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भोपाल विकास योजना-2047 का ड्राफ्ट जारी, हरित भोपाल, समृद्ध भोपाल और विकसित भोपाल की परिकल्पना; नागरिक दे सकेंगे आपत्ति एवं सुझाव

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भोपाल। राजधानी भोपाल के सुनियोजित, संतुलित और दीर्घकालिक विकास की दिशा में लंबे समय से प्रतीक्षित भोपाल विकास योजना-2047 (मास्टर प्लान) के प्रारूप का प्रकाशन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्री गणेश अनंत चतुर्दशी के अवसर पर विकास योजना के ड्राफ्ट के जारी होने की जानकारी देते हुए इसे भोपाल के भविष्य की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण योजना बताया है। प्रकाशित प्रारूप की केंद्रीय अवधारणा “हरित भोपाल, समृद्ध भोपाल और विकसित भोपाल” रखी गई है। योजना में राजधानी के प्राकृतिक पर्यावरण, आर्थिक विकास, रोजगार, आधुनिक परिवहन, नागरिक सुविधाओं और सुनियोजित शहरी विस्तार को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार विकास योजना तैयार करते समय भोपाल की प्राकृतिक धरोहर भोजताल, वन क्षेत्रों और बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। साथ ही नागरिकों को बेहतर सुविधाएं, सुगम मोबिलिटी और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर उपलब्ध कराने की दृष्टि से विकास का खाका तैयार किया गया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तावित मास्टर प्लान में शहर के हरित क्षेत्र को मौजूदा लगभग 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है और लगभग 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना भी की गई है। विकास योजना का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसका प्रारूप प्रकाशित होने के बाद नागरिकों को उस पर अपनी आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इससे शहर के भविष्य से जुड़े नियोजन में स्थानीय नागरिकों, भूमि स्वामियों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों की राय को शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मास्टर प्लान केवल भूमि उपयोग का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि आने वाले वर्षों में आवास, सड़क, परिवहन, उद्योग, वाणिज्य, हरित क्षेत्र, सार्वजनिक सुविधाओं और सामाजिक अधोसंरचना के विकास की दिशा भी तय करता है। इसलिए ड्राफ्ट पर प्राप्त होने वाली आपत्तियों एवं सुझावों का महत्व विशेष रहेगा। भोपाल की भौगोलिक एवं पर्यावरणीय पहचान को देखते हुए यहां विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाना मास्टर प्लान की एक प्रमुख चुनौती भी है। भोजताल और उससे जुड़े जलग्रहण क्षेत्र, पहाड़ियों, वन क्षेत्रों, तालाबों तथा बाघ भ्रमण क्षेत्र जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षित रखते हुए शहरी विकास को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव इसी संतुलन की दिशा में रखा गया है।
प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ आर्थिक विकास और रोजगार पर जोर, चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित योजना। भोपाल विकास योजना-2047 के ड्राफ्ट को चार प्रमुख आधार स्तंभों पर केंद्रित किया गया है। पहला स्तंभ प्राकृतिक पारिस्थितिकीय तंत्र के संरक्षण को प्राथमिकता देता है। इसके तहत शहर के प्राकृतिक संसाधनों, जल निकायों, वन क्षेत्रों और संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्रों को विकास की योजना में महत्वपूर्ण स्थान देने की अवधारणा है। दूसरा स्तंभ आधुनिक दृष्टिकोण एवं नागरिक हितैषी नियोजन पर आधारित है, जिसके अंतर्गत बदलती शहरी जरूरतों के अनुरूप बेहतर आवागमन, सार्वजनिक सुविधाओं, आवास और अन्य नागरिक सेवाओं की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है। तीसरा स्तंभ सुधारोन्मुख एवं परिवर्तनकारी नियोजन को केंद्र में रखता है, जबकि चौथा स्तंभ आत्मनिर्भर एवं आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने वाले सतत विकास की अवधारणा से जुड़ा है। इस प्रकार मास्टर प्लान में पर्यावरण और आर्थिक विकास को अलग-अलग विषयों के रूप में न देखकर एक-दूसरे से जोड़ने का प्रयास किया गया है। ड्राफ्ट की प्रमुख विशेषताओं में प्राकृतिक संवेदनशीलता के अनुरूप नियोजन, आर्थिक विकास एवं रोजगार सृजन संबंधी प्रस्ताव, महानगरीय अवधारणा के अनुरूप विकास तथा ग्रोथ कॉरिडोर के