
कटनी, मध्यप्रदेश। जल स्रोतों के संरक्षण और उनके संवर्धन के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत विकासखंड बड़वारा के ग्राम बंदरी में “पानी चौपाल” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों एवं विभागीय अधिकारियों ने किसानों को जल संरक्षण और आधुनिक सिंचाई तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। चौपाल के दौरान किसानों को पारंपरिक सिंचाई पद्धतियों के स्थान पर सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली अपनाने के लाभों के बारे में बताया गया। विशेषज्ञों ने समझाया कि ड्रिप और स्प्रिंकलर पद्धति के माध्यम से कम पानी में अधिक सिंचाई संभव है, जिससे जल की बचत के साथ-साथ फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता में भी सुधार होता है।
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों को यह भी बताया गया कि सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के उपयोग से खाद का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है, जिससे लागत में कमी आती है और फसल की वृद्धि संतुलित रूप से होती है। अधिकारियों ने किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि यह समय की आवश्यकता है और इससे खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
इस अवसर पर ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (PDMC) योजना की विस्तृत जानकारी भी दी गई। योजना के तहत किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही इच्छुक किसानों से पंजीयन हेतु आवश्यक दस्तावेज भी प्राप्त किए गए, ताकि उन्हें योजना का लाभ समय पर मिल सके।
कार्यक्रम में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विशेषज्ञों से विभिन्न तकनीकी विषयों पर चर्चा की। इस पहल को जल संरक्षण के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।









