
भोपाल, 10 अगस्त 2026। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार, 10 अगस्त को विभिन्न महत्वपूर्ण शासकीय, सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री की दिनभर की व्यस्तताओं में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस से जुड़े कार्यक्रम, जबलपुर प्रवास, स्थानीय धार्मिक आयोजन, राज्य स्तरीय बुनकर एवं शिल्पी सम्मान तथा वेब कॉमर्स पोर्टल का लोकार्पण सहित कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री मंत्रालय में मुलाकात और बैठक में भी शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री की निर्धारित कार्यक्रम रूपरेखा के अनुसार दिन की शुरुआत सुबह 9.45 बजे ब्रीफिंग-एजेंसी इंटेलिजेंस/आयुक्त जनसंपर्क के साथ होगी। इसके बाद मुख्यमंत्री 10 बजे से 10.15 बजे तक स्टेट हैंगर, भोपाल पहुंचेंगे। यहां से वे 10.20 बजे से 10.55 बजे के बीच वायुयान से डुमना एयरपोर्ट, जबलपुर पहुंचेंगे।
जबलपुर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से 11.15 बजे रांझी, जबलपुर पहुंचेंगे। यहां 11.15 बजे से दोपहर 12 बजे तक स्थानीय कार्यक्रम ‘संस्कार कांवड़ यात्रा 2026’ में सहभागिता करेंगे। इसके बाद दोपहर 12.15 बजे डुमना एयरपोर्ट, जबलपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री वापस भोपाल के लिए रवाना होंगे।
मुख्यमंत्री का वायुयान से लगभग 12.30 बजे से 1.05 बजे के बीच स्टेट हैंगर, भोपाल पहुंचने का कार्यक्रम है। इसके बाद वे लगभग 1.20 बजे रविन्द्र भवन, भोपाल पहुंचेंगे। यहां 1.25 बजे से 2.10 बजे तक अभिनंदन कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे।
इसके बाद मुख्यमंत्री 2.20 बजे कुशाभाऊ ठाकरे हॉल, भोपाल पहुंचेंगे। यहां 2.20 बजे से 3.20 बजे तक राज्य स्तरीय बुनकर एवं शिल्पी सम्मान एवं वेब कॉमर्स पोर्टल के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम हथकरघा, बुनकरों, शिल्पकारों और पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री लगभग 3.30 बजे मंत्रालय पहुंचेंगे। यहां 3.30 बजे मुलाकात का कार्यक्रम निर्धारित है। इसके बाद शाम 4 बजे मंत्रालय में बैठक होगी, जिसमें स्वतंत्रता दिवस एवं अन्य पर्वों के आयोजन के संबंध में चर्चा की जाएगी। बैठक के बाद मुख्यमंत्री निवास के लिए रवाना होंगे।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बुनकरों और शिल्पियों को सम्मान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 10 अगस्त के कार्यक्रम में राज्य स्तरीय बुनकर एवं शिल्पी सम्मान समारोह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। हथकरघा और हस्तशिल्प मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक एवं आर्थिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में बुनकर और शिल्पकार पीढ़ियों से पारंपरिक कला, वस्त्र निर्माण और हस्तशिल्प की परंपराओं को आगे बढ़ाते आ रहे हैं।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे कारीगरों और बुनकरों को प्रोत्साहन देने का संदेश भी सामने आएगा, जो अपनी मेहनत और पारंपरिक कौशल के माध्यम से प्रदेश की पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने में योगदान दे रहे हैं।
राज्य स्तरीय सम्मान से उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों और शिल्पियों का मनोबल बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही युवा पीढ़ी को पारंपरिक हस्तकला एवं हथकरघा क्षेत्र से जोड़ने में भी ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
वेब कॉमर्स पोर्टल से बाजार तक पहुंच बनाने की पहल
कार्यक्रम में वेब कॉमर्स पोर्टल का लोकार्पण भी किया जाएगा। डिजिटल युग में पारंपरिक उत्पादों को ऑनलाइन बाजार उपलब्ध कराना बुनकरों और शिल्पकारों के लिए बड़ा अवसर बन सकता है।
स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले हथकरघा वस्त्र, हस्तशिल्प, कलात्मक उत्पाद और पारंपरिक वस्तुओं को यदि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापक बाजार उपलब्ध होता है, तो कारीगरों को स्थानीय बाजार की सीमाओं से बाहर निकलकर देश के विभिन्न हिस्सों और संभावित रूप से अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंच बनाने का अवसर मिलेगा।
ऑनलाइन बिक्री के माध्यम से उत्पादों की पहचान बढ़ाने के साथ-साथ बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और कारीगरों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य दिलाने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
