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पेंशन पुनरीक्षण एरियर के लंबित मामलों में कानूनी कार्रवाई के निर्देश, 32 और 27 माह की अवधि से जुड़े प्रकरणों पर वित्त विभाग की नजर

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भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के वित्त विभाग द्वारा पेंशन पुनरीक्षण एरियर से संबंधित न्यायालयों में लंबित प्रकरणों को लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। वित्त विभाग के दस्तावेज में 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक की 32 माह की अवधि के छठवें वेतनमान तथा 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक की 27 माह की अवधि के सातवें वेतनमान से संबंधित पेंशन पुनरीक्षण एरियर के प्रकरणों का उल्लेख किया गया है। आदेश में संबंधित विभागों, संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को न्यायालयों में लंबित मामलों में प्रभारी अधिकारी अथवा शासकीय अधिवक्ता के माध्यम से आवश्यक विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। दस्तावेज में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ द्वारा पारित विभिन्न आदेशों का भी संदर्भ दिया गया है।
वित्त विभाग के दस्तावेज के अनुसार 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक की 32 माह की अवधि के पेंशन एरियर से संबंधित मामलों में न्यायालयीन स्थिति को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जानी है। इसी प्रकार 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक की 27 माह की अवधि के पेंशन एरियर से संबंधित मामलों को लेकर भी न्यायालयों में चल रहे प्रकरणों पर विधिक प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अवधि के पेंशन पुनरीक्षण एरियर से जुड़े न्यायालयीन मामलों तथा अवमानना याचिकाओं में उच्च न्यायालय द्वारा पारित स्थगन आदेशों के प्रकाश में प्रभारी अधिकारी अथवा शासकीय अधिवक्ता के माध्यम से आवश्यक कानूनी कार्रवाई और स्थगन प्राप्त करने की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
दस्तावेज में WA-760/2026 और WA-2182/2025 में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ द्वारा पारित आदेशों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। WA-760/2026 से संबंधित आदेश में न्यायालय के समक्ष उठाए गए समान मुद्दे का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि संबंधित विषय उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित एसएलपी से जुड़ा है। दस्तावेज में न्यायालय के आदेश का अंग्रेजी अंश भी उद्धृत किया गया है, जिसके अनुसार संबंधित मुद्दा बड़ी पीठ के समक्ष भेजा जा चुका है और तब तक संबंधित आदेश के संचालन पर स्थगन प्रभावी रहेगा।
इसी क्रम में WA-2182/2025 से संबंधित मामले का भी उल्लेख किया गया है। दस्तावेज में कहा गया है कि इस प्रकरण में उठाया गया मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबित एसएलपी से संबंधित है तथा पूर्व में बड़ी पीठ के समक्ष संदर्भित किया जा चुका है। इसलिए मामले की सुनवाई स्थगित रहने और संबंधित आदेश के संचालन पर रोक की न्यायालयीन स्थिति को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जानी है। वित्त विभाग ने इस न्यायालयीन स्थिति के मद्देनजर सभी संबंधित विभागों को अपने स्तर पर आवश्यक विधिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
वित्त विभाग के पत्र में जिन मामलों का उल्लेख किया गया है, उनका संबंध सीधे तौर पर पेंशन पुनरीक्षण एरियर से है। छठवें वेतनमान के संदर्भ में 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक की 32 माह की अवधि तथा सातवें वेतनमान के संदर्भ में 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक की 27 माह की अवधि को लेकर विभिन्न न्यायालयों में मामले चल रहे हैं। विभाग ने संबंधित मामलों की न्यायालयीन स्थिति को ध्यान में रखते हुए सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई के बजाय विधिक प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ने पर जोर दिया है। इसका अर्थ यह है कि जिन मामलों में न्यायालयीन आदेश अथवा स्थगन प्रभावी है, वहां संबंधित विभागों को शासकीय अधिवक्ताओं के माध्यम से न्यायालयीन स्थिति के अनुरूप कार्रवाई करनी होगी।
