
भेल दशहरा मैदान में आयोजित प्रदर्शनी में भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जानकारी; तकनीक आधारित न्याय व्यवस्था और नागरिक-केंद्रित प्रावधानों को दर्शाया गया
भोपाल। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह एवं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल के भेल दशहरा मैदान में नए आपराधिक कानूनों पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और उसका अवलोकन किया। प्रदर्शनी में देश में लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों के प्रमुख प्रावधानों, उनकी कार्यप्रणाली, तकनीक के उपयोग तथा आपराधिक न्याय प्रणाली में किए गए बदलावों को सरल एवं दृश्य माध्यम से प्रस्तुत किया गया। आयोजन का उद्देश्य आम नागरिकों, विद्यार्थियों, कानून से जुड़े लोगों, पुलिसकर्मियों और अन्य वर्गों को नए कानूनों के प्रावधानों तथा उनके व्यावहारिक स्वरूप से परिचित कराना रहा।
भारत सरकार द्वारा लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों में भारतीय न्याय संहिता, 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 शामिल हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार इन तीनों कानूनों ने क्रमशः भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान लिया है तथा इन्हें 1 जुलाई 2024 से लागू किया गया।
भेल दशहरा मैदान में आयोजित प्रदर्शनी में इन कानूनों से संबंधित जानकारी को विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया गया कि आपराधिक मामलों की जांच, साक्ष्य संकलन, सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक का उपयोग किस प्रकार बढ़ाया गया है। डिजिटल साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से कार्रवाई, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, फॉरेंसिक जांच तथा इलेक्ट्रॉनिक संचार जैसे विषयों को भी नए कानूनी ढांचे से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।
नए आपराधिक कानूनों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने की पहल
नए कानूनों को लेकर देशभर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में भोपाल में आयोजित प्रदर्शनी को भी नागरिकों को कानूनों की जानकारी सरल तरीके से उपलब्ध कराने की पहल के रूप में देखा जा सकता है। सामान्य नागरिक के लिए कानूनी प्रावधान अक्सर जटिल भाषा और तकनीकी शब्दावली से जुड़े होते हैं। प्रदर्शनी जैसे माध्यम इन प्रावधानों को उदाहरणों, दृश्य प्रस्तुतियों और सरल जानकारी के माध्यम से समझने का अवसर उपलब्ध कराते हैं।
प्रदर्शनी में यह बताने का प्रयास किया गया कि नए आपराधिक कानून केवल कानूनी धाराओं में परिवर्तन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आपराधिक न्याय प्रणाली की प्रक्रिया में तकनीक और आधुनिक जांच पद्धतियों की भूमिका को भी बढ़ाते हैं। गृह मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार नए कानूनों में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों और डिजिटल तकनीक के उपयोग से संबंधित विभिन्न प्रावधान शामिल हैं।
तीन नए कानूनों पर केंद्रित प्रदर्शनी
प्रदर्शनी का मुख्य आधार तीन नए कानून रहे। भारतीय न्याय संहिता, 2023 आपराधिक अपराधों और उनके लिए निर्धारित दंड से संबंधित मुख्य कानून है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 आपराधिक मामलों में जांच, गिरफ्तारी, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों का ढांचा प्रस्तुत करती है। वहीं भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों से संबंधित कानूनी व्यवस्था को निर्धारित करता है। गृह मंत्रालय ने इन तीनों कानूनों के आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं।
इन कानूनों के लागू होने के बाद पुलिस, अभियोजन, न्यायपालिका और जांच एजेंसियों के लिए नई कानूनी व्यवस्था के अनुरूप प्रक्रियाओं को अपनाना आवश्यक हुआ है। इसके लिए केंद्र और राज्य स्तर पर प्रशिक्षण, तकनीकी ढांचे तथा विभिन्न डिजिटल प्रणालियों को विकसित और मजबूत किया जा रहा है।
भोपाल में आयोजित प्रदर्शनी में इसी व्यापक परिवर्तन को नागरिकों के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। प्रदर्शनी में कानून के प्रावधानों के साथ-साथ उनसे जुड़े तकनीकी पहलुओं को भी समझाने पर जोर रहा।
तकनीक आधारित जांच और न्याय व्यवस्था