जबलपुर में संस्कार कांवड़ यात्रा 2026 में सहभागिता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार सुबह भोपाल से जबलपुर जाएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वे रांझी में संस्कार कांवड़ यात्रा 2026 के स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे।
धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में मुख्यमंत्री की सहभागिता प्रदेश की सामाजिक और धार्मिक परंपराओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कांवड़ यात्रा भारतीय धार्मिक परंपरा में भगवान शिव की आराधना से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है।
जबलपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का यह हिस्सा स्थानीय स्तर पर विशेष महत्व रखता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों की सहभागिता वाले ऐसे आयोजनों के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता का संदेश भी सामने आता है।
भगवान महाकालेश्वर की द्वितीय सवारी का संदर्भ
10 अगस्त का दिन धार्मिक दृष्टि से भी विशेष है। मुख्यमंत्री की कार्यक्रम सूची में भगवान महाकालेश्वर जी की द्वितीय सवारी का उल्लेख है। श्रावण मास में उज्जैन स्थित भगवान महाकालेश्वर की सवारियां धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र होती हैं।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शामिल है और श्रावण मास के दौरान उज्जैन में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंचती है। सवारी के दौरान भगवान महाकालेश्वर के दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं।
मुख्यमंत्री की दिनचर्या में धार्मिक आयोजन का उल्लेख इस बात को रेखांकित करता है कि प्रदेश में श्रावण और धार्मिक पर्वों के दौरान प्रशासनिक एवं सामाजिक गतिविधियां व्यापक स्तर पर संचालित हो रही हैं।
सरकार और संस्कृति का समन्वय
मुख्यमंत्री का 10 अगस्त का कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों को एक साथ जोड़ता दिखाई देता है। एक ओर राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बुनकरों एवं शिल्पियों को सम्मान और डिजिटल बाजार से जोड़ने की पहल है, तो दूसरी ओर धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में सहभागिता है।
इसके अतिरिक्त मंत्रालय में स्वतंत्रता दिवस एवं अन्य पर्वों के आयोजन को लेकर बैठक भी निर्धारित है। इस प्रकार दिनभर के कार्यक्रमों में संस्कृति, परंपरा, रोजगार, कारीगरों के सम्मान और प्रशासनिक तैयारियों से जुड़े विभिन्न विषय शामिल हैं।
स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों पर होगी चर्चा
शाम 4 बजे मंत्रालय में होने वाली बैठक में स्वतंत्रता दिवस एवं अन्य पर्वों के आयोजन के संबंध में चर्चा प्रस्तावित है। स्वतंत्रता दिवस को लेकर प्रदेशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे आयोजनों की तैयारियों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं, सुरक्षा, यातायात, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, ध्वजारोहण और जनभागीदारी जैसे विषय महत्वपूर्ण होते हैं।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में संबंधित विभागों की तैयारियों की समीक्षा तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाने की संभावना है।
दिनभर विभिन्न गतिविधियों में व्यस्त रहेंगे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री की निर्धारित समय-सारणी के अनुसार 10 अगस्त का दिन अत्यंत व्यस्त रहेगा। सुबह भोपाल में ब्रीफिंग से दिन की शुरुआत होगी। इसके बाद अल्प समय में जबलपुर पहुंचकर स्थानीय कार्यक्रम में सहभागिता और फिर भोपाल वापसी का कार्यक्रम है।
भोपाल लौटने के बाद रविन्द्र भवन में अभिनंदन कार्यक्रम, कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में बुनकर एवं शिल्पी सम्मान तथा वेब कॉमर्स पोर्टल का लोकार्पण, मंत्रालय में मुलाकात और शाम की बैठक निर्धारित है।
यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री के सार्वजनिक एवं प्रशासनिक दायित्वों की व्यापकता को भी दर्शाता है।
बुनकरों की मेहनत को नई पहचान देने का प्रयास
मध्यप्रदेश में हथकरघा क्षेत्र से हजारों परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। पारंपरिक वस्त्रों और हस्तशिल्प की अपनी विशिष्ट पहचान है। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में अलग-अलग प्रकार की बुनाई, कपड़ा निर्माण और हस्तकला की परंपराएं विकसित हुई हैं।
