
पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक में तकनीकी शिक्षा, कैरियर मार्गदर्शन, स्वास्थ्य, साहित्य और पूर्व विद्यार्थियों से संवाद पर दिए निर्देश
मंडला। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय मंडला में विद्यालय प्रबंधन समिति की महत्वपूर्ण बैठक कलेक्टर एवं विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री राहुल नामदेव धोटे की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, तकनीकी शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित अध्ययन, कैरियर मार्गदर्शन, पुस्तकालय के विस्तार, स्वास्थ्य परीक्षण तथा सह-शैक्षणिक गतिविधियों सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर श्री धोटे ने कहा कि वर्तमान समय तेजी से बदलती तकनीक और नए अवसरों का समय है। ऐसे में विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि वे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें।
बैठक से पहले विद्यालय परिसर में निर्मित नए मंच का उद्घाटन भी किया गया। विशेष बात यह रही कि कलेक्टर श्री धोटे ने मंच का उद्घाटन स्वयं करने के बजाय विद्यार्थियों के हाथों करवाया। विद्यार्थियों को यह अवसर देकर उन्होंने उनमें सहभागिता, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने का संदेश दिया। विद्यार्थियों के माध्यम से सार्वजनिक रूप से किसी सुविधा का उद्घाटन कराया जाना उनके भीतर जिम्मेदारी और आत्मविश्वास की भावना विकसित करने का एक अवसर बना। इस दौरान विद्यालय परिसर में उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भी इस पहल को उत्साह के साथ देखा। कलेक्टर ने इस अवसर पर विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी को महत्व देते हुए शिक्षा के साथ-साथ व्यवहारिक अनुभव और नेतृत्व क्षमता के विकास पर जोर दिया।
बैठक के प्रारंभ में केंद्रीय विद्यालय प्रबंधन की ओर से विद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों, उपलब्ध सुविधाओं और अब तक किए गए विभिन्न कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की गई। विद्यालय प्रबंधन द्वारा बताया गया कि पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय मंडला में वर्तमान में कुल 598 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालय में विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा के साथ विभिन्न सह-शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। बैठक में विद्यालय की वर्तमान व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को और बेहतर बनाने तथा शिक्षा को भविष्य की आवश्यकताओं से जोड़ने पर विशेष चर्चा हुई।
कक्षा छठवीं से एआई शिक्षा पर विशेष जोर
बैठक में बताया गया कि विद्यालय में कक्षा छठवीं से विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित शिक्षा प्रदान की जा रही है। कलेक्टर श्री धोटे ने इसे वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए एआई आधारित अध्ययन पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीक का प्रभाव शिक्षा, रोजगार, उद्योग, प्रशासन, चिकित्सा, संचार और लगभग प्रत्येक क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को तकनीकी बदलावों की समझ प्रारंभिक स्तर से देना उनके भविष्य के लिए उपयोगी होगा।
कलेक्टर ने कहा कि विद्यार्थियों को एआई की केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें इसकी व्यावहारिक और उपयोगी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए विद्यालय में विशेषज्ञ फैकल्टी की व्यवस्था करने अथवा वर्तमान शिक्षकों को आवश्यक प्रशिक्षण दिलाने की दिशा में कार्य किया जाए। उनका जोर इस बात पर रहा कि विद्यार्थी तकनीक का उपयोग समझदारी और जिम्मेदारी के साथ करना सीखें तथा बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी क्षमताओं को विकसित करें।
आज शिक्षा का स्वरूप केवल किताबों और कक्षा-कक्ष तक सीमित नहीं रह गया है। डिजिटल संसाधन, ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, तकनीकी उपकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकें विद्यार्थियों के सीखने के तरीकों को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे वातावरण में विद्यालयों के सामने यह चुनौती भी है कि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से परिचित कराने के साथ उन्हें उसके जिम्मेदार उपयोग की समझ भी दी जाए। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय मंडला में एआई आधारित शिक्षा को मजबूत करने के निर्देश इसी दिशा में महत्वपूर्ण माने जा सकते हैं।

