
राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रखर पुरोधा को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, विभिन्न स्थानों पर हुए संगोष्ठी, वृक्षारोपण, रक्तदान और सेवा कार्य
नई दिल्ली/भोपाल, 7 जुलाई 2026। भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी विचारक, शिक्षाविद् एवं स्वतंत्र भारत की राजनीति के महत्वपूर्ण स्तंभ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर मंगलवार को देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम, विचार गोष्ठियां, कार्यकर्ता सम्मेलन, प्रदर्शनी, रक्तदान शिविर, वृक्षारोपण एवं सेवा गतिविधियों का आयोजन किया गया। विभिन्न राज्यों में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और नागरिकों ने उनकी प्रतिमाओं एवं चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान का स्मरण किया।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की जिस विचारधारा को अपने जीवन का आधार बनाया, वह आज भी देश के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी स्पष्ट और दृढ़ भूमिका निभाई तथा देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा, संस्कृति, राष्ट्रवाद और सुशासन के प्रति डॉ. मुखर्जी का दृष्टिकोण दूरदर्शी था। उन्होंने स्वतंत्र भारत के विकास के लिए शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण आधार माना और देश के युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। उनका सार्वजनिक जीवन त्याग, सेवा, ईमानदारी और राष्ट्र के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है।
जयंती समारोह के दौरान विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ता सम्मेलनों का आयोजन कर उनके जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का मानना था कि भारत की एकता और अखंडता किसी भी परिस्थिति में सर्वोपरि है तथा राष्ट्रहित से बढ़कर कोई दूसरा हित नहीं हो सकता। उनके विचार आज भी देशवासियों को राष्ट्रीय दायित्वों के निर्वहन और समाज सेवा के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रमों के अंतर्गत युवाओं को राष्ट्रभक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष संवाद आयोजित किए गए। कई स्थानों पर रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, पौधरोपण, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर तथा जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री एवं वस्त्र वितरण जैसे सेवा कार्य भी किए गए। आयोजकों ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब उनके बताए आदर्शों को व्यवहार में उतारते हुए समाज और राष्ट्र की सेवा की जाए।
इस अवसर पर अनेक वक्ताओं ने भारत को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। राष्ट्र की एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, सांस्कृतिक गौरव और जनसेवा के प्रति उनका समर्पण भारतीय इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा।
देशभर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने भाग लेकर महान राष्ट्रनायक को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया।