नए आपराधिक कानूनों की चर्चा में तकनीक का उपयोग महत्वपूर्ण विषय के रूप में सामने आता है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग तथा गवाहों की जांच के लिए ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के उपयोग के प्रावधान हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार बीएनएसएस की धारा 530 इलेक्ट्रॉनिक संचार अथवा ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के जरिए विचारण, पूछताछ और कार्यवाही को इलेक्ट्रॉनिक मोड में आयोजित करने का प्रावधान करती है।
इस व्यवस्था से न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक के उपयोग को कानूनी आधार मिलता है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अभियुक्तों, गवाहों, पुलिस अधिकारियों, अभियोजकों और विशेषज्ञों की आभासी उपस्थिति संभव हो सकती है। गृह मंत्रालय के अनुसार ‘न्याय श्रुति’ एप्लिकेशन के माध्यम से ऐसी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं को सहयोग दिया जा रहा है।
प्रदर्शनी में तकनीक और कानून के इस संबंध को भी समझाने का प्रयास किया गया। इससे नागरिकों को यह जानकारी मिलती है कि आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली में डिजिटल माध्यमों की भूमिका किस तरह बढ़ रही है।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का बढ़ता महत्व
आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन, कंप्यूटर, सीसीटीवी, डिजिटल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक संचार और अन्य डिजिटल माध्यम जांच का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को कानूनी रूप से व्यवस्थित करना महत्वपूर्ण हो गया है।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 इसी व्यापक कानूनी ढांचे का हिस्सा है। नए कानूनों के माध्यम से आधुनिक तकनीक से उत्पन्न साक्ष्यों को न्यायिक प्रक्रिया के संदर्भ में व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया है। प्रदर्शनी में इस प्रकार के प्रावधानों को सरल माध्यम से समझाने की पहल की गई।
डिजिटल साक्ष्य की विश्वसनीयता, उसके संग्रहण, संरक्षण और न्यायिक प्रक्रिया में उपयोग से जुड़े विषयों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए भी डिजिटल जांच क्षमता को मजबूत करना आवश्यक है।
ई-साक्ष्य और डिजिटल जांच
नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन के साथ डिजिटल जांच के लिए विभिन्न तकनीकी साधनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। गृह मंत्रालय ने नए कानूनों के संदर्भ में ई-साक्ष्य, न्याय सेतु, न्याय श्रुति और ई-समन जैसे डिजिटल माध्यमों को भी सामने रखा है। 2024 में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने चंडीगढ़ में इन डिजिटल साधनों से संबंधित पहल का लोकार्पण किया था।
इन तकनीकी व्यवस्थाओं का उद्देश्य जांच और न्यायिक प्रक्रिया में डिजिटल रिकॉर्ड के उपयोग को अधिक व्यवस्थित बनाना है। ई-समन जैसी व्यवस्थाएं न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और सूचनाओं के इलेक्ट्रॉनिक संचार में सहायता करती हैं, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबंधित तकनीक दूरस्थ उपस्थिति को संभव बनाती है।
भोपाल की प्रदर्शनी में इन तकनीकी बदलावों को आम नागरिकों तक पहुंचाने की दिशा में जानकारी प्रदर्शित की गई।
फॉरेंसिक जांच को महत्व
नए आपराधिक कानूनों के संदर्भ में फॉरेंसिक विज्ञान का महत्व भी बढ़ा है। आधुनिक अपराधों की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। घटनास्थल से प्राप्त सामग्री, डिजिटल उपकरण, जैविक नमूने और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है।
गृह मंत्रालय के दस्तावेजों में नए कानूनों के क्रियान्वयन के संदर्भ में फॉरेंसिक क्षमता को मजबूत करने और जांच प्रक्रिया में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जानकारी उपलब्ध है।
प्रदर्शनी में ऐसे विषयों को भी नागरिकों के सामने रखने का उद्देश्य यही है कि आम लोग समझ सकें कि आधुनिक आपराधिक जांच केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर नहीं है, बल्कि तकनीक और विज्ञान भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
मध्यप्रदेश में नए कानूनों के क्रियान्वयन की समीक्षा