तकनीक के साथ मानवीय और रचनात्मक विकास भी जरूरी
कलेक्टर श्री धोटे ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर देते हुए यह स्पष्ट किया कि तकनीकी शिक्षा के साथ साहित्य, रचनात्मकता, स्वास्थ्य, अभिव्यक्ति और सामाजिक अनुभव भी विद्यार्थियों की शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। केवल तकनीकी दक्षता किसी विद्यार्थी के संपूर्ण विकास के लिए पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थी में तार्किक सोच के साथ संवेदनशीलता, रचनात्मकता, संवाद क्षमता, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक समझ भी विकसित होनी चाहिए।
इसी दृष्टि से बैठक में साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने कहा कि विद्यार्थियों को साहित्य से जोड़ा जाए और उनमें पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए नियमित गतिविधियां आयोजित की जाएं। विद्यालय में कहानी लेखन, कविता पाठ, वाचन, भाषण, निबंध, पुस्तक चर्चा और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है।
साहित्य विद्यार्थियों को केवल भाषा का ज्ञान नहीं देता, बल्कि उन्हें विभिन्न विचारों, अनुभवों और सामाजिक परिस्थितियों को समझने का अवसर भी देता है। नियमित पठन-पाठन से शब्द भंडार बढ़ने के साथ विचारों को व्यवस्थित ढंग से व्यक्त करने की क्षमता विकसित होती है। कलेक्टर के निर्देशों में इसी व्यापक शैक्षणिक दृष्टिकोण को महत्व दिया गया कि विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ साहित्य और रचनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा जाए।
लाइब्रेरी को समृद्ध बनाने के निर्देश
विद्यालय की लाइब्रेरी को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए भी कलेक्टर श्री धोटे ने निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय में विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम की पुस्तकों के अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं, विभिन्न कैरियर विकल्पों, उच्च शिक्षा और भविष्य के अवसरों से संबंधित उपयोगी पुस्तकें उपलब्ध रहनी चाहिए। विद्यार्थियों को कम उम्र से ही विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं की जानकारी मिलने पर वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार भविष्य की दिशा तय करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकते हैं।
कैरियर संबंधी जानकारी केवल परीक्षा के समय देने के बजाय विद्यार्थियों को समय-समय पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। कलेक्टर ने कहा कि विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता और अभिरुचि को ध्यान में रखते हुए कैरियर काउंसलिंग और मार्गदर्शन की गतिविधियां आयोजित की जाएं। अलग-अलग क्षेत्रों में शिक्षा और रोजगार की संभावनाओं की जानकारी मिलने से विद्यार्थी अपने लिए उपयुक्त विकल्पों को समझ सकेंगे।
विद्यालय स्तर पर कैरियर मार्गदर्शन का उद्देश्य विद्यार्थियों पर किसी विशेष क्षेत्र का दबाव बनाना नहीं, बल्कि उन्हें विभिन्न विकल्पों की जानकारी उपलब्ध कराना है। इससे विद्यार्थी अपनी रुचि, क्षमता और परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने के लिए आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, उच्च शिक्षा, तकनीकी क्षेत्र, शोध, प्रशासन, रक्षा, चिकित्सा, कानून, मीडिया, प्रबंधन और अन्य क्षेत्रों से संबंधित पुस्तकें और मार्गदर्शन सामग्री इस दिशा में उपयोगी हो सकती हैं।
स्वास्थ्य परीक्षण को नियमित बनाने पर जोर
बैठक में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया। कलेक्टर श्री धोटे ने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए और उनकी स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं पर लगातार ध्यान दिया जाए। स्वस्थ शरीर विद्यार्थियों की पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए आवश्यक है।
नियमित स्वास्थ्य परीक्षण से विद्यार्थियों में किसी संभावित स्वास्थ्य समस्या की पहचान समय रहते की जा सकती है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को पोषण, स्वच्छता, व्यक्तिगत स्वास्थ्य, शारीरिक सक्रियता और स्वस्थ जीवनशैली से संबंधित जानकारी भी दी जा सकती है। विद्यालय में स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाने से विद्यार्थी अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग हो सकते हैं।
