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HQ Report
समाजसेवियों, अधिवक्ताओं, व्यापारियों और पर्यावरण प्रेमियों ने लिया हरित सतना बनाने का संकल्प
‘अपना सपना-हरा-भरा सतना’ अभियान के तहत कलेक्ट्रेट परिसर धवारी में रोपा गया कदम का पौधा, जन्मदिवस और विशेष अवसरों पर पौधरोपण का लिया संकल्प
सतना। शहर को हरा-भरा और पर्यावरण की दृष्टि से समृद्ध बनाने के उद्देश्य से पं. गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास द्वारा संचालित ‘अपना सपना-हरा-भरा सतना’ अभियान के अंतर्गत कलेक्ट्रेट कार्यालय परिसर धवारी में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम एडवोकेट संकल्प मिश्र के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित हुआ। इस अवसर पर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए सेवा न्यास के कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों, व्यापारियों, अधिवक्ताओं और समाजसेवियों ने पौधरोपण करते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम में कदम का पौधा रोपा गया और उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने तथा अपने परिवार के सदस्यों के जन्मदिवस और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर पौधरोपण को प्राथमिकता देंगे।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक पौधा लगाना नहीं, बल्कि पौधरोपण को सामाजिक संस्कार और नियमित जनभागीदारी की गतिविधि के रूप में स्थापित करना रहा। ‘अपना सपना-हरा-भरा सतना’ अभियान के माध्यम से शहर और आसपास के क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने तथा लोगों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जन्मदिवस जैसे व्यक्तिगत अवसर को पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर पौधा लगाना इस बात का संदेश देता है कि खुशी के अवसरों को समाज और प्रकृति के हित से जोड़ा जा सकता है। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने पौधरोपण के साथ-साथ लगाए गए पौधे की देखभाल और संरक्षण को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया।
कलेक्ट्रेट परिसर जैसे सार्वजनिक और प्रशासनिक महत्व वाले स्थान पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित होने से इसका प्रतीकात्मक महत्व भी सामने आया। सार्वजनिक परिसरों में हरियाली बढ़ने से वहां आने-जाने वाले लोगों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सकता है। साथ ही ऐसे स्थानों पर होने वाली पर्यावरणीय गतिविधियां आम नागरिकों को भी पौधरोपण के लिए प्रेरित कर सकती हैं। कार्यक्रम में उपस्थित पर्यावरण प्रेमियों और समाजसेवियों ने कहा कि पौधा लगाना शुरुआत है, वास्तविक जिम्मेदारी उसकी नियमित देखभाल और संरक्षण की है। इसी सोच के साथ सेवा न्यास द्वारा पौधों के संरक्षण और पालन-पोषण की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है।
जन्मदिवस को बनाया पर्यावरण संरक्षण का अवसर










