
डॉक्टोरल और पोस्ट-डॉक्टोरल शोध फेलोशिप व्यवस्था को मजबूत बनाने पर हुआ मंथन
नई दिल्ली। देश में डॉक्टोरल और पोस्ट-डॉक्टोरल शोध फेलोशिप के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से 6 अक्टूबर 2026 को नीति आयोग में ‘विज्ञान निधि’ विषय पर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोवर्धन दास ने की। बैठक में केंद्र सरकार की प्रमुख विज्ञान एवं अनुसंधान एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रमुखों ने सहभागिता की।
बैठक में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR), जैव प्रौद्योगिकी विभाग, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) सहित विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस दौरान देश में शोध प्रतिभाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और अनुसंधान के क्षेत्र में मानव संसाधन को सशक्त बनाने से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
शोध प्रतिभाओं की पाइपलाइन मजबूत करने पर जोर
बैठक में भारत की शोध प्रतिभाओं की पाइपलाइन को मजबूत बनाने के लिए डॉक्टोरल एवं पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप की उपलब्धता बढ़ाने तथा इनके मूल्य और प्रभाव को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया गया। शोधार्थियों को समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध हो, इसके लिए फेलोशिप वितरण एवं भुगतान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में विभिन्न विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए एक एकीकृत मंच (Unified Platform) विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य शोधार्थियों को फेलोशिप से संबंधित सुविधाएं और जानकारी अधिक सरल एवं पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना तथा देश में वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना है।
युवा शोधकर्ताओं में निवेश को बताया महत्वपूर्ण
बैठक में प्रो. गोवर्धन दास ने देश की फेलोशिप व्यवस्था से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत के प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं को देश में ही बेहतर अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि देश की बौद्धिक प्रतिभा को देश के भीतर बनाए रखा जा सके।
उन्होंने युवा शोधकर्ताओं में निवेश को आत्मनिर्भर वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की आधारशिला बताया। उनके अनुसार, शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में युवा प्रतिभाओं को पर्याप्त अवसर, संसाधन और प्रोत्साहन उपलब्ध कराने से देश की वैज्ञानिक क्षमता को नई गति मिलेगी।
विकसित भारत@2047 के लक्ष्य में अनुसंधान की अहम भूमिका
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के दीर्घकालीन लक्ष्य में विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका है। विकसित भारत@2047 की परिकल्पना को साकार करने के लिए देश में उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को बढ़ावा देने और युवा वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों के लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था तैयार करने की आवश्यकता है।
‘विज्ञान निधि’ के माध्यम से फेलोशिप व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने, शोधार्थियों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया को सरल करने और विभिन्न सरकारी अनुसंधान संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में बैठक को महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक में शामिल विभिन्न विज्ञान एवं अनुसंधान एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भी शोध फेलोशिप व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुझाव साझा किए। चर्चा का मुख्य उद्देश्य देश में शोध प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना, वैज्ञानिक मानव पूंजी का विकास करना तथा भारत को अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनाना रहा।










