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राजस्थान में बना देश का तीसरा अक्षरधाम मंदिर, भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम; पढ़ें खास बातें

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Bureau Report

जोधपुर में बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन हो गया है जो भक्ति शांति और संस्कृति का केंद्र है। यह मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय के संस्थापक भगवान स्वामीनारायण को समर्पित है। जोधपुर का स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर देश का तीसरा और दुनिया का पांचवां मंदिर है। 42 बीघा में फैले इस मंदिर को बनाने में 7 साल लगे और इसमें लोहे या सीमेंट का इस्तेमाल नहीं हुआ है।

जस्थान के जोधपुर में बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन गुरुवार को हो गया है। राजस्थान के दूसरे सबसे बड़े शहर में बने इस मंदिर को भक्ति, शांति और सांस्कृतिक गौरव का केंद्र माना जाता है।

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दरअसल, यह मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय के संस्थापक भगवान स्वामीनारायण को समर्पित होता है। उन्होंने नैतिक जीवन और सामाजिक उत्थान उपदेश दिया था। बता दें कि जोधपुर का स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर देश का तीसरा ऐसा मंदिर है। आइए आपको इस मंदिर की खास बाते बताते हैं…

  • राजस्थान के जोधपुर में इस मंदिर का निर्माण स्वामी महाराज से प्रेरित है। बताया जा रहा है कि इस पवित्र मंदिर की परिकल्पना और निर्माण, प्रमुख स्वामी महाराज के वर्तमान आध्यात्मिक उत्तराधिकारी और बीएपीएस के वर्तमान गुरु, महंत स्वामी महाराज के मार्गदर्शन में किया गया।
  • इस मंदिर के अंदर आंतरिक शांति और दिव्य दर्शन का स्थान बनाया गया है।
  • जोधपुर में बनाय यह मंदिर देश का तीसरा ऐसा अक्षरधाम मंदिर है। जोधपुर में बना यह मंदिर दुनिया का पांचवां मंदिर है। पहला दिल्ली और दूसरा अक्षरधाम मंदिर गांधीनगर में है।
  • मंदिर में नीलकंठ अभिषेक मंडपम बनाया गया है, जिसमें भगवान स्वामीनारायण की नीलकंठ वर्णी के रूप में पंचधातु की मूर्ति स्थापित है।
  • राजस्थान के दूसरे सबसे बड़े शहर में बना यह मंदिर शहर के सूरसागर स्थित कालीबेरी क्षेत्र में स्थापित है। गत गुरुवार को इसका उद्घाटन किया गया।
  • इस मंदिर को पूरी तरीके से जोधपुर बलुआ पत्थर से बनाया गया है। इतना ही नहीं इस मंदिर में लोहे का उपयोग नहीं किया गया है। साथ ही किसी भी प्रकार के सीमेंट का प्रयोग इसमें नहीं किया गया है।
  • जोधपुर में बना यह अक्षरधाम मंदिर परिसर 42 बीघा में फैला है। इसमें 10 बीघा में उद्यान जिसमें 500 पेड़ और 5500 पौधे लगे हैं।
  • मंदिर की ऊंचाई 191 फीट है, 181 फीट और 111 फीट है। इसमें पांच शिखर, एक भव्य गुंबद और 14 छोटे गुंबद हैं।
  • इस मंदिर को बनाने में कुल 7 वर्षों से अधिक का वक्त लगा है। इसके निर्माण में 500 से अधिक कारिगरों ने अपना योगदान दिया है।
  • बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण नागर शैली में किया गया है। कहा जाता है कि ये वास्तुकला 10वीं और 13वीं शताब्दी में राजस्तान और गुजरात में काफी प्रचलित रही थी।
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