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पेंशनरों की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को सौंपा गया ज्ञापन

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HQ Report
पेंशनरों की प्रमुख मांगों पर सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की अपेक्षा
भोपाल। मध्यप्रदेश के वरिष्ठ नागरिक पेंशनर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के विभिन्न विभागों से सेवानिवृत्त कर्मचारियों एवं पेंशनरों की लंबे समय से लंबित समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री (वित्त) जगदीश देवड़ा तथा मुख्य सचिव (वित्त) को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। विधानसभा सत्र के कारण मुख्यमंत्री की व्यस्तता को देखते हुए प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री कार्यालय, उपमुख्यमंत्री कार्यालय एवं संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर पेंशनरों की प्रमुख मांगों से अवगत कराया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49(6) की व्यवस्था समाप्त किए जाने पर मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए इसे कर्मचारियों एवं पेंशनरों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय बताया। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि इस निर्णय से वर्षों से चली आ रही एक बड़ी प्रशासनिक जटिलता समाप्त हुई है, जिससे अनेक सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत मिली है। संगठन ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आशा जताई कि सरकार पेंशनरों से जुड़े अन्य लंबित मामलों पर भी संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेकर उन्हें शीघ्र राहत प्रदान करेगी। प्रतिनिधिमंडल में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट राजकुमार दुबे सहित विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारी एवं वरिष्ठ सदस्य शामिल रहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लाखों पेंशनर अपने सेवा जीवन में राज्य के विकास में योगदान दे चुके हैं, इसलिए उनके सम्मानजनक जीवन, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक अधिकारों की रक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से संगठन ने विस्तृत मांगपत्र प्रस्तुत करते हुए विभिन्न विषयों पर शीघ्र निर्णय की अपेक्षा व्यक्त की।
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में केंद्र सरकार के समान राज्य के पेंशनरों को 60 प्रतिशत महंगाई राहत (डीआर) प्रदान करने की मांग प्रमुखता से उठाई। इसके साथ ही छठे एवं सातवें वेतनमान के अंतर्गत लंबित महंगाई राहत एरियर का शीघ्र भुगतान करने, 30 जून एवं 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को एक वेतनवृद्धि का लाभ देने, शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के 300 दिनों के अर्जित अवकाश के नकदीकरण का भुगतान सुनिश्चित करने तथा 35 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले कर्मचारियों को चतुर्थ क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ दिए जाने की मांग भी रखी गई। संगठन ने 65 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले पेंशनरों को अतिरिक्त पेंशन वृद्धि तथा 80 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर नियमानुसार 20 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन दिए जाने की व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने का आग्रह किया। प्रतिनिधिमंडल ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने, आयुष्मान भारत योजना का लाभ सभी पात्र पेंशनरों तक पहुंचाने, वरिष्ठ नागरिकों के लिए निःशुल्क अथवा रियायती चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा रेल यात्रा में रियायत जैसी सुविधाओं को पुनः प्रभावी बनाने की मांग भी रखी। इसके अतिरिक्त सेवा निवृत्ति के एक माह के भीतर पीपीओ, जीपीएफ, जीआईएस तथा अन्य समस्त देयकों का भुगतान सुनिश्चित करने, विभागीय स्तर पर लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण करने तथा पेंशन स्वीकृति की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं सरल बनाने का सुझाव भी ज्ञापन में शामिल किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो प्रदेश के लाखों पेंशनरों को आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा और उनके जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि पेंशन केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि कर्मचारियों की आजीवन सेवा के प्रति सरकार का सम्मान है। इसलिए पेंशनरों की समस्याओं को केवल वित्तीय विषय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक दायित्व के रूप में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि अनेक पेंशनरों को आज भी महंगाई राहत, एरियर, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, अर्जित अवकाश भुगतान तथा पेंशन संशोधन जैसे मामलों में लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से वृद्धावस्था में स्वास्थ्य संबंधी व्यय बढ़ जाने के कारण समय पर पेंशन एवं अन्य देयकों का भुगतान अत्यंत आवश्यक हो जाता है। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से अनुरोध किया कि पेंशन संबंधी सभी प्रकरणों के लिए समयबद्ध व्यवस्था बनाई जाए तथा प्रत्येक विभाग में नोडल अधिकारी नियुक्त कर शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पेंशनरों को उनके प्रकरणों की स्थिति की ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध कराने की भी मांग की गई, जिससे अनावश्यक कार्यालयीन चक्कर कम हों और पारदर्शिता बढ़े। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी सुझाव दिया कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सहायता केंद्र स्थापित किए जाएं, जहां पेंशन, चिकित्सा, सामाजिक सुरक्षा एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित सभी जानकारी और सहायता एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सके।
प्रतिनिधिमंडल की ओर से यह विश्वास व्यक्त किया गया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा तथा राज्य सरकार पेंशनरों की जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी। प्रतिनिधियों ने बताया कि शासन स्तर पर उनकी मांगों को गंभीरता से सुना गया तथा संबंधित विषयों पर नियमानुसार परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। संगठन का मानना है कि सरकार और पेंशनर संगठनों के बीच नियमित संवाद की व्यवस्था विकसित होने से समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेशभर के पेंशनरों से भी अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें तथा संगठनात्मक रूप से एकजुट होकर रचनात्मक संवाद के माध्यम से अपनी बात शासन तक पहुंचाएं। संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि सहयोग और संवाद के माध्यम से पेंशनरों के हितों की रक्षा करना है। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि प्रदेश सरकार वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनरों के सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उनकी लंबित समस्याओं का चरणबद्ध समाधान करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना सुशासन की पहचान है और इसी भावना के साथ सरकार सकारात्मक निर्णय लेकर लाखों पेंशनरों को राहत प्रदान करेगी।
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