
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कमिश्नर, कलेक्टर एवं अधिकारियों को दिए निर्देश, पेयजल, खाद वितरण, स्वास्थ्य सेवाओं और विकास कार्यों की समीक्षा
सतना, 21 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के संभागायुक्तों, कलेक्टरों, पुलिस अधिकारियों तथा अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर निर्देश दिए। बैठक में आगामी त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा, बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वामित्व योजना, कम वर्षा वाले जिलों में पेयजल व्यवस्था, खाद वितरण और वर्षा से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत सहित अनेक विषयों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आगामी त्योहारों के दौरान सुरक्षा के समुचित प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं तथा वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों का सुधार 15 नवंबर तक पूरा कराया जाए। बैठक में प्रदेश के विकास कार्यों और आम नागरिकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगामी एक माह के दौरान कई पर्व और त्योहार आने वाले हैं। इन अवसरों पर नागरिकों की आवाजाही बढ़ने के साथ बाजारों, सार्वजनिक स्थलों और धार्मिक स्थानों पर लोगों की उपस्थिति भी बढ़ सकती है। ऐसी परिस्थितियों में जिला प्रशासन और पुलिस विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात को सुचारु रखने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि त्योहारों के आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तैयारी की जाए।
मुख्यमंत्री ने बिजली की पर्याप्त उपलब्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि कलेक्टर स्थानीय स्तर पर बिजली वितरण से जुड़ी समस्याओं का समाधान कराएं, ताकि नागरिकों को निर्बाध और सुचारु विद्युत आपूर्ति मिल सके। दीपावली के अवसर पर पटाखों की बिक्री और उपयोग के दौरान अग्नि दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए। पटाखा विक्रय स्थलों पर अग्निशमन की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा अस्पतालों में बर्न वार्ड की उपलब्धता और उपचार संबंधी व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने को कहा गया। गंभीर रूप से घायल मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर एयर एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराकर समय पर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
त्योहारों में कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आगामी त्योहारों को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। त्योहारों के दौरान बाजारों, प्रमुख मार्गों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक आयोजनों में लोगों की आवाजाही बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में सुरक्षा प्रबंधन और यातायात व्यवस्था को पहले से व्यवस्थित करना आवश्यक है।
उन्होंने कमिश्नरों, कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की परिस्थितियों का आकलन करते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। संवेदनशील स्थानों पर सतर्कता रखी जाए और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
त्योहारों के अवसर पर नागरिकों को आवागमन में असुविधा न हो, इसके लिए यातायात प्रबंधन की प्रभावी योजना तैयार करने पर भी जोर दिया गया। प्रमुख बाजारों, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और आयोजन स्थलों के आसपास यातायात का संचालन व्यवस्थित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। पुलिस और प्रशासन स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार यातायात व्यवस्था की निगरानी करें।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि त्योहारों के दौरान सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। नागरिकों की सुरक्षा, सार्वजनिक शांति और सुचारु यातायात के लिए आवश्यक प्रबंध समय रहते पूरे किए जाएं। प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्रों में परिस्थितियों पर नजर रखें और आवश्यकतानुसार तत्काल कार्रवाई करें।
त्योहार सामाजिक मेलजोल, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े होते हैं। इन अवसरों पर शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर समन्वय बनाकर कार्य करने और नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
दीपावली पर अग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए विशेष तैयारी
दीपावली के अवसर पर पटाखों की बिक्री और उपयोग के कारण अग्नि दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को अग्नि सुरक्षा के समुचित प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पटाखा विक्रय स्थलों पर अग्निशमन की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि किसी अप्रिय घटना की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।