माध्यम से शहर की आर्थिक गतिविधियों को गति देने की परिकल्पना शामिल है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार लगभग 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र में 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की योजना प्रस्तावित की गई है, जो EKAI City, एयरपोर्ट, प्रस्तावित CMU, लॉजिस्टिक एवं थोक व्यापार क्षेत्रों तथा विभिन्न उपनगरों को जोड़ने की परिकल्पना पर आधारित है। इससे शहर के विभिन्न हिस्सों को आर्थिक गतिविधियों के नए केंद्रों से जोड़ने और भविष्य में रोजगार तथा निवेश के अवसर विकसित करने की योजना सामने आती है। मास्टर प्लान में राज्य की टीओडी (Transit Oriented Development) नीति के अनुरूप मिश्रित भूमि उपयोग का प्रस्ताव भी रखा गया है। मिश्रित भूमि उपयोग का उद्देश्य आवास, रोजगार, व्यापार और अन्य सुविधाओं को इस प्रकार विकसित करना है कि नागरिकों की दैनिक यात्रा की दूरी कम हो और सार्वजनिक परिवहन आधारित शहरी विकास को बढ़ावा मिले। भोपाल में मेट्रो सहित आधुनिक परिवहन ढांचे के विस्तार के बीच इस तरह की योजना का महत्व बढ़ जाता है। मध्यप्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण में भी आधुनिक शहरी नियोजन, पुनर्विकास, समावेशी एवं हरित विकास तथा 15-मिनट कम्युनिटी जैसे शहरी नियोजन दृष्टिकोणों को भविष्य की दिशा के रूप में रेखांकित किया गया है। इस व्यापक परिप्रेक्ष्य में भोपाल विकास योजना-2047 का उद्देश्य राजधानी को बढ़ती आबादी और बदलती आर्थिक जरूरतों के अनुरूप व्यवस्थित रूप से विकसित करना है।
हरित क्षेत्र 16 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव, ग्रीन टीडीआर से संरक्षण और विकास के बीच संतुलन की कोशिश। भोपाल मास्टर प्लान ड्राफ्ट की सबसे प्रमुख विशेषताओं में शहर के हरित क्षेत्र का विस्तार शामिल है। प्रस्तावित योजना में हरित क्षेत्र को 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की बात सामने आई है। यह प्रावधान भोपाल की उस विशिष्ट पहचान से भी जुड़ा है जिसमें शहर के बीच और आसपास बड़ी संख्या में पहाड़ियां, वन क्षेत्र, तालाब और प्राकृतिक क्षेत्र मौजूद हैं। भोपाल को लंबे समय से झीलों और हरियाली वाले शहर के रूप में पहचान मिली है, इसलिए भविष्य के विकास में इन प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी विकास योजना में भोजताल, वन क्षेत्रों और बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही है। ड्राफ्ट में ग्रीन टीडीआर (Transferable Development Rights) का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है। इसके माध्यम से हरित क्षेत्र में आने वाली भूमि के स्वामियों को क्षतिपूर्ति का प्रावधान रखते हुए विकासकर्ताओं को टीडीआर के जरिए अतिरिक्त विकास अधिकार उपलब्ध कराने की अवधारणा रखी गई है। इसका उद्देश्य यह है कि पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील या हरित क्षेत्र की भूमि पर सीधे निर्माण का दबाव कम हो और विकास अधिकारों को अन्य उपयुक्त क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की व्यवस्था बनाई जा सके। हालांकि ऐसे प्रावधानों का वास्तविक प्रभाव उनके विस्तृत नियमों, कार्यान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर निर्भर करेगा। ड्राफ्ट में क्रिएटिव री-डेवलपमेंट के माध्यम से पुराने विकसित क्षेत्रों के पुनर्विकास का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसका उद्देश्य शहर के मौजूदा हिस्सों में उपलब्ध भूमि और बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग करते हुए अनियोजित फैलाव को नियंत्रित करना हो सकता है। इसके साथ ही अफोर्डेबल हाउसिंग को प्रोत्साहन देने और पार्किंग संबंधी प्रावधानों को मजबूत करने की बात भी योजना में शामिल है। शहर के विस्तार के साथ आवास की मांग बढ़ना स्वाभाविक है और निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के लिए किफायती आवास की उपलब्धता शहरी नियोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसी तरह पार्किंग को लेकर स्पष्ट प्रावधान यातायात दबाव और सड़क किनारे अनियोजित पार्किंग की समस्या को नियंत्रित करने में उपयोगी हो सकते हैं। इस प्रकार हरित क्षेत्र, आवास, पार्किंग और पुनर्विकास को एक साथ लेकर चलने की कोशिश मास्टर प्लान के समग्र स्वरूप में दिखाई देती है।
