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जीरकपुर में ‘धरती बचाओ यात्रा’ नगर कीर्तन में शामिल हुए श्रद्धालु, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

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गुरुद्वारा बुंगा माता गंगा साहिब जी में माथा टेककर प्राप्त किया आशीर्वाद, श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व को समर्पित चौथे विशाल नगर कीर्तन में हरियाणा के कृषि एवं पशुपालन मंत्री श्याम सिंह राणा भी रहे उपस्थित
जीरकपुर। जीरकपुर स्थित गुरुद्वारा बुंगा माता गंगा साहिब जी में माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व को समर्पित चौथे विशाल नगर कीर्तन ‘धरती बचाओ यात्रा’ में सहभागिता की। इस अवसर पर श्रद्धा, सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रमुखता से सामने आया। नगर कीर्तन सिख धर्म की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके माध्यम से गुरु साहिब की शिक्षाओं और मानवता के कल्याण से जुड़े विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जाता है। ‘धरती बचाओ यात्रा’ का उद्देश्य प्रकृति के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहित करना है। इस अवसर पर हरियाणा सरकार के कृषि एवं पशुपालन मंत्री श्री श्याम सिंह राणा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय को जोड़ने वाली यह पहल समाज को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण हितैषी व्यवहार अपनाने की प्रेरणा देती है।
श्री गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं मानवता, समानता, सेवा, सद्भाव और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देती हैं। उनके विचारों में सभी मनुष्यों के प्रति समान दृष्टिकोण रखने और जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाने पर विशेष बल दिया गया है। गुरु साहिब की वाणी का प्रसिद्ध संदेश “पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत” प्रकृति के महत्व को गहराई से अभिव्यक्त करता है। इसका भाव है कि वायु गुरु के समान, जल पिता के समान और धरती माता के समान पूजनीय है। यह संदेश मनुष्य को प्रकृति से अपने गहरे संबंध को समझने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है। वर्तमान समय में वायु प्रदूषण, जल स्रोतों की स्वच्छता, भूमि की उर्वरता और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग जैसे विषय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं पर्यावरण संरक्षण के लिए नैतिक और आध्यात्मिक आधार प्रदान करती हैं।
चौथे विशाल नगर कीर्तन ‘धरती बचाओ यात्रा’ में सहभागिता के माध्यम से पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया। धार्मिक आयोजनों की व्यापक पहुंच समाज के विभिन्न वर्गों तक सकारात्मक विचार पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। जब आस्था के साथ सामाजिक दायित्वों को जोड़ा जाता है, तो लोगों को अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा मिलती है। पर्यावरण संरक्षण के लिए जल की बर्बादी रोकना, पेड़-पौधों की देखभाल करना, प्लास्टिक के अनावश्यक उपयोग को कम करना और आसपास स्वच्छता बनाए रखना जैसे छोटे-छोटे प्रयास भी महत्वपूर्ण हैं। इसी प्रकार प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है। ‘धरती बचाओ यात्रा’ का संदेश केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक को प्रकृति के संरक्षण में अपनी भूमिका पहचानने का आह्वान करता है।
गुरुद्वारा बुंगा माता गंगा साहिब जी में माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर श्रद्धा और आध्यात्मिक जुड़ाव से परिपूर्ण रहा। सिख परंपरा में गुरुद्वारे सेवा, संगत और मानव कल्याण की भावना के महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं। यहां गुरु साहिब की शिक्षाओं का स्मरण करते हुए लोगों को विनम्रता, परोपकार और समाज के प्रति अपने दायित्वों को निभाने की प्रेरणा मिलती है। नगर कीर्तन जैसे आयोजन लोगों को सामूहिक रूप से धार्मिक परंपराओं से जोड़ने के साथ सामाजिक संदेशों को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने का अवसर प्रदान करते हैं। श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व को समर्पित इस यात्रा में पर्यावरण संरक्षण को प्रमुखता देना प्रकृति और मानव जीवन के बीच के संबंध को रेखांकित करता है। धरती, जल और वायु के संरक्षण के बिना स्वस्थ समाज और बेहतर भविष्य की कल्पना संभव नहीं है। इसलिए प्रकृति के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी को व्यक्तिगत जीवन के साथ सामुदायिक प्रयासों का भी हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
इस अवसर पर हरियाणा सरकार के कृषि एवं पशुपालन मंत्री श्री श्याम सिंह राणा तथा अनेक श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को बढ़ाया। श्री गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व उनकी शिक्षाओं को स्मरण करने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का महत्वपूर्ण अवसर है। उनकी वाणी सेवा, सद्भाव, समानता और मानवता के कल्याण का मार्ग दिखाती है। ‘धरती बचाओ यात्रा’ के माध्यम से दिया गया पर्यावरण संरक्षण का संदेश इन मूल्यों को वर्तमान समय की आवश्यकताओं से जोड़ता है। प्रकृति की रक्षा करना केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व है। जल बचाने, स्वच्छता बनाए रखने, वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग जैसे प्रयासों से इस दिशा में सार्थक योगदान दिया जा सकता है। गुरु साहिब की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए समाज सेवा, आपसी सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखना ही इस पावन आयोजन का व्यापक संदेश है।
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