
नई दिल्ली। क्षेत्र के समग्र विकास, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने तथा निवेश एवं रोजगार के नए अवसरों के सृजन को लेकर भारत सरकार के केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान से एक महत्वपूर्ण एवं आत्मीय भेंट हुई। इस अवसर पर क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं, औद्योगिक विकास, कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, निवेश को प्रोत्साहन तथा जनकल्याण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें केंद्रीय मंत्री ने सभी विषयों को गंभीरता से सुना और आवश्यक सहयोग एवं सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।
भेंट के दौरान क्षेत्र के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्राथमिकता के साथ रखा गया। चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि कृषि प्रधान क्षेत्रों में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का विस्तार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। इस दिशा में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का अधिकतम लाभ क्षेत्र तक पहुंचाने पर भी विचार किया गया।
बैठक में बताया गया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग केवल कृषि उत्पादों के संरक्षण और मूल्य संवर्धन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक प्रभावी साधन भी है। यदि स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना होती है तो किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने के साथ-साथ परिवहन लागत में कमी आएगी और उत्पादों की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहेगी।
चर्चा के दौरान क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने की संभावनाओं पर भी विस्तार से विचार किया गया। इस संबंध में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, आधारभूत सुविधाओं के विकास, आधुनिक तकनीक के उपयोग तथा निजी निवेश को प्रोत्साहित करने जैसे विषय प्रमुख रहे। यह भी सुझाव दिया गया कि क्षेत्रीय स्तर पर उपलब्ध कृषि उत्पादों के अनुरूप खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्राथमिकता दी जाए, जिससे स्थानीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने चर्चा के दौरान कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था के तेजी से विकसित होते क्षेत्रों में शामिल है। यह क्षेत्र किसानों, उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमियों तथा युवाओं के लिए व्यापक संभावनाएं उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, बेहतर अवसंरचना और निवेश के माध्यम से और अधिक सशक्त बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
बैठक में युवाओं के लिए रोजगार सृजन को भी विशेष महत्व दिया गया। चर्चा में इस बात पर बल दिया गया कि यदि खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का विस्तार होता है तो प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलेगा तथा पलायन की समस्या में भी कमी आएगी।
क्षेत्र की जनसमस्याओं पर चर्चा करते हुए सड़क, बिजली, पानी, परिवहन, भंडारण सुविधाएं, कोल्ड स्टोरेज, कृषि विपणन व्यवस्था तथा अन्य विकास संबंधी विषय भी उठाए गए। केंद्रीय मंत्री ने सभी विषयों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित स्तर पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार सदैव सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य करती है।
भेंट के दौरान कृषि और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि यदि किसानों को आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध हों और उत्पादों का मूल्य संवर्धन स्थानीय स्तर पर किया जाए तो कृषि क्षेत्र की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना, कृषि उत्पादों की बर्बादी कम करना, निर्यात क्षमता बढ़ाना तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। उन्होंने संबंधित योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए समन्वित प्रयासों पर जोर दिया।
बैठक में महिला स्व-सहायता समूहों, लघु एवं सूक्ष्म उद्यमियों तथा ग्रामीण उद्योगों को भी खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जोड़ने पर चर्चा की गई। कहा गया कि यदि स्थानीय स्तर पर महिलाओं और युवाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधा उपलब्ध कराई जाए तो वे भी सफल उद्यमी बन सकते हैं।
निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी विचार किया गया। इसमें औद्योगिक क्षेत्र, बिजली आपूर्ति, परिवहन नेटवर्क, वेयरहाउस, कोल्ड चेन और आधुनिक लॉजिस्टिक सुविधाओं को मजबूत करने जैसे विषय शामिल रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होने से निजी निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और उद्योगों की स्थापना में तेजी आएगी।
चर्चा के दौरान यह भी कहा गया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग कृषि और उद्योग के बीच एक मजबूत कड़ी का कार्य करता है। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलता है, उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध होते हैं और देश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है। इसलिए इस क्षेत्र में निवेश और नवाचार को प्रोत्साहित करना समय की आवश्यकता है।
केंद्रीय मंत्री ने आश्वस्त किया कि बैठक में उठाए गए सभी विषयों पर सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय विकास, किसानों के हित, युवाओं के रोजगार और औद्योगिक प्रगति के लिए केंद्र सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से समन्वय बनाकर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी बल दिया।
बैठक का समापन सकारात्मक वातावरण में हुआ। इस अवसर पर विश्वास व्यक्त किया गया कि केंद्र और राज्य स्तर पर बेहतर समन्वय के माध्यम से क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का विकास तेज होगा, नए निवेश आकर्षित होंगे, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा किसानों और आम नागरिकों को विकास का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
यह भेंट केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं बल्कि क्षेत्र के विकास, कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार, रोजगार सृजन और जनकल्याण के लिए साझा प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उम्मीद जताई गई कि बैठक में हुई सार्थक चर्चा और केंद्रीय मंत्री द्वारा दिए गए सकारात्मक आश्वासन आने वाले समय में विकास योजनाओं को नई गति प्रदान करेंगे तथा क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को मजबूती देंगे।