ग्रोथ कॉरिडोर, मिश्रित भूमि उपयोग और विकास मापदंडों के सरलीकरण से बदल सकता है राजधानी का शहरी ढांचा। भोपाल विकास योजना-2047 के ड्राफ्ट में शहर के भविष्य के विस्तार को केवल पारंपरिक कॉलोनी विकास के बजाय आर्थिक कॉरिडोर और बहु-उपयोगी क्षेत्रों से जोड़ने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तावित 51 किलोमीटर का ग्रोथ कॉरिडोर इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह कॉरिडोर राजधानी के प्रमुख आर्थिक एवं संस्थागत क्षेत्रों, एयरपोर्ट, प्रस्तावित परिवहन सुविधाओं, लॉजिस्टिक एवं थोक व्यापार क्षेत्रों तथा विभिन्न उपनगरों को जोड़ने की दिशा में विकसित किया जाना प्रस्तावित है। इस तरह के कॉरिडोर के पीछे उद्देश्य शहर के अलग-अलग हिस्सों में आर्थिक गतिविधियों को संतुलित रूप से फैलाना और नए रोजगार केंद्र विकसित करना है। योजना में महानगरीय अवधारणा के अनुरूप प्रस्तावों को शामिल किया गया है, जिससे भोपाल और आसपास के विकसित होते क्षेत्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी तथा आर्थिक संबंध स्थापित करने की दिशा में काम किया जा सके। ड्राफ्ट में असीमित एफएआर और भवन ऊंचाई जैसे प्रावधानों का भी उल्लेख है। इन प्रावधानों का अंतिम स्वरूप संबंधित विकास नियमों, जोनिंग, सुरक्षा मानकों और अन्य नियामकीय शर्तों पर निर्भर करेगा। इसके साथ विकास मापदंडों के सरलीकरण एवं युक्तियुक्तकरण की बात कही गई है, ताकि भवन और भूमि विकास से संबंधित प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनाया जा सके। टीओडी नीति के अनुरूप मिश्रित भूमि उपयोग का प्रस्ताव भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण है। यदि आवास, कार्यालय, व्यापार और सार्वजनिक सुविधाएं परिवहन केंद्रों के आसपास उचित तरीके से विकसित होती हैं तो नागरिकों को दैनिक जरूरतों के लिए लंबी दूरी की यात्रा कम करनी पड़ सकती है। इससे सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को भी बढ़ावा मिल सकता है। भोपाल में मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन परियोजनाओं का विस्तार हो रहा है तथा राज्य के शहरी नियोजन दस्तावेजों में आधुनिक, समावेशी और हरित विकास पर जोर दिया गया है। मास्टर प्लान में निजी विकासकर्ताओं द्वारा विकास योजना की मांगों के क्रियान्वयन की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निजी क्षेत्र के माध्यम से होने वाला विकास भी निर्धारित सार्वजनिक सुविधाओं, सड़क, हरित क्षेत्र, पार्किंग और अन्य नियोजन आवश्यकताओं के अनुरूप हो। इस व्यवस्था की प्रभावशीलता निगरानी, पारदर्शिता और स्पष्ट विकास मानकों पर निर्भर करेगी।
EKAI सिटी की परिकल्पना, शिक्षा, ज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की तैयारी। भोपाल विकास योजना-2047 के ड्राफ्ट में राजधानी को EKAI—Education, Knowledge and Artificial Intelligence City के रूप में विकसित करने के लिए भी प्रस्ताव एवं प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य भोपाल की पहचान को पारंपरिक प्रशासनिक राजधानी के साथ शिक्षा, ज्ञान, नवाचार और नई तकनीक से जुड़े आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में ले जाना है। शिक्षा और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के विकास के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों, कौशल विकास केंद्रों, शोध एवं नवाचार संस्थानों तथा तकनीकी उद्योगों के बीच बेहतर संपर्क की आवश्यकता होती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों को शहर की आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की योजना के माध्यम से युवाओं के लिए नई प्रकार की शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार संभावनाओं को विकसित करने का प्रयास किया जा सकता है। ग्रोथ कॉरिडोर को EKAI सिटी, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक और अन्य प्रस्तावित आर्थिक क्षेत्रों से जोड़ने की परिकल्पना इस व्यापक आर्थिक ढांचे का हिस्सा है। भोपाल में पहले से मौजूद शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों के साथ नई तकनीकी गतिविधियों को जोड़कर एक ज्ञान-आधारित शहर का मॉडल विकसित करने की संभावना बन सकती है। इसके लिए डिजिटल कनेक्टिविटी, आधुनिक कार्यालय एवं शोध सुविधाएं, कुशल मानव संसाधन, स्टार्टअप वातावरण और उद्योग-अकादमिक सहयोग महत्वपूर्ण होंगे। मास्टर प्लान में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को प्रमुख