दस्तावेज में याचिकाकर्ता दिगम्बर भावकर एवं अन्य द्वारा छठवें वेतनमान के अंतर्गत 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक की 32 माह की अवधि के पेंशन एरियर राशि का भुगतान ब्याज सहित किए जाने से संबंधित प्रकरण का भी संदर्भ है। इस मामले में मध्यप्रदेश शासन के वित्त विभाग द्वारा दायर WA-760/2026 में उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के 7 अगस्त 2026 के आदेश का उल्लेख किया गया है। न्यायालयीन आदेश में संबंधित मुद्दे के उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित होने तथा बड़े बेंच के संदर्भ का उल्लेख करते हुए सुनवाई स्थगित रहने की स्थिति दर्ज है।
इसी तरह सातवें वेतनमान से संबंधित WP-11034/2022, श्री मनमोहन व्यास मामले में पारित आदेश के विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन के वित्त विभाग द्वारा दायर WA-2182/2025 में उच्च न्यायालय इंदौर द्वारा 28 जुलाई 2025 को पारित आदेश का उल्लेख वित्त विभाग के पत्र में किया गया है। आदेश में संबंधित मुद्दे को बड़ी पीठ के समक्ष संदर्भित किए जाने के कारण सुनवाई स्थगित रहने तथा संबंधित आदेश के संचालन पर रोक की स्थिति का उल्लेख है। वित्त विभाग ने इसी न्यायालयीन स्थिति को देखते हुए 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक की 27 माह की अवधि से संबंधित मामलों में भी आवश्यक विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
वित्त विभाग के निर्देशों का दायरा केवल किसी एक विभाग तक सीमित नहीं रखा गया है। पत्र शासन के समस्त विभागों, अध्यक्ष राजस्व मंडल ग्वालियर, समस्त संभागीय आयुक्तों, समस्त विभागाध्यक्षों और समस्त जिला अध्यक्षों को संबोधित किया गया है। इस व्यवस्था के तहत जिन विभागों अथवा कार्यालयों में पेंशन पुनरीक्षण एरियर से संबंधित न्यायालयीन मामले लंबित हैं, उन्हें संबंधित प्रकरण की न्यायालयीन स्थिति की समीक्षा करते हुए नियमानुसार विधिक कार्रवाई करनी होगी।
निर्देशों में विशेष रूप से कहा गया है कि न्यायालयों में चल रहे पेंशन पुनरीक्षण एरियर से संबंधित मामलों और अवमानना याचिकाओं में उच्च न्यायालय द्वारा पारित स्थगन आदेशों के प्रकाश में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके लिए प्रभारी अधिकारी और शासकीय अधिवक्ता के माध्यम से आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूरी करने तथा जहां आवश्यक हो वहां स्थगन प्राप्त करने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। इससे संबंधित विभागों के स्तर पर लंबित न्यायालयीन प्रकरणों की निगरानी और उनमें समय पर कानूनी पैरवी की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है।
पेंशन पुनरीक्षण एरियर का मुद्दा लंबे समय से न्यायालयीन प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। अलग-अलग वेतनमानों के पुनरीक्षण के बाद एरियर भुगतान की अवधि और उससे संबंधित अधिकारों को लेकर विभिन्न पेंशनर्स एवं संबंधित पक्षों की ओर से न्यायालयों में प्रकरण दायर किए गए हैं। ऐसे मामलों में किसी एक आदेश के आधार पर सभी प्रकरणों का एक समान निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, क्योंकि प्रत्येक मामले की अपनी न्यायालयीन स्थिति हो सकती है। वित्त विभाग के वर्तमान निर्देशों का मुख्य जोर लंबित मामलों में संबंधित न्यायालयों के आदेशों और स्थगन की स्थिति को ध्यान में रखते हुए विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने पर है।
वित्त विभाग के पत्र में यह भी स्पष्ट है कि संबंधित अवधि के एरियर मामलों को न्यायालयीन स्थिति के अनुसार देखा जाना है। जहां किसी प्रकरण में उच्च न्यायालय अथवा उच्चतम न्यायालय के स्तर पर मुद्दा लंबित है, वहां संबंधित विभाग को शासकीय अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालयीन प्रक्रिया में आवश्यक कार्रवाई करनी होगी। इस प्रक्रिया में संबंधित आदेशों का अध्ययन, प्रकरण की वर्तमान स्थिति का परीक्षण और आवश्यकता के अनुसार स्थगन अथवा अन्य विधिक राहत के लिए कार्रवाई शामिल हो सकती है।