मध्यप्रदेश में नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर समीक्षा भी हो चुकी है। 17 जनवरी 2025 को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में मध्यप्रदेश में तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन को लेकर समीक्षा बैठक हुई थी। उस बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित केंद्र और राज्य के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में पुलिस, जेल, न्यायालय, अभियोजन और फॉरेंसिक से संबंधित नए प्रावधानों के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की गई थी।
इससे स्पष्ट होता है कि नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केवल कानून लागू करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पुलिस, अभियोजन, न्यायालय और फॉरेंसिक तंत्र को नई व्यवस्था के अनुरूप तैयार करना भी आवश्यक है।
भोपाल में आयोजित प्रदर्शनी इसी व्यापक जागरूकता और क्रियान्वयन प्रक्रिया का सार्वजनिक पक्ष सामने रखने वाला आयोजन रहा।
नागरिकों के लिए कानूनों को समझना जरूरी
किसी भी आपराधिक कानून का प्रभाव सीधे नागरिकों के अधिकारों, कर्तव्यों और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा होता है। इसलिए कानूनों के बारे में सामान्य नागरिकों को भी बुनियादी जानकारी होना आवश्यक है।
प्रदर्शनी के माध्यम से नागरिकों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि नए कानूनों में आपराधिक मामलों से संबंधित प्रक्रियाओं में किस तरह बदलाव किए गए हैं। विशेष रूप से डिजिटल माध्यमों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और तकनीक आधारित प्रक्रियाओं को समझना वर्तमान समय में महत्वपूर्ण है।
कानूनी जागरूकता से नागरिकों को अपनी भूमिका समझने में मदद मिल सकती है। साथ ही पुलिस, न्याय व्यवस्था और अन्य संबंधित संस्थाओं के कार्यों को लेकर भी लोगों में बेहतर समझ विकसित हो सकती है।
महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों पर विशेष प्रावधान
नए आपराधिक कानूनों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से जुड़े प्रावधानों को भी प्रमुखता दी गई है। गृह मंत्रालय द्वारा संसद में उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार भारतीय न्याय संहिता में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों को अलग अध्याय में समेकित किया गया है तथा इन अपराधों को प्राथमिकता के साथ संबोधित किया गया है।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों की जानकारी समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना महत्वपूर्ण है। ऐसे विषयों को प्रदर्शनी जैसे सार्वजनिक माध्यमों से समझाने से नागरिकों में कानूनी जागरूकता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत और सूचना
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में संज्ञेय अपराध से संबंधित सूचना इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को दिए जाने का प्रावधान भी शामिल है। गृह मंत्रालय ने संसद में दिए उत्तर में बीएनएसएस की धारा 173 के इस प्रावधान का उल्लेख किया है।
डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के दौर में यह प्रावधान आपराधिक न्याय प्रक्रिया को तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि किसी भी मामले में लागू प्रक्रिया और कानूनी आवश्यकताओं को समझने के लिए संबंधित कानून तथा सक्षम प्राधिकारी की जानकारी महत्वपूर्ण रहती है।
पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए नई व्यवस्था
नए कानूनों के लागू होने के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने नई कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाओं को अपनाने की जिम्मेदारी भी आई है। जांच अधिकारियों को नए प्रावधानों, डिजिटल साक्ष्यों, फॉरेंसिक प्रक्रियाओं और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से जुड़े नियमों की जानकारी होना आवश्यक है।
इसी कारण केंद्र और राज्य स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों और डिजिटल प्रणालियों को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। गृह मंत्रालय ने नए आपराधिक कानूनों पर प्रशिक्षण और ई-कोर्स की जानकारी भी उपलब्ध कराई है।
भोपाल में प्रदर्शनी के माध्यम से आम लोगों के साथ-साथ कानून और पुलिस व्यवस्था से जुड़े लोगों के लिए भी नए कानूनों को समझने का अवसर उपलब्ध कराया गया।
न्याय प्रक्रिया में समय और पारदर्शिता का विषय
नए आपराधिक कानूनों पर चर्चा के दौरान समयबद्ध न्याय और तकनीक के माध्यम से प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के विषय पर भी जोर दिया जाता रहा है। गृह मंत्रालय की ओर से नए कानूनों को न्याय-केंद्रित व्यवस्था से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है।
