रतिभागियों ने कौशल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए पाठ्यक्रमों के नियमित अद्यतन, प्रशिक्षकों के क्षमता विकास, आधुनिक प्रयोगशालाओं, डिजिटल शिक्षण संसाधनों और उद्योग आधारित प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका मत था कि गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण से विद्यार्थियों की दक्षता बढ़ेगी और वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।

बैठक में उद्योगों और कौशल विश्वविद्यालयों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करने पर विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएं, तो विद्यार्थियों को प्रशिक्षण अवधि के दौरान ही व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा और रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। उद्योगों की भागीदारी से पाठ्यक्रमों को समयानुकूल बनाने, नई तकनीकों को शामिल करने तथा रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण को बढ़ावा देने में सहायता मिलेगी।

अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों के विस्तार को भी बैठक का प्रमुख विषय बनाया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि प्रशिक्षण और कार्यस्थल पर व्यावहारिक अनुभव का समन्वय युवाओं के कौशल विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसलिए अधिक से अधिक उद्योगों को अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों से जोड़ने तथा विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के दौरान वास्तविक कार्य वातावरण का अनुभव उपलब्ध कराने पर बल दिया गया।

राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफ) को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में भी व्यापक चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि यह ढांचा विभिन्न स्तरों की कौशल योग्यताओं को एक समान मानकों के अनुरूप व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे विद्यार्थियों को आगे की शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होते हैं तथा विभिन्न संस्थानों और उद्योगों के बीच योग्यता की मान्यता सुनिश्चित होती है।

बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि कौशल शिक्षा को केवल प्रमाण-पत्र प्राप्त करने तक सीमित न रखकर उसे रोजगार, उद्यमिता और नवाचार से जोड़ा जाना चाहिए। युवाओं में तकनीकी दक्षता, समस्या समाधान क्षमता, संचार कौशल, डिजिटल साक्षरता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए बहुआयामी प्रशिक्षण मॉडल अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

विशेषज्ञों ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स, डेटा एनालिटिक्स, हरित प्रौद्योगिकी और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों की मांग को देखते हुए कौशल विश्वविद्यालयों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप नए पाठ्यक्रम विकसित करने होंगे। इससे विद्यार्थी बदलते रोजगार बाजार की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकेंगे।

बैठक में राज्यों के कौशल विश्वविद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान तथा संयुक्त अनुसंधान एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर भी विचार किया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि विभिन्न राज्यों के अनुभवों को साझा करने से कौशल शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार संभव होगा।

एनसीवीईटी ने स्पष्ट किया कि देश में कौशल शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, प्रशिक्षण संस्थानों के मानकों को मजबूत बनाने तथा विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। परिषद का उद्देश्य ऐसा कौशल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप हो और युवाओं को रोजगार एवं उद्यमिता के लिए आवश्यक दक्षताओं से सुसज्जित करे।

बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाली कौशल शिक्षा, उद्योगों के साथ प्रभावी साझेदारी, आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था और रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं। प्रतिभागियों ने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालयों, उद्योगों और सरकार के बीच बेहतर समन्वय से देश के युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे तथा भारत को वैश्विक कौशल शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

बैठक का निष्कर्ष रहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कौशल शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, लचीला एवं परिणामोन्मुख बनाया जाएगा। नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे को मजबूत करने, उद्योगों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने तथा गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के माध्यम से देश के युवाओं को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करने की दिशा में सभी संबंधित संस्थाएं समन्वित रूप से कार्य करेंगी।

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