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HQ Report
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से उच्च शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुखी, आधुनिक और संस्कारयुक्त बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल भारत की प्राचीन धरोहर नहीं है, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की मजबूत आधारशिला भी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भारतीय शिक्षा दर्शन को पुनः स्थापित करने का ऐतिहासिक अवसर प्रदान किया है, जिससे विद्यार्थियों को ज्ञान और कौशल के साथ भारतीय संस्कृति, आत्मगौरव, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की भावना से भी जोड़ा जा रहा है।
उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार भोपाल स्थित सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय में आयोजित “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के वैभवशाली स्वरूप” विषयक बौद्धिक कार्यक्रम “श्री गुरुदेवाय नमः” को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को प्रभावी रूप से लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाया जा रहा है। प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश इसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इससे विद्यार्थियों को भारतीय सभ्यता, संस्कृति, दर्शन और जीवन मूल्यों की समग्र जानकारी प्राप्त होगी।

मंत्री श्री परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की स्मृतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन मूल्यों, अनुसंधान, नवाचार, वैज्ञानिक सोच और लोककल्याण की निरंतर प्रवाहित होने वाली परंपरा है। हमारे ऋषि-मुनियों और पूर्वजों ने अपने ज्ञान, चरित्र और व्यवहार से विश्व को नई दिशा दी। आज आवश्यकता है कि इस अमूल्य विरासत का आधुनिक संदर्भों में शोध, अनुसंधान और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण किया जाए, ताकि भारतीय ज्ञान परंपरा वैश्विक स्तर पर भी प्रेरणा का स्रोत बन सके।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जीवन, प्रकृति, समाज और संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया है। विद्यालयों में बच्चों पर बस्ते का बोझ कम किया गया है तथा अनुभव आधारित और प्रकृति से जुड़ी शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं उच्च शिक्षा में बहुविषयक अध्ययन, अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी शिक्षा के साथ संस्कारयुक्त शिक्षण पर विशेष बल दिया जा रहा है।
श्री परमार ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश सरकार का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुखी एवं संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लिए उच्च शिक्षा संस्थानों में आवश्यक अधोसंरचना का विस्तार किया जा रहा है तथा मानव संसाधनों को मजबूत बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महाविद्यालयों में रिक्त पदों पर लगातार भर्ती की जा रही है तथा विश्वविद्यालयों में भी शीघ्र नियुक्तियां की जाएंगी, जिससे शिक्षण व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।










