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विश्व पर्यटन दिवस पर रीवा की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत पर होगी विशेष संगोष्ठी

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रीवा। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर नगर पालिक निगम रीवा के तत्वावधान में “रीवा की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत तथा पर्यटन की संभावनाएं” विषय पर विशेष संगोष्ठी का आयोजन 27 सितंबर 2026 को किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन प्रातः 10:30 बजे वेंकट भवन पुरातत्व संग्रहालय, कोठी कंपाउंड, रीवा में प्रस्तावित है। संगोष्ठी में रीवा की समृद्ध ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सांस्कृतिक परंपराओं, पुरातात्विक धरोहरों तथा पर्यटन की संभावनाओं को लेकर संवाद किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य स्थानीय विरासत को समझने, उसके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा पर्यटन के माध्यम से रीवा की पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाने के विषय पर विचार-विमर्श करना है। विश्व पर्यटन दिवस प्रत्येक वर्ष 27 सितंबर को मनाया जाता है और इसका उद्देश्य पर्यटन के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
रीवा का इतिहास और सांस्कृतिक विरासत इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। आधिकारिक जिला प्रशासन की जानकारी के अनुसार रीवा पूर्ववर्ती रीवा रियासत की महत्वपूर्ण राजधानी रहा है और बघेलखंड के इतिहास में इसकी विशेष भूमिका रही है। जिला प्रशासन के अनुसार रीवा का संबंध विंध्य क्षेत्र की भौगोलिक एवं प्राकृतिक विशेषताओं से भी है। रीवा के इतिहास से जुड़ी जानकारी में बघेल राजवंश, प्राचीन स्थापत्य, मंदिरों और क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं का उल्लेख मिलता है। रीवा संभाग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 1618 में रीवा को बघेल शासकों की राजधानी बनाया गया और 1947 तक यह बघेल शासकों की राजधानी रहा। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण यहां के भवनों, मंदिरों, कलात्मक परंपराओं और पुरातात्विक अवशेषों को क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा जाता है।
संगोष्ठी में पर्यटन विकास के साथ विरासत संरक्षण के बीच संतुलन पर भी चर्चा की संभावना है। ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि धरोहरों की मूल पहचान और संरचनात्मक स्वरूप को सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण होता है। स्थानीय इतिहास, स्थापत्य, लोक परंपराओं, कला, खान-पान और सांस्कृतिक गतिविधियों को पर्यटन से जोड़ने पर स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ सकती है। इसके साथ ही पर्यटन से जुड़े रोजगार, स्थानीय उत्पादों के बाजार, गाइड सेवाओं, परिवहन, आतिथ्य और अन्य सहायक गतिविधियों के लिए अवसर विकसित हो सकते हैं। भारत सरकार भी विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर पर्यटन को सांस्कृतिक आदान-प्रदान, रोजगार, आर्थिक गतिविधियों और स्थानीय समुदायों के विकास से जोड़कर रेखांकित करती रही है।
रीवा की पर्यटन संभावनाओं पर चर्चा का एक महत्वपूर्ण पक्ष यहां की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विविधता को एक साथ प्रस्तुत करना भी हो सकता है। विंध्य क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताओं, ऐतिहासिक स्थलों, पुरातात्विक सामग्री और स्थानीय संस्कृति को व्यवस्थित पर्यटन परिपथ से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। पर्यटकों के लिए किसी क्षेत्र की आकर्षकता केवल एक स्मारक या एक स्थल से निर्धारित नहीं होती, बल्कि उस क्षेत्र के इतिहास, प्रकृति, स्थानीय जीवन, कला और सांस्कृतिक अनुभवों का समग्र स्वरूप भी महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में रीवा में विरासत आधारित पर्यटन को विकसित करने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी का दस्तावेजीकरण, पुरातात्विक स्थलों का संरक्षण, बेहतर सूचना व्यवस्था, स्वच्छता, मार्गदर्शन, सुविधाजनक आवागमन और प्रशिक्षित पर्यटन सेवाओं जैसे विषयों पर भी विचार की आवश्यकता होगी।
विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली यह संगोष्ठी स्थानीय इतिहास और विरासत को लेकर विद्यार्थियों, शोधार्थियों, इतिहास एवं पुरातत्व से जुड़े लोगों, सामाजिक संगठनों, पर्यटन क्षेत्र के प्रतिनिधियों तथा आम नागरिकों के बीच संवाद का अवसर भी प्रदान कर सकती है। किसी भी शहर की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने में स्थानीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जब नागरिक अपनी विरासत से परिचित होते हैं तो उसके संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होती है। वहीं नई पीढ़ी को स्थानीय इतिहास और पुरातात्विक धरोहर से जोड़ने के लिए संग्रहालय, व्याख्यान, विरासत भ्रमण, प्रदर्शनी और शैक्षणिक गतिविधियां उपयोगी माध्यम बन सकती हैं। वेंकट भवन पुरातत्व संग्रहालय जैसे स्थल पर आयोजित संगोष्ठी इस दृष्टि से विषय के अनुरूप मंच उपलब्ध कराती है, जहां इतिहास और पुरातत्व से जुड़े विषयों पर संवाद को आगे बढ़ाया जा सकता है।
विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर नगर पालिक निगम रीवा द्वारा आयोजित यह विशेष संगोष्ठी रीवा की विरासत और पर्यटन की संभावनाओं पर केंद्रित रहेगी। 27 सितंबर 2026, रविवार को प्रातः 10:30 बजे वेंकट भवन पुरातत्व संग्रहालय, कोठी कंपाउंड, रीवा में होने वाले आयोजन में शहर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक पहचान को पर्यटन विकास से जोड़ने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा का अवसर मिलेगा। आयोजन के माध्यम से रीवा की विरासत को समझने, उसके संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करने और पर्यटन की संभावनाओं पर सामूहिक विचार-विमर्श का प्रयास किया जाएगा। विश्व पर्यटन दिवस की भावना के अनुरूप स्थानीय विरासत, संस्कृति और पर्यटन के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में इस प्रकार के संवाद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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