पटाखा विक्रय स्थलों पर सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। जिला प्रशासन संबंधित विभागों के साथ समन्वय करके यह सुनिश्चित करे कि बिक्री स्थल निर्धारित मानकों के अनुरूप हों और वहां आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध रहें। अग्निशमन व्यवस्था को सक्रिय स्थिति में रखने तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए तैयारी करना भी महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को अस्पतालों का निरीक्षण कर बर्न वार्ड की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। दीपावली के दौरान पटाखों से जलने की घटनाएं होने पर प्रभावित व्यक्तियों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना आवश्यक होता है। इस दृष्टि से अस्पतालों में आवश्यक सुविधाओं, चिकित्सा कर्मियों और उपचार व्यवस्था की उपलब्धता की समीक्षा करने को कहा गया।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि यदि कोई मरीज गंभीर रूप से घायल होता है और उसे उच्च स्तरीय उपचार की आवश्यकता है, तो स्थिति के अनुसार तत्काल एयर एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराकर उपचार सुनिश्चित किया जाए। आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के संचालन में समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसलिए संबंधित अधिकारी अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं के बीच समन्वय बनाए रखें।
मुख्यमंत्री के निर्देशों का उद्देश्य त्योहारों के दौरान अग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम, सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने और किसी आपात स्थिति में नागरिकों को शीघ्र चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
बिजली की पर्याप्त उपलब्धता, वितरण संबंधी समस्याएं दूर करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि प्रदेश में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि स्थानीय स्तर पर विद्युत वितरण से जुड़ी समस्याओं को दूर कराएं और नागरिकों को सुचारु बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करें।
बिजली की उपलब्धता के साथ उसका प्रभावी वितरण भी महत्वपूर्ण है। किसी क्षेत्र में तकनीकी समस्या, आपूर्ति में व्यवधान अथवा वितरण व्यवस्था से जुड़ी कठिनाइयों के कारण नागरिकों को परेशानी हो सकती है। ऐसी समस्याओं की पहचान कर संबंधित विभागों के माध्यम से समय पर समाधान करना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को स्थानीय परिस्थितियों पर ध्यान देने और बिजली वितरण से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। त्योहारों के दौरान घरों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर बिजली की आवश्यकता बढ़ सकती है। ऐसे में आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना और तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना महत्वपूर्ण है।
जिला स्तर पर प्रशासन और बिजली विभाग के बीच बेहतर समन्वय से स्थानीय समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। संबंधित अधिकारियों को शिकायतों पर ध्यान देते हुए विद्युत व्यवस्था की नियमित निगरानी करने की आवश्यकता है।
बैठक में बिजली आपूर्ति से जुड़े निर्देशों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि प्रदेश में उपलब्ध बिजली का लाभ नागरिकों तक सुचारु रूप से पहुंचना चाहिए। स्थानीय स्तर पर वितरण संबंधी समस्याओं का निराकरण प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल रहे।
स्वामित्व योजना में प्रगति, अब तक 1 लाख 60 हजार 220 प्रकरणों का पंजीयन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक में स्वामित्व योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया कि योजना के अंतर्गत अब तक 1 लाख 60 हजार 220 प्रकरणों का पंजीयन हो चुका है। उन्होंने कहा कि योजना के क्रियान्वयन में कई अधिकारियों ने अच्छा कार्य किया है। इस दौरान अधिकारियों के कार्यों की प्रगति का उल्लेख करते हुए अन्य जिलों में भी कार्यों को गति देने पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने रीवा जिले की त्योंथर तहसील के तहसीलदार राजेश तिवारी द्वारा 1,010 पंजीयन कराए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने इस कार्य को बेहतर प्रदर्शन के उदाहरण के रूप में सामने रखते हुए स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में सक्रियता की आवश्यकता बताई।
स्वामित्व योजना के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रियाओं के माध्यम से संबंधित प्रकरणों का पंजीयन महत्वपूर्ण है। योजना की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए राजस्व अधिकारियों और मैदानी अमले की सक्रिय भूमिका आवश्यक होती है। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्यों की नियमित समीक्षा करने और निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में प्रयास तेज करने के निर्देश दिए।
