
भोपाल। मुख्यमंत्री ने लोकसेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में राज्य में ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाली महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं के साथ-साथ केंद्र प्रायोजित एवं राज्य योजना के अंतर्गत संचालित विभिन्न विकास कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षात्मक बैठक की। बैठक में परियोजनाओं की वर्तमान प्रगति, कार्यों की गुणवत्ता, वित्तीय एवं भौतिक उपलब्धियों तथा निर्धारित समय-सीमा के अनुरूप क्रियान्वयन की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए, ताकि उनका लाभ शीघ्र आमजन तक पहुंच सके।
बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित अधोसंरचना, सिंचाई, पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, नगरीय विकास तथा अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। अधिकारियों ने प्रत्येक परियोजना की वर्तमान स्थिति, निर्माण कार्यों की गति, वित्तीय व्यय तथा आगामी कार्ययोजना की जानकारी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास परियोजनाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक प्रगति, रोजगार सृजन और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इसलिए प्रत्येक विभाग यह सुनिश्चित करे कि योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब न हो और सभी कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरे किए जाएं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं का लागत मूल्य ₹100 करोड़ से अधिक है, उनकी नियमित समीक्षा की जाए और प्रत्येक चरण की प्रगति पर सतत निगरानी रखी जाए। यदि किसी परियोजना में तकनीकी, प्रशासनिक या वित्तीय कारणों से विलंब हो रहा है, तो संबंधित विभाग तत्काल समन्वय स्थापित कर उसका समाधान करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों में समयबद्धता और गुणवत्ता दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
बैठक में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत संचालित परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी समन्वय के माध्यम से विकास कार्यों को गति दी जाए। उन्होंने सभी विभागों को उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का समयबद्ध और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि स्वीकृत परियोजनाओं का लाभ निर्धारित समय पर जनता को मिल सके।
मुख्यमंत्री ने परियोजनाओं के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण पर विशेष बल देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की तकनीकी लापरवाही या निर्माण संबंधी अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित विभागों को नियमित निरीक्षण, तृतीय पक्ष गुणवत्ता परीक्षण तथा तकनीकी मानकों के पालन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और जिन परियोजनाओं में भूमि, वन, पर्यावरण, विद्युत या अन्य विभागों की स्वीकृतियों की आवश्यकता है, उनका समय पर निराकरण सुनिश्चित करें। विभागों के बीच बेहतर समन्वय से परियोजनाओं की गति तेज होगी और लागत में अनावश्यक वृद्धि भी रोकी जा सकेगी।
बैठक में मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि प्रत्येक बड़ी परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा उसकी प्रगति की समीक्षा उच्च स्तर पर लगातार होती रहे। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आधुनिक तकनीक, डिजिटल मॉनिटरिंग तथा पारदर्शी कार्यप्रणाली अपनाकर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश में संतुलित और समावेशी विकास को गति देना है। इसके लिए सड़क, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, ऊर्जा तथा नगरीय एवं ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि विकास कार्यों की प्रगति केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका प्रत्यक्ष लाभ आम नागरिकों को दिखाई देना चाहिए। प्रत्येक विभाग यह सुनिश्चित करे कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे।
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने दोहराया कि प्रदेश सरकार विकास कार्यों को तेज गति से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की नियमित समीक्षा कर बाधाओं का तत्काल समाधान किया जाए तथा जनहित से जुड़े कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कर प्रदेश के समग्र विकास को नई गति प्रदान की जाए।