इस पूरे मामले में उच्च न्यायालय के साथ-साथ उच्चतम न्यायालय में लंबित कार्यवाही का संदर्भ महत्वपूर्ण है। दस्तावेज में उल्लेखित न्यायालयीन आदेशों के अनुसार संबंधित विषय बड़ी पीठ के समक्ष संदर्भित किए जाने तथा उच्चतम न्यायालय में एसएलपी लंबित होने की स्थिति में है। इसलिए अंतिम न्यायालयीन स्थिति आने तक संबंधित प्रकरणों में आगे की कार्रवाई न्यायालय के आदेशों के अनुरूप ही की जानी है। वित्त विभाग ने अपने निर्देशों के माध्यम से विभागीय अधिकारियों को इसी न्यायालयीन प्रक्रिया के अनुरूप कदम उठाने को कहा है।
32 माह और 27 माह की अवधि से जुड़े एरियर मामलों को लेकर पेंशनर्स के बीच भी लंबे समय से रुचि रही है, क्योंकि इन अवधियों से संबंधित भुगतान के प्रश्न का सीधा संबंध पेंशन पुनरीक्षण और एरियर की गणना से है। हालांकि वर्तमान दस्तावेज के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि सभी पेंशनर्स के एरियर भुगतान पर एक समान रोक लगा दी गई है। वित्त विभाग का पत्र मुख्य रूप से न्यायालयों में लंबित मामलों और अवमानना याचिकाओं में न्यायालयीन आदेशों के अनुरूप कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने से संबंधित है। किसी व्यक्ति विशेष के एरियर भुगतान की स्थिति उसके प्रकरण, विभागीय रिकॉर्ड और संबंधित न्यायालय के आदेश पर निर्भर करेगी।
वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों के बाद संबंधित विभागों और जिला स्तर के अधिकारियों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे अपने-अपने स्तर पर पेंशन पुनरीक्षण एरियर से जुड़े न्यायालयीन मामलों की पहचान करें और उनकी वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त करें। जिन मामलों में स्थगन आदेश लागू हैं, उनमें आदेश की शर्तों के अनुसार कार्रवाई करनी होगी। वहीं जिन मामलों में न्यायालय से आगे की अनुमति या विधिक राहत की आवश्यकता है, वहां शासकीय अधिवक्ता के माध्यम से उचित प्रक्रिया अपनानी होगी। इससे न्यायालयीन मामलों की निगरानी और विभागीय स्तर पर समन्वय की भूमिका बढ़ जाती है।
वित्त विभाग के पत्र में मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन, वित्त विभाग विवेक कुमार पारा के डिजिटल हस्ताक्षर का उल्लेख है। पत्र क्रमांक ई-1034207/2026/नियम/चार दर्ज है। दस्तावेज में संबंधित पत्र की प्रतिलिपि राज्यपाल के प्रमुख सचिव, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय, मुख्य सचिव के स्टाफ ऑफिसर तथा मंत्रियों/राज्यमंत्रियों के निजी सचिवों को भेजे जाने का भी उल्लेख है।
वित्त विभाग के इस निर्देश से यह स्पष्ट होता है कि सरकार न्यायालयों में लंबित पेंशन पुनरीक्षण एरियर मामलों में विभागीय स्तर पर समन्वित विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करना चाहती है। 32 माह के छठवें वेतनमान और 27 माह के सातवें वेतनमान से संबंधित मामलों में आगे की प्रक्रिया न्यायालयीन आदेशों तथा संबंधित प्रकरणों की स्थिति के आधार पर आगे बढ़ेगी। पेंशनर्स के लिए महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि प्रत्येक मामले की स्थिति अलग हो सकती है और केवल इस सामान्य निर्देश के आधार पर किसी व्यक्तिगत पेंशनर के भुगतान के संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
इस प्रकार मध्यप्रदेश में पेंशन पुनरीक्षण एरियर से जुड़े पुराने न्यायालयीन मामलों को लेकर वित्त विभाग ने विभागों, संभागीय अधिकारियों और जिला स्तर के प्रशासन को स्पष्ट रूप से विधिक प्रक्रिया का पालन करने के निर्देश दिए हैं। 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक के 32 माह तथा 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक के 27 माह से संबंधित मामलों में उच्च न्यायालय के स्थगन आदेशों और उच्चतम न्यायालय में लंबित कार्यवाही को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जानी है। अब संबंधित मामलों में अगली दिशा न्यायालयीन कार्यवाही और प्रत्येक प्रकरण की व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर करेगी।
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