उन्होंने इंदौर, अनूपपुर और धार जिले के कलेक्टरों को स्वामित्व योजना पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा। इन जिलों में योजना के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने उन पटवारियों को चिन्हित करने के निर्देश दिए, जिनकी प्रगति शून्य है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की पहचान कर नियमानुसार समुचित कार्रवाई की जाए। योजना में अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की जवाबदेही और कार्यों की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण है।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में मैदानी अमले की भूमिका महत्वपूर्ण
स्वामित्व योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मैदानी स्तर पर कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार प्रकरणों का पंजीयन, संबंधित अभिलेखों का संधारण और पात्र मामलों में आवश्यक कार्रवाई योजना की प्रगति से जुड़े प्रमुख कार्य हैं।
मुख्यमंत्री ने बैठक में पंजीयन की स्थिति की समीक्षा करते हुए उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, जहां अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। मैदानी अमले की कार्यप्रणाली का आकलन करके कमियों की पहचान करना और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराना प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
स्वामित्व योजना के अंतर्गत प्रकरणों के पंजीयन में तेजी लाने के लिए जिला स्तर पर अधिकारियों को नियमित समीक्षा करनी चाहिए। तहसील और पटवारी स्तर पर लंबित कार्यों की स्थिति समझना तथा समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने शून्य प्रगति वाले पटवारियों को चिन्हित कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य योजना के क्रियान्वयन में जवाबदेही सुनिश्चित करना और निर्धारित कार्यों को समय पर पूरा कराने की दिशा में प्रशासनिक सक्रियता बढ़ाना है।
बैठक में प्रस्तुत पंजीयन संबंधी आंकड़े योजना की प्रगति की समीक्षा का आधार बने। मुख्यमंत्री ने उन अधिकारियों के कार्यों का उल्लेख भी किया, जिन्होंने पंजीयन में उल्लेखनीय कार्य किया है।
सामान्य से कम वर्षा वाले 12 जिलों में पेयजल व्यवस्था पर ध्यान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक में बताया कि प्रदेश के 12 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई है। उन्होंने इन जिलों के कलेक्टरों को पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा कम पानी में तैयार होने वाली फसलों के लिए योजना तैयार करने के निर्देश दिए।
कम वर्षा की स्थिति में पेयजल और कृषि संबंधी आवश्यकताओं का प्रभावी प्रबंधन महत्वपूर्ण हो जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता, स्थानीय जलस्रोतों की स्थिति और आगामी आवश्यकताओं का आकलन करके प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संबंधित जिलों के कलेक्टर पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करें और जहां जरूरत हो, वहां तत्काल आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करें। नागरिकों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप योजना तैयार करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
कृषि क्षेत्र में कम वर्षा के प्रभाव को देखते हुए कम पानी में तैयार होने वाली फसलों के संबंध में भी योजना बनाने के निर्देश दिए गए। वर्षा की कमी से खेती की परिस्थितियां प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में उपलब्ध जल संसाधनों के अनुसार कृषि संबंधी योजना बनाना उपयोगी होता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे स्थिति का आकलन करके आवश्यक तैयारियां करें और पेयजल तथा कृषि से संबंधित व्यवस्थाओं को समय पर लागू करने पर ध्यान दें।
फसल अनावरी की जानकारी तीन दिन में पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कम वर्षा वाले क्षेत्रों में कृषि संबंधी स्थिति की जानकारी समय पर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि फसल अनावरी से संबंधित जानकारी तीन दिन के भीतर पोर्टल पर अपलोड कराई जाए।
फसल अनावरी की जानकारी कृषि परिस्थितियों का आकलन करने में महत्वपूर्ण होती है। इससे फसलों की स्थिति, संभावित उत्पादन और वर्षा के प्रभाव से जुड़े विषयों को समझने में सहायता मिलती है। समय पर जानकारी उपलब्ध होने से प्रशासन को आवश्यक निर्णय लेने और संबंधित क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा करने में सुविधा होती है।
मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा में जानकारी अपलोड कराने के निर्देश दिए। इसके लिए मैदानी स्तर पर आवश्यक जानकारी संकलित करने और संबंधित अभिलेखों की स्थिति का ध्यान रखना आवश्यक है।
कम वर्षा वाले क्षेत्रों में फसलों की स्थिति का सही आकलन किसानों की आवश्यकताओं को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है। प्रशासन को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर कृषि और पेयजल से जुड़े विषयों पर ध्यान देना होगा।
