
नई दिल्ली। जल ही जीवन का आधार है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है। बढ़ती जनसंख्या, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट और जल स्रोतों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए भारत सरकार का जल शक्ति मंत्रालय जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसी दिशा में जल जीवन मिशन के अंतर्गत “कैच द रेन” (Catch the Rain) अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन कर पेयजल स्रोतों का संरक्षण और संवर्धन करना है।
इस वर्ष 21 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक “पेयजल स्रोतों का सम्मान और संरक्षण” विषय पर विशेष अभियान आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल जल स्रोतों की सुरक्षा करना ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक, ग्राम पंचायत, स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय समुदाय को जल संरक्षण के सामूहिक प्रयासों से जोड़ना भी है।
जल जीवन मिशन का मानना है कि जब पूरा गांव जल संरक्षण के लिए एकजुट होता है, तभी यह एक सशक्त जन आंदोलन का रूप लेता है। इसी सोच के साथ देशभर में ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम, सामुदायिक सहभागिता और जल संरक्षण गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अभियान के दौरान गांवों में “हर घर जल-जल संरक्षण संकल्प” दिलाया जाएगा, जिसके माध्यम से नागरिकों को वर्षा जल संचयन, जल का विवेकपूर्ण उपयोग तथा पेयजल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसका उद्देश्य जल संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम न बनाकर जनभागीदारी का अभियान बनाना है।
इस विशेष अभियान के अंतर्गत सामुदायिक बैठकों का आयोजन किया जाएगा, जहां ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, जल एवं स्वच्छता समितियों तथा स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर जल संरक्षण की रणनीतियों पर चर्चा होगी। इन बैठकों में गांव के पारंपरिक जल स्रोतों की पहचान, संरक्षण और पुनर्जीवन की योजनाएं तैयार की जाएंगी।
जल संरक्षण को सामाजिक उत्सव का स्वरूप देने के लिए लोक जल उत्सव भी आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों में जल संरक्षण से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम, जनजागरूकता रैलियां, प्रदर्शनी, प्रतियोगिताएं और सामुदायिक गतिविधियां आयोजित कर लोगों को जल बचाने का संदेश दिया जाएगा।
अभियान के दौरान जल चौपालों का भी आयोजन होगा, जहां ग्रामीणों को वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण, जल स्रोतों की देखभाल तथा जल प्रबंधन की वैज्ञानिक और पारंपरिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। जल चौपाल ग्रामीण समुदाय और प्रशासन के बीच संवाद का प्रभावी माध्यम बनेगी।
भूजल स्तर में लगातार हो रही गिरावट को देखते हुए भूजल पुनर्भरण गतिविधियों पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके तहत रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण, वर्षा जल को जमीन में समाहित करने के उपाय, तालाबों और कुओं का संरक्षण तथा जल निकासी व्यवस्था में सुधार जैसे कार्य किए जाएंगे। इससे वर्षा का पानी व्यर्थ बहने के बजाय भूजल भंडार को समृद्ध करेगा।
अभियान के अंतर्गत स्रोत संरक्षण अभियान भी संचालित किया जाएगा। इसमें नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों, झरनों और अन्य पेयजल स्रोतों की साफ-सफाई, संरक्षण और पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने और प्रदूषण रोकने के लिए भी व्यापक जनजागरूकता चलाई जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्षा जल का वैज्ञानिक ढंग से संचयन किया जाए तो जल संकट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। वर्षा का अधिकांश पानी बिना उपयोग के बह जाता है, जबकि उसे संरक्षित कर पेयजल और भूजल दोनों की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है। यही कैच द रेन अभियान का मूल उद्देश्य है—“जहां भी बारिश हो, जब भी बारिश हो, वर्षा जल को वहीं संरक्षित करें।”
जल जीवन मिशन के अंतर्गत देशभर में हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के साथ-साथ जल स्रोतों के दीर्घकालिक संरक्षण पर भी विशेष बल दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि केवल पाइपलाइन और जलापूर्ति व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि जल के प्राकृतिक स्रोतों को संरक्षित करना भी उतना ही आवश्यक है।
जल संरक्षण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। घरों में वर्षा जल संचयन प्रणाली अपनाना, जल का अनावश्यक उपयोग रोकना, जल स्रोतों को स्वच्छ रखना और स्थानीय संरक्षण गतिविधियों में भागीदारी करना ऐसे छोटे-छोटे कदम हैं जो भविष्य में बड़े सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों, जल एवं स्वच्छता समितियों, स्वयं सहायता समूहों, विद्यालयों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी इस अभियान की सफलता का प्रमुख आधार होगी। सामूहिक प्रयासों से जल संरक्षण की संस्कृति विकसित होगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल संसाधन उपलब्ध रहेंगे।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे 21 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक आयोजित होने वाले “कैच द रेन” अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लें और वर्षा जल संचयन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। जल संरक्षण केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और मानवीय जिम्मेदारी भी है।
जब पूरा गांव जुड़ता है, तो जल संरक्षण जन आंदोलन बन जाता है। यही संदेश लेकर जल जीवन मिशन का “कैच द रेन” अभियान लोगों को प्रेरित कर रहा है कि वे पेयजल स्रोतों का सम्मान करें, उनका संरक्षण करें और वर्षा जल संचयन के माध्यम से जल सुरक्षा की मजबूत नींव रखें। जनभागीदारी और सामूहिक प्रयासों से ही जल समृद्ध भारत का सपना साकार किया जा सकता है।