कलेक्टर के निर्देशों में यह बात भी सामने आई कि विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास को केवल परीक्षा परिणामों के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। उसका स्वास्थ्य, मानसिक एवं सामाजिक विकास, रचनात्मक क्षमता, व्यवहार, संवाद कौशल और आत्मविश्वास भी शिक्षा की गुणवत्ता के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
पूर्व विद्यार्थियों से संवाद को बनाया जाए नियमित
बैठक में विद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों से संवाद स्थापित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर श्री धोटे ने निर्देश दिए कि विद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों को समय-समय पर आमंत्रित कर वर्तमान विद्यार्थियों के साथ संवाद कराया जाए। पूर्व विद्यार्थी अपने अध्ययन, उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, कैरियर और कार्यक्षेत्र से जुड़े अनुभव वर्तमान विद्यार्थियों के साथ साझा कर सकते हैं।
पूर्व विद्यार्थियों के अनुभव वर्तमान विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन का माध्यम बन सकते हैं। पाठ्यपुस्तकों में उपलब्ध जानकारी के अलावा जब विद्यार्थी किसी ऐसे व्यक्ति से अपने भविष्य के बारे में सुनते हैं, जिसने उसी विद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर आगे का सफर तय किया हो, तो उन्हें विभिन्न संभावनाओं को समझने में सहायता मिल सकती है।
ऐसे संवाद कार्यक्रमों में पूर्व विद्यार्थी अपने सामने आई चुनौतियों, तैयारी के तरीकों, समय प्रबंधन, उच्च शिक्षा के विकल्पों और कार्यक्षेत्र के अनुभवों के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दे सकते हैं। इससे वर्तमान विद्यार्थियों को अपने भविष्य की योजना बनाने के लिए वास्तविक अनुभवों से सीखने का अवसर मिल सकता है।
विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास
विद्यालय परिसर में नए मंच का उद्घाटन विद्यार्थियों के हाथों कराया जाना भी बैठक से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल रहा। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल दर्शक की भूमिका में रखने के बजाय उन्हें संस्थान की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का अवसर देना रहा। इस प्रकार के अवसर विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ सार्वजनिक रूप से अपनी भूमिका निभाने की क्षमता विकसित करने में सहायक हो सकते हैं।
विद्यालयी शिक्षा में विद्यार्थियों को जिम्मेदारी देने का महत्व लगातार बढ़ रहा है। यदि विद्यार्थियों को विभिन्न गतिविधियों में नेतृत्व करने, कार्यक्रमों का संचालन करने, अपनी बात रखने और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिलता है, तो उनके भीतर नेतृत्व और संवाद कौशल विकसित हो सकता है। इसी सोच के अनुरूप मंच का उद्घाटन विद्यार्थियों के माध्यम से कराया गया।
सह-शैक्षणिक गतिविधियों को भी मिले बढ़ावा
बैठक में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ सह-शैक्षणिक गतिविधियों को प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल, साहित्य, कला, सांस्कृतिक गतिविधियां, वाद-विवाद, भाषण, विज्ञान एवं तकनीकी गतिविधियां तथा अन्य रचनात्मक कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सह-शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रुचि और प्रतिभा पहचानने का अवसर मिलता है। कोई विद्यार्थी पढ़ाई के साथ साहित्य में रुचि रख सकता है, कोई खेल में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है, तो किसी विद्यार्थी की रुचि विज्ञान, तकनीक, कला या सार्वजनिक अभिव्यक्ति में हो सकती है। विद्यालय की जिम्मेदारी यह है कि विद्यार्थियों को अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा विकसित करने के अवसर मिलें।
कलेक्टर श्री धोटे ने विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ इन गतिविधियों को भी अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में निर्देश दिए। इससे विद्यालय में ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने का उद्देश्य सामने आया जिसमें विद्यार्थियों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के जीवन के लिए तैयार किया जाए।