बैठक में मुख्यमंत्री ने वर्षा की स्थिति के अनुसार तैयारी करने, कम पानी वाली फसलों की योजना बनाने और फसल अनावरी की जानकारी समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए नियमित जांच
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े विषय पर भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर उनकी नियमित जांच कराई जाए तथा मिलावट करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। बाजार में उपलब्ध खाद्य सामग्री की नियमित जांच से निर्धारित मानकों के पालन की निगरानी की जा सकती है। इसके लिए संबंधित विभागों को नमूने लेने, जांच कराने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई करने की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से संचालित करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खाद्य पदार्थों में मिलावट से संबंधित मामलों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए। जांच प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जाए और जहां मिलावट की पुष्टि होती है, वहां संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाए।
त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। नियमित जांच से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य मानकों के पालन में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने खाद्य पदार्थों के नमूने लेने और उनकी नियमित जांच कराने के निर्देश देकर इस विषय को प्रशासनिक प्राथमिकताओं में शामिल किया।
मौसमी बीमारियों के नियंत्रण के लिए समुचित प्रबंधन
मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम में परिवर्तन के कारण सर्दी, खांसी, वायरल संक्रमण और अन्य मौसमी बीमारियों का प्रकोप हो रहा है। उन्होंने अधिकारियों को इन बीमारियों के नियंत्रण के लिए समुचित प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मौसम में बदलाव के दौरान नागरिकों को विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे समय में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, मरीजों की जांच और आवश्यक उपचार की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तैयारी रखनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य संबंधी मामलों पर ध्यान देने और आवश्यक प्रबंधन करने के निर्देश दिए। इसके अंतर्गत स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की देखभाल, आवश्यक चिकित्सा सेवाओं और संबंधित व्यवस्थाओं की स्थिति की समीक्षा करना उपयोगी है।
त्योहारों के दौरान नागरिकों की आवाजाही बढ़ने और सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर नागरिकों को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सके।
बैठक में मौसमी बीमारियों के नियंत्रण पर जोर देते हुए स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
वर्षा से क्षतिग्रस्त सड़कों की 15 नवंबर तक कराएं मरम्मत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त हुई सड़कों के सुधार को लेकर स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसी सड़कों की मरम्मत 15 नवंबर तक पूरी कराई जाए। मुख्यमंत्री ने शहरी क्षेत्रों की सड़कों के सुधार पर भी विशेष ध्यान देने को कहा।
वर्षा के कारण सड़कों की सतह क्षतिग्रस्त होने, गड्ढे बनने और आवागमन में कठिनाइयां उत्पन्न होने की स्थिति बन सकती है। इससे वाहन चालकों और आम नागरिकों को परेशानी होती है। सड़क की खराब स्थिति दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ा सकती है। इसलिए क्षतिग्रस्त सड़कों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर सुधार कार्य कराना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति की समीक्षा करें और मरम्मत के कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा कराएं। शहरी क्षेत्रों में यातायात का दबाव अधिक होने के कारण सड़क सुधार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।
सड़क मरम्मत के दौरान गुणवत्ता और टिकाऊपन का ध्यान रखना भी जरूरी है। केवल तत्काल सुधार करने के बजाय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मरम्मत कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हो और सड़क की उपयोगिता बनी रहे।
ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में सड़क संपर्क नागरिकों की दैनिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। बेहतर सड़कें आवागमन को सुगम बनाने के साथ व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक गतिविधियों तक पहुंच में मदद करती हैं।
मुख्यमंत्री ने 15 नवंबर तक सड़क सुधार कार्य पूरा कराने के निर्देश देकर अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा।
सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस के आयोजन
