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जीआरपी इंदौर में सीसीटीएनएस, ई-रक्षक एप एवं आईसीजेएस पर दो दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ, डिजिटल पुलिसिंग को मिलेगी नई गति

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इंदौर। मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जीआरपी (Government Railway Police) इंदौर में सीसीटीएनएस (CCTNS), ई-रक्षक एप एवं इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) विषयक दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। पुलिस अधीक्षक रेल इंदौर श्री अरविंद तिवारी के निर्देशन में आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य नवपदस्थ पुलिस कर्मियों को डिजिटल पुलिसिंग की नवीनतम तकनीकों से दक्ष बनाना है, ताकि अपराध नियंत्रण, जांच और नागरिक सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
कार्यालय पुलिस अधीक्षक रेल इंदौर स्थित सीसीटीएनएस प्रशिक्षण लैब, आरआरपी लाइन इंदौर में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जीआरपी इंदौर के विभिन्न थाना क्षेत्रों, चौकियों एवं आरआरपी लाइन से 10 नवपदस्थ आरक्षकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी आधारित पुलिसिंग प्रणाली की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में सीसीटीएनएस (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) की कार्यप्रणाली से परिचित कराया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि भारत सरकार की यह महत्वाकांक्षी परियोजना देशभर के पुलिस थानों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ती है, जिसके माध्यम से अपराध एवं अपराधियों से संबंधित सूचनाओं का ऑनलाइन संधारण, खोज, विश्लेषण और आदान-प्रदान किया जाता है। इससे विवेचना की गुणवत्ता में सुधार होता है तथा अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में तेजी आती है।
दूसरे सत्र में ई-रक्षक एप की उपयोगिता और संचालन की जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि यह एप पुलिस कर्मियों की दैनिक कार्यप्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित बनाता है। इसके माध्यम से ड्यूटी प्रबंधन, विभागीय सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान, डिजिटल सेवाओं का उपयोग तथा प्रशासनिक कार्यों को सरल और पारदर्शी बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान आईसीजेएस (Inter-Operable Criminal Justice System) की विस्तृत जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रणाली पुलिस, न्यायालय, जेल, अभियोजन और फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं सहित आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े सभी विभागों के बीच डिजिटल समन्वय स्थापित करती है। इससे मामलों की सुनवाई, विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनती है।
प्रतिभागियों को ई-एफआईआर प्रणाली की कार्यप्रणाली भी समझाई गई, जिसके माध्यम से नागरिक कई प्रकार की शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं। इसके साथ ही क्राई-मैक (Cri-MAC) पोर्टल की उपयोगिता पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। यह पोर्टल राज्यों और विभिन्न पुलिस इकाइयों के बीच गंभीर अपराधों एवं वांछित अपराधियों से संबंधित सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित करता है, जिससे अपराधों की रोकथाम और अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी में सहायता मिलती है।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल तकनीक पुलिस व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। साइबर अपराध, संगठित अपराध और अंतरराज्यीय अपराधों की बढ़ती चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस कर्मियों का तकनीकी रूप से दक्ष होना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल पुलिसिंग के माध्यम से न केवल अपराध नियंत्रण की प्रक्रिया मजबूत होगी, बल्कि आम नागरिकों को भी तेज, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। आधुनिक तकनीक के उपयोग से शिकायतों के त्वरित निस्तारण, जांच की गति, रिकॉर्ड प्रबंधन तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय में उल्लेखनीय सुधार होगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहभागी पुलिसकर्मियों ने आधुनिक तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग का अभ्यास भी किया तथा विशेषज्ञों से विभिन्न तकनीकी विषयों पर जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के समापन पर प्रशिक्षित आरक्षकों से अपेक्षा की गई कि वे अपने-अपने कार्यस्थलों पर डिजिटल प्रणालियों का प्रभावी उपयोग कर पुलिस व्यवस्था को और अधिक सक्षम, जवाबदेह तथा नागरिक हितैषी बनाने में सक्रिय योगदान देंगे।
मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डिजिटल इंडिया और स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो रेलवे यात्रियों की सुरक्षा, अपराध नियंत्रण तथा तकनीक आधारित पुलिस सेवाओं को नई मजबूती प्रदान करेगा।
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