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डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पंचम दीक्षांत समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री, मेधावी विद्यार्थियों को मेडल एवं प्रशस्ति-पत्र देकर किया सम्मानित

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सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित हुआ समारोह, संविधान और कानून के शासन को विकसित भारत की आधारशिला बताया
लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के पंचम दीक्षांत समारोह में गरिमामयी उपस्थिति के बीच विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति श्री विक्रम नाथ तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री अरुण भंसाली की उपस्थिति विशेष रही। समारोह में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मेडल एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। दीक्षांत समारोह किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए महत्वपूर्ण अवसर होता है, क्योंकि यह विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन और अध्ययन के दौरान अर्जित ज्ञान का सम्मान करने के साथ उनके व्यावसायिक जीवन की नई शुरुआत का प्रतीक भी है। विधि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए यह अवसर विशेष महत्व रखता है, क्योंकि कानून की शिक्षा उन्हें न्याय, संवैधानिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण विकसित करने की प्रेरणा देती है। समारोह में व्यक्त विचारों के माध्यम से शिक्षा, संविधान और विधि के शासन की भूमिका को रेखांकित किया गया।
समारोह के अवसर पर संस्कृत का प्रेरक वाक्य “सत्यं वद। धर्मं चर। स्वाध्यायान्मा प्रमदः।” भी विशेष महत्व रखता है। इसका भाव है कि सत्य बोलें, धर्म अर्थात कर्तव्य और नैतिकता के मार्ग पर चलें तथा स्वाध्याय में कभी प्रमाद न करें। ये आदर्श विधि के विद्यार्थियों और न्याय व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। कानून का अध्ययन केवल कानूनी प्रावधानों को समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और संवैधानिक मर्यादाओं का सम्मान भी आवश्यक है। विधि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की समझ भी प्रदान करें। दीक्षांत समारोह में मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करना उनकी उपलब्धियों को मान्यता देने के साथ अन्य विद्यार्थियों को भी उत्कृष्टता, परिश्रम और निरंतर अध्ययन के लिए प्रेरित करता है।
इस अवसर पर विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया। संविधान देश की शासन व्यवस्था का आधार है और नागरिकों के अधिकारों, कर्तव्यों तथा राज्य की संस्थाओं की भूमिका को निर्धारित करता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में संविधान का सम्मान, कानून के समक्ष समानता और न्याय तक निष्पक्ष पहुंच अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें न्यायपूर्ण समाज, मजबूत संस्थाएं और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा भी शामिल है। संविधान की मूल भावना के अनुरूप शासन व्यवस्था का संचालन करने से नागरिकों का संस्थाओं पर विश्वास मजबूत होता है। विधि के विद्यार्थियों के लिए संविधान के सिद्धांतों को समझना और उन्हें व्यावहारिक जीवन में अपनाना विशेष रूप से आवश्यक है, क्योंकि वे भविष्य में न्यायिक, प्रशासनिक, विधिक और सामाजिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
समारोह में प्रदेश में कानून के शासन अर्थात ‘रूल ऑफ लॉ’ को प्रभावी रूप से लागू करने की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया गया। रूल ऑफ लॉ का मूल सिद्धांत है कि शासन और प्रशासन सहित सभी व्यक्ति तथा संस्थाएं कानून के अधीन रहें और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित हो। कानून का शासन नागरिकों के अधिकारों की रक्षा, न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता और प्रशासनिक जवाबदेही के लिए आवश्यक माना जाता है। इस संदर्भ में डबल इंजन की सरकार द्वारा प्रदेश में संविधान की मूल भावना के अनुरूप कानून के शासन को पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ लागू करने की बात कही गई। एक सुदृढ़ विधिक व्यवस्था के लिए कानूनों का निष्पक्ष अनुपालन, संस्थागत पारदर्शिता और नागरिकों को न्याय प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। विधि विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को इन मूल सिद्धांतों की समझ विकसित करने का अवसर मिलता है, जिससे वे भविष्य में न्याय और विधिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे सकें।
पंचम दीक्षांत समारोह में मेडल एवं प्रशस्ति-पत्र प्राप्त करने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की उपलब्धियां विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परंपरा और उनके व्यक्तिगत परिश्रम का प्रतीक रहीं। सम्मानित विद्यार्थियों के लिए यह उपलब्धि आगे की जिम्मेदारियों और नए अवसरों की शुरुआत भी है। कानून की शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने ज्ञान का उपयोग न्याय, निष्पक्षता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए करें। समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। ऐसे आयोजन शैक्षणिक संस्थानों में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के साथ समाज में विधिक जागरूकता और न्याय के प्रति सम्मान बढ़ाने में सहायक होते हैं। संविधान के आदर्शों, सत्यनिष्ठा और कानून के शासन को केंद्र में रखकर आगे बढ़ने वाले युवा देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत बनाने में योगदान दे सकते हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की उपलब्धियों का सम्मान करने और न्यायपूर्ण, जिम्मेदार तथा विकसित भारत के निर्माण में विधि शिक्षा की भूमिका को रेखांकित करने का महत्वपूर्ण अवसर रहा।
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