मुख्यमंत्री ने बैठक में आगामी राष्ट्रीय एकता दिवस के आयोजन के संबंध में भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 31 अक्टूबर को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाएगी। इस अवसर पर राष्ट्रीय एकता की शपथ सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
सरदार वल्लभभाई पटेल का भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। स्वतंत्रता के बाद देश की रियासतों के एकीकरण और राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने में उनके योगदान को स्मरण करते हुए प्रतिवर्ष उनकी जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर निर्धारित कार्यक्रमों की तैयारी समय पर पूरी की जाए। कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामूहिक जिम्मेदारी के महत्व को सामने लाया जा सकता है।
जिला स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में नागरिकों और संबंधित संस्थाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक समन्वय आवश्यक है। अधिकारियों को कार्यक्रमों के आयोजन की व्यवस्था और निर्धारित गतिविधियों पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
राष्ट्रीय एकता दिवस का उद्देश्य देश की एकता और अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करना है। इस अवसर पर आयोजित शपथ और अन्य कार्यक्रम नागरिकों को राष्ट्रीय एकता के महत्व का स्मरण कराते हैं।
मध्यप्रदेश स्थापना दिवस एक नवंबर को मनाया जाएगा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश का स्थापना दिवस एक नवंबर को मनाया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश के स्थापना दिवस पर मुख्य समारोह भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित होगा। इसके साथ ही सभी जिला मुख्यालयों में भी स्थापना दिवस उल्लास के साथ मनाया जाए और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
मध्यप्रदेश स्थापना दिवस प्रदेश के गठन और उसकी सांस्कृतिक, सामाजिक तथा ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश की उपलब्धियों, सांस्कृतिक विविधता और विकास यात्रा को सामने लाने का अवसर मिलता है।
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि स्थापना दिवस के आयोजन की तैयारियां समय पर पूरी की जाएं। जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रमों का आयोजन करते हुए स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं और प्रतिभाओं को स्थान दिया जा सकता है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश की विविधता, लोककला, संगीत और परंपराओं को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। ऐसे आयोजनों में स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक समूहों की सहभागिता कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बना सकती है।
मुख्यमंत्री ने सभी जिला मुख्यालयों में स्थापना दिवस उल्लासपूर्वक मनाने और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। भोपाल के लाल परेड मैदान में होने वाला मुख्य समारोह प्रदेश स्तर पर इस आयोजन का प्रमुख केंद्र रहेगा।
गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार के प्रचार-प्रसार पर जोर
बैठक में मुख्यमंत्री ने गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार के संबंध में भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उन्नत दुधारू पशुपालकों को दिया जाएगा। इसके लिए योजना का समुचित प्रचार-प्रसार कराया जाए, ताकि संबंधित पात्र लोगों तक इसकी जानकारी पहुंच सके।
पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अनेक किसान खेती के साथ पशुपालन से भी अपनी आजीविका चलाते हैं। दुधारू पशुओं का बेहतर प्रबंधन, पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल और दुग्ध उत्पादन से जुड़ी व्यवस्थाएं पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पुरस्कार से संबंधित जानकारी का प्रभावी प्रसार होने से पात्र पशुपालकों को योजना के उद्देश्य और संबंधित प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी मिल सकती है। इसके लिए संबंधित विभागों को स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कहा कि गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार के बारे में समुचित जानकारी पहुंचाई जाए। योजना से संबंधित पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और अन्य शर्तों की जानकारी संबंधित विभागों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना उपयोगी होगा।
बैठक में इस विषय को ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन से जुड़े कार्यों को प्रोत्साहित करने और संबंधित पुरस्कार की जानकारी व्यापक स्तर पर पहुंचाने के संदर्भ में उठाया गया।
प्रदेश में खाद की पर्याप्त उपलब्धता, वितरण पर निगरानी के निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक में कहा कि प्रदेश में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने कलेक्टरों को खाद वितरण पर निगरानी रखने के निर्देश दिए, ताकि किसा