न्याय प्रक्रिया में देरी एक जटिल विषय है, जिसमें पुलिस जांच, अभियोजन, न्यायालय, साक्ष्य और अन्य कई स्तर शामिल होते हैं। नए कानूनों में तकनीकी माध्यमों और प्रक्रिया संबंधी बदलावों का उद्देश्य इन व्यवस्थाओं को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की दिशा में काम करना है।
प्रदर्शनी में इसी व्यापक बदलाव को नागरिकों के सामने रखने का प्रयास किया गया।
नई न्याय व्यवस्था की जानकारी युवाओं तक पहुंचाने पर जोर
कानून से जुड़े विषयों को युवाओं तक पहुंचाना भी आवश्यक है। विद्यार्थी और युवा भविष्य में कानून, प्रशासन, पुलिस, न्याय और सामाजिक क्षेत्र में विभिन्न भूमिकाएं निभा सकते हैं। उन्हें नए कानूनी ढांचे की जानकारी मिलने से नागरिक जागरूकता भी बढ़ सकती है।
प्रदर्शनी में नए कानूनों के प्रावधानों को दृश्य और सरल माध्यमों से प्रस्तुत किए जाने से विद्यार्थियों के लिए उन्हें समझना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। कानून की जानकारी केवल विधि के विद्यार्थियों तक सीमित न रहकर सामान्य विद्यार्थियों और नागरिकों तक भी पहुंचना जरूरी है।
डिजिटल युग के अनुरूप कानून
आज अपराधों का स्वरूप भी बदल रहा है। साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी, डिजिटल पहचान और इलेक्ट्रॉनिक संचार से जुड़े अपराधों के कारण जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां हैं। गृह मंत्रालय ने भी नए आपराधिक कानूनों के संदर्भ में साइबर अपराधों से निपटने के लिए कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किया है।
ऐसे वातावरण में कानूनों का तकनीकी रूप से सक्षम होना महत्वपूर्ण है। जांच में डिजिटल साक्ष्य का उपयोग, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का संरक्षण और वीडियो आधारित कार्यवाही जैसी व्यवस्थाएं आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली का हिस्सा बन रही हैं।
प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं
भेल दशहरा मैदान में आयोजित प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल कानूनों की धाराओं को प्रदर्शित करना नहीं था। इसका व्यापक उद्देश्य नागरिकों को यह समझाना भी था कि आपराधिक न्याय प्रणाली में किस प्रकार के बदलाव किए गए हैं और तकनीक किस तरह जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन रही है।
आम नागरिकों के लिए कानून की जानकारी अक्सर पुस्तकों या कानूनी दस्तावेजों तक सीमित रहती है। प्रदर्शनी जैसे माध्यम उन्हें कानून को सरल और दृश्य रूप में समझने का अवसर देते हैं।
गृह मंत्री और मुख्यमंत्री ने किया अवलोकन
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद उसका अवलोकन किया। इस दौरान नए आपराधिक कानूनों से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम में नए कानूनों के प्रावधानों, डिजिटल तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, फॉरेंसिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े विषयों को प्रमुखता से रखा गया। प्रदर्शनी का स्वरूप ऐसा रखा गया कि कानून के तकनीकी पक्ष को भी सामान्य नागरिकों के लिए समझने योग्य बनाया जा सके।
मध्यप्रदेश में जागरूकता अभियान को मिल सकती है गति
नए आपराधिक कानूनों को लेकर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन केवल कानूनी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। पुलिस, प्रशासन, विधि विशेषज्ञ, विद्यार्थी और आम नागरिक सभी के लिए नए कानूनों की जानकारी उपयोगी है।
मध्यप्रदेश में कानूनों के क्रियान्वयन को लेकर पहले ही केंद्र और राज्य स्तर पर समीक्षा हो चुकी है। ऐसे में प्रदर्शनी और जनजागरूकता कार्यक्रमों से कानूनों के बारे में जानकारी को और व्यापक स्तर तक पहुंचाने में सहायता मिल सकती है।
तकनीक और न्याय का बढ़ता संबंध
नए आपराधिक कानूनों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक तकनीक का बढ़ता उपयोग है। इलेक्ट्रॉनिक संचार, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, डिजिटल साक्ष्य और फॉरेंसिक जांच जैसे विषय अब आपराधिक न्याय प्रणाली के महत्वपूर्ण हिस्से बन रहे हैं।
न्याय प्रक्रिया को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने से दस्तावेजों और साक्ष्यों के डिजिटल प्रबंधन, दूरस्थ उपस्थिति और इलेक्ट्रॉनिक संचार जैसी व्यवस्थाओं को कानूनी आधार मिलता है। इससे न्यायिक संस्थाओं के सामने नई संभावनाओं के साथ नई जिम्मेदारियां भी आती हैं।
कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता
किसी भी कानून की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। नए आपराधिक कानूनों के मामले में पुलिस, अभियोजन, न्यायपालिका, फॉरेंसिक संस्थाओं और अन्य संबंधित विभागों को एक-दूसरे के साथ समन्वय से कार्य करना होगा।
प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधन, डिजिटल बुनियादी ढांचा और नागरिक जागरूकता इस प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा समीक्षा तथा प्रशिक्षण से संबंधित गतिविधियां इसी दिशा में की जा रही हैं।
नागरिक-केंद्रित कानूनी व्यवस्था की दिशा
नए कानूनों की चर्चा में नागरिकों की सुविधा और न्याय प्रक्रिया को आधुनिक बनाने का विषय भी प्रमुख रहा है। गृह मंत्रालय की ओर से इन्हें न्याय-केंद्रित और आधुनिक आपराधिक न्याय व्यवस्था के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।
भोपाल में आयोजित प्रदर्शनी के माध्यम से इस व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को आम नागरिकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। कानूनों की जानकारी के साथ-साथ तकनीकी बदलावों को समझाना भी इसका हिस्सा रहा।
आगे भी जागरूकता की जरूरत
नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद उनके प्रावधानों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने की आवश्यकता बनी हुई है। कानून की जानकारी केवल पुलिस और न्याय व्यवस्था तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। नागरिकों, विद्यार्थियों, वकीलों, सामाजिक संस्थाओं और अन्य संबंधित वर्गों को भी नए प्रावधानों की जानकारी होना जरूरी है।
ऐसी प्रदर्शनी नागरिकों और कानून व्यवस्था के बीच जानकारी का सेतु बनाने में भूमिका निभा सकती है। विशेषकर युवा वर्ग के बीच कानूनी जागरूकता बढ़ाने से भविष्य में कानून के प्रति समझ और जिम्मेदारी को मजबूत किया जा सकता है।
समापन
भोपाल के भेल दशहरा मैदान में 3 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा नए आपराधिक कानूनों पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं अवलोकन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से तीन नए आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम—से जुड़े प्रमुख प्रावधानों और आधुनिक न्याय व्यवस्था में तकनीक की भूमिका को सामने रखा गया। इन तीनों कानूनों को 1 जुलाई 2024 से लागू किया गया था।
प्रदर्शनी में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, डिजिटल संचार, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, फॉरेंसिक जांच और तकनीक आधारित जांच प्रक्रिया जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों और ऑडियो-वीडियो तकनीक के उपयोग से संबंधित प्रावधान हैं तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए ‘न्याय श्रुति’ जैसे डिजिटल माध्यम विकसित किए गए हैं।
मध्यप्रदेश में नए कानूनों के क्रियान्वयन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पहले भी समीक्षा कर चुके हैं। जनवरी 2025 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिस, जेल, न्यायालय, अभियोजन और फॉरेंसिक से जुड़े नए प्रावधानों के क्रियान्वयन की स्थिति पर चर्चा की थी।
इस प्रदर्शनी का महत्व इस दृष्टि से भी है कि नए आपराधिक कानूनों को केवल कानूनी दस्तावेज के रूप में नहीं, बल्कि बदलते डिजिटल और तकनीकी परिवेश के अनुरूप विकसित आपराधिक न्याय व्यवस्था के रूप में नागरिकों के सामने प्रस्तुत किया गया। आम लोगों को कानून की जानकारी सरल तरीके से उपलब्ध कराने, युवाओं और विद्यार्थियों को जागरूक करने तथा पुलिस और न्याय व्यवस्था में तकनीकी बदलावों की जानकारी देने की दिशा में ऐसे आयोजन उपयोगी हो सकते हैं।
नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कानून की जानकारी के साथ-साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन, तकनीकी आधारभूत संरचना, वैज्ञानिक जांच क्षमता और विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। भोपाल में आयोजित प्रदर्शनी इसी व्यापक प्रक्रिया में जनजागरूकता का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी, जहां नागरिकों को देश की नई आपराधिक न्याय व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिला।