आधार स्तंभों में शामिल किया गया है, इसलिए EKAI की अवधारणा को केवल तकनीकी नामकरण के बजाय आर्थिक और शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। इसी क्रम में लॉजिस्टिक, थोक व्यापार, शिक्षा, पर्यटन, आवास और अन्य गतिविधियों के लिए अलग-अलग विकास क्षेत्रों की परिकल्पना शहर के आर्थिक आधार को विविध बनाने में मदद कर सकती है। भोपाल के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राजधानी के रूप में यहां प्रशासनिक गतिविधियों के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, सेवा क्षेत्र और व्यापार का भी बड़ा आधार है। भविष्य की योजना में इन क्षेत्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी और भूमि उपयोग का संतुलन शहर के विकास को प्रभावित करेगा। यदि EKAI सिटी की अवधारणा को प्रभावी अधोसंरचना और कुशल मानव संसाधन के साथ जोड़ा जाता है, तो भोपाल में ज्ञान एवं तकनीक आधारित गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बन सकती हैं। हालांकि इसका वास्तविक परिणाम योजना के क्रियान्वयन और संबंधित परियोजनाओं के विकास पर निर्भर करेगा।
नागरिकों की आपत्ति और सुझाव होंगे महत्वपूर्ण, 2047 के भोपाल की दिशा तय करेगा अंतिम मास्टर प्लान। भोपाल विकास योजना-2047 का ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद अब नागरिकों, विशेषज्ञों, भूमि स्वामियों, विकासकर्ताओं और अन्य हितधारकों के लिए अपनी आपत्तियां एवं सुझाव प्रस्तुत करने का अवसर महत्वपूर्ण चरण के रूप में सामने आया है। मास्टर प्लान का अंतिम स्वरूप तैयार होने से पहले प्राप्त सुझावों के आधार पर विभिन्न प्रावधानों की समीक्षा की जा सकती है। भोपाल जैसे तेजी से विकसित होते शहर में भूमि उपयोग, पर्यावरण, यातायात, आवास, रोजगार, पार्किंग, जलस्रोत और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े निर्णयों का प्रभाव लंबे समय तक रहता है। इसलिए विकास योजना में स्थानीय परिस्थितियों और नागरिक आवश्यकताओं का समुचित समावेश महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित योजना में एक ओर हरित क्षेत्र को 27 प्रतिशत तक बढ़ाने, भोजताल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने तथा ग्रीन टीडीआर जैसे प्रावधानों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर ग्रोथ कॉरिडोर, मिश्रित भूमि उपयोग, महानगरीय विकास, आर्थिक गतिविधियों, रोजगार, अफोर्डेबल हाउसिंग और EKAI सिटी जैसी योजनाओं के माध्यम से विकास को गति देने की परिकल्पना की गई है। इस संतुलन को व्यवहार में लागू करना मास्टर प्लान की सबसे महत्वपूर्ण कसौटी होगी। सुरक्षित शहर के प्रावधान, पार्किंग को प्रोत्साहन, विकास मापदंडों का सरलीकरण, निजी विकासकर्ताओं की जिम्मेदारियां और योजना के प्रभावी पर्यवेक्षण की व्यवस्था भी इसी व्यापक ढांचे का हिस्सा हैं। अंतिम योजना में यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि शहर के विकास के साथ सार्वजनिक सुविधाएं भी समान गति से विकसित हों और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार का लाभ व्यापक आबादी तक पहुंचे। प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के साथ आवास और रोजगार की जरूरतों का संतुलन, बेहतर सार्वजनिक परिवहन के साथ सड़क नेटवर्क का विकास तथा पुराने शहर के पुनर्विकास के साथ नई बस्तियों की योजना—ये सभी विषय भोपाल के भविष्य को प्रभावित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रकाशित प्रारूप को समृद्ध, सुगम, सुरक्षित और विकसित भोपाल की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है। अब नागरिकों से प्राप्त आपत्तियां और सुझाव इस प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। वर्ष 2047 को लक्ष्य बनाकर तैयार किए जा रहे इस मास्टर प्लान के माध्यम से राजधानी के अगले दो दशकों से अधिक समय के विकास की आधारभूमि तैयार करने का प्रयास किया गया है। हरित भोपाल, समृद्ध भोपाल और विकसित भोपाल की कोर थीम के साथ प्रस्तावित विकास योजना में प्राकृतिक विरासत की सुरक्षा, आधुनिक नागरिक सुविधाएं, आर्थिक विकास, रोजगार, आवास, परिवहन और नई तकनीक को एक साथ स्थान दिया गया है। ड्राफ्ट पर आने वाली जनसामान्य की प्रतिक्रियाओं और सुझावों तथा उसके बाद होने वाली समीक्षा के आधार पर अंतिम रूप में भोपाल के भविष्य का विस्तृत विकास खाका सामने आएगा।
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