एआई के साथ डिजिटल जिम्मेदारी की समझ भी जरूरी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शिक्षा में शामिल करने के साथ विद्यार्थियों को डिजिटल जिम्मेदारी और तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग की समझ देना भी महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को यह जानकारी होनी चाहिए कि तकनीकी संसाधनों का उपयोग सीखने, जानकारी प्राप्त करने और रचनात्मक कार्यों के लिए किस प्रकार किया जा सकता है।
एआई आधारित शिक्षा का उद्देश्य केवल नई तकनीक का परिचय कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में समस्या समाधान, तार्किक सोच और नए तरीके से सीखने की क्षमता विकसित करना भी हो सकता है। इसके लिए शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। प्रशिक्षित शिक्षक विद्यार्थियों को तकनीक के उपयोग के अवसरों और उसकी सीमाओं दोनों से परिचित करा सकते हैं।
कलेक्टर द्वारा विशेषज्ञ फैकल्टी की व्यवस्था अथवा वर्तमान शिक्षकों को आवश्यक प्रशिक्षण दिलाने पर जोर दिया जाना इसी आवश्यकता से जुड़ा है। शिक्षक यदि नई तकनीक से परिचित होंगे तो वे विद्यार्थियों को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक तरीके से मार्गदर्शन दे सकेंगे।
शिक्षा व्यवस्था में भविष्य की तैयारी पर जोर
पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय मंडला की विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक में लिए गए दिशा-निर्देशों का व्यापक उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना रहा। तकनीकी शिक्षा, एआई, कैरियर काउंसलिंग, पुस्तकालय, साहित्यिक गतिविधियां, स्वास्थ्य परीक्षण और पूर्व विद्यार्थियों से संवाद जैसे विषयों को एक साथ लेकर चलने से शिक्षा को बहुआयामी बनाने की दिशा सामने आती है।

आज के विद्यार्थी आने वाले समय में ऐसे कार्यक्षेत्रों में प्रवेश करेंगे जहां तकनीकी ज्ञान और मानवीय कौशल दोनों की आवश्यकता होगी। इसलिए विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को तकनीक के साथ संवाद, नेतृत्व, रचनात्मकता, अनुशासन, स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना उपयोगी होगा।
विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ आयोजित हुई, जिसमें उपलब्ध व्यवस्थाओं की समीक्षा के साथ आगे की आवश्यकताओं पर चर्चा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन को विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
विद्यार्थियों के हित को केंद्र में रखकर विकास की दिशा
बैठक में हुई चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि विद्यालय की प्राथमिकता विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ उनके व्यक्तित्व निर्माण को भी मजबूत करना है। एआई आधारित शिक्षा जहां विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी दुनिया से जोड़ने का माध्यम बनेगी, वहीं साहित्यिक गतिविधियां उनकी भाषा और अभिव्यक्ति क्षमता को विकसित करेंगी। समृद्ध पुस्तकालय उन्हें अध्ययन और कैरियर संबंधी जानकारी उपलब्ध कराएगा, जबकि स्वास्थ्य परीक्षण उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करेगा।
इसी प्रकार पूर्व विद्यार्थियों से संवाद विद्यार्थियों को वास्तविक अनुभवों से सीखने का अवसर देगा और सह-शैक्षणिक गतिविधियां उनकी छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने में सहायक हो सकती हैं। इन सभी पहलुओं का उद्देश्य विद्यार्थी को केवल एक परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी के रूप में नहीं, बल्कि एक सक्षम, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में विकसित करना है।
पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय मंडला में आयोजित विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक में कलेक्टर श्री राहुल नामदेव धोटे ने तकनीकी शिक्षा और विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित अध्ययन को मजबूत करने के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर फोकस करने का संदेश दिया। विद्यार्थियों के हाथों नए मंच का उद्घाटन, एआई शिक्षा पर विशेष ध्यान, लाइब्रेरी को समृद्ध बनाने, कैरियर मार्गदर्शन, साहित्यिक गतिविधियों, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और पूर्व विद्यार्थियों से संवाद के निर्देशों के माध्यम से विद्यालयी शिक्षा को अधिक व्यापक और उपयोगी बनाने की दिशा पर जोर दिया गया। बैठक का केंद्रीय संदेश यही रहा कि आधुनिक शिक्षा में तकनीक के साथ रचनात्मकता, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, नेतृत्व, साहित्य और कैरियर जागरूकता को समान महत्व देकर विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार किया जाना चाहिए।