इन उत्पादों को आधुनिक डिजाइन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग से जोड़कर नए उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सकता है। आज उपभोक्ता ऑनलाइन माध्यम से देश के किसी भी हिस्से से उत्पाद खरीद सकता है। ऐसे में बुनकरों और शिल्पियों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म नई संभावनाएं खोल सकते हैं।
पारंपरिक कला के संरक्षण के साथ रोजगार का अवसर
हथकरघा और हस्तशिल्प केवल कला और संस्कृति से जुड़े विषय नहीं हैं। इनके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका भी चलती है। यदि पारंपरिक उत्पादों की मांग बढ़ती है तो उत्पादन बढ़ाने के साथ नए रोजगार भी पैदा हो सकते हैं।
युवा पीढ़ी यदि इस क्षेत्र को आधुनिक बाजार और बेहतर आय से जुड़ा हुआ देखेगी तो पारंपरिक कला के संरक्षण की संभावना भी मजबूत होगी। इसी कारण बुनकर एवं शिल्पी सम्मान जैसे आयोजन प्रतीकात्मक सम्मान से आगे बढ़कर आर्थिक और सामाजिक प्रोत्साहन का माध्यम बन सकते हैं।
डिजिटल बाजार से स्थानीय उत्पादों को व्यापक मंच
वेब कॉमर्स पोर्टल का लोकार्पण इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि इससे स्थानीय उत्पादों को डिजिटल बाजार से जोड़ा जा सकता है। आज किसी उत्पाद की सफलता केवल उसके उत्पादन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी ब्रांडिंग, डिजिटल उपस्थिति, ग्राहक तक पहुंच और ऑनलाइन बिक्री की क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है।
यदि स्थानीय कारीगरों को इन सभी क्षेत्रों में संस्थागत सहायता मिलती है, तो मध्यप्रदेश के पारंपरिक उत्पाद देश के बड़े शहरों के उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
जबलपुर और भोपाल दोनों के लिए महत्वपूर्ण दिन
10 अगस्त को मुख्यमंत्री का जबलपुर और भोपाल दोनों स्थानों पर कार्यक्रम है। जबलपुर में धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम में सहभागिता के बाद भोपाल में बुनकर एवं शिल्पी सम्मान तथा वेब कॉमर्स पोर्टल के लोकार्पण में भागीदारी होगी।
इससे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सरकार की गतिविधियों और कार्यक्रमों की निरंतरता दिखाई देती है। साथ ही स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों तथा राज्य स्तर की योजनाओं को एक साथ आगे बढ़ाने का अवसर भी मिलता है।
समग्र विकास की दिशा में विभिन्न पहल
मुख्यमंत्री की दिनचर्या में शामिल कार्यक्रमों को व्यापक रूप से देखें तो इनमें संस्कृति, धार्मिक आस्था, पारंपरिक रोजगार, डिजिटल बाजार और प्रशासनिक तैयारियों के विभिन्न पहलू शामिल हैं।
एक ओर बुनकरों और शिल्पियों के सम्मान के माध्यम से पारंपरिक अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने का प्रयास है, वहीं डिजिटल कॉमर्स के माध्यम से उन्हें आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में कदम है। दूसरी ओर धार्मिक आयोजनों में सहभागिता सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करती है।
मुख्यमंत्री की 10 अगस्त की प्रमुख कार्यक्रम सूची
सुबह 9.45 बजे – ब्रीफिंग, एजेंसी इंटेलिजेंस/आयुक्त जनसंपर्क।
सुबह 10.00 से 10.15 बजे – स्टेट हैंगर, भोपाल आगमन।
सुबह 10.20 से 10.55 बजे – वायुयान से डुमना एयरपोर्ट, जबलपुर आगमन।
सुबह 11.15 बजे – रांझी, जबलपुर आगमन।
सुबह 11.15 से दोपहर 12.00 बजे – स्थानीय कार्यक्रम, संस्कार कांवड़ यात्रा 2026।
दोपहर 12.15 बजे – डुमना एयरपोर्ट, जबलपुर आगमन और भोपाल के लिए प्रस्थान।
दोपहर 12.30 से 1.05 बजे – वायुयान से स्टेट हैंगर, भोपाल आगमन।
दोपहर 1.20 बजे – रविन्द्र भवन आगमन।
दोपहर 1.25 से 2.10 बजे – अभिनंदन कार्यक्रम।
दोपहर 2.20 बजे – कुशाभाऊ ठाकरे हॉल, भोपाल आगमन।
दोपहर 2.20 से 3.20 बजे – राज्य स्तरीय बुनकर/शिल्पी सम्मान एवं वेब कॉमर्स पोर्टल का लोकार्पण।
दोपहर 3.30 बजे – मंत्रालय आगमन।
दोपहर 3.30 बजे – मुलाकात।
शाम 4.00 बजे – स्वतंत्रता दिवस एवं अन्य पर्वों के आयोजन के संबंध में बैठक।
बैठक के बाद – मुख्यमंत्री निवास आगमन।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की 10 अगस्त की व्यस्तताओं में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत, बुनकरों एवं शिल्पियों के सम्मान, डिजिटल बाजार और प्रशासनिक तैयारियों से जुड़े कार्यक्रमों का समावेश है। विशेष रूप से राज्य स्तरीय बुनकर एवं शिल्पी सम्मान के साथ वेब कॉमर्स पोर्टल का लोकार्पण पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
परंपरा को सम्मान, हुनर को पहचान और स्थानीय उत्पादों को डिजिटल बाजार—10 अगस्त को मुख्यमंत्री की व्यस्तताओं में इन तीनों क्षेत्रों पर विशेष फोकस दिखाई देगा।