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शासकीय हमीदिया स्कूल में ‘नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0’ अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, विद्यार्थियों को नशामुक्त जीवन अपनाने का दिया संदेश

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HQ Report
भोपाल। युवाओं और विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने तथा समाज में नशामुक्ति के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शासकीय हमीदिया स्कूल में “नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” अभियान के अंतर्गत एक व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों की जानकारी देना तथा उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और उपस्थित नागरिकों ने नशामुक्त समाज के निर्माण का सामूहिक संकल्प भी लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत नशामुक्ति के संदेश के साथ हुई, जिसमें विद्यार्थियों को बताया गया कि वर्तमान समय में नशीले पदार्थों का बढ़ता प्रचलन युवाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। विशेषज्ञों ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के शरीर को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि उसका प्रभाव परिवार, समाज और पूरे राष्ट्र पर भी पड़ता है। इसलिए नशे के प्रति जागरूकता और समय रहते उससे दूरी बनाना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों, उनके सेवन के कारण होने वाले दुष्प्रभावों तथा उनसे बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि तंबाकू, शराब, मादक पदार्थ और अन्य नशीले उत्पाद धीरे-धीरे व्यक्ति की शारीरिक क्षमता, मानसिक संतुलन और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। इससे शिक्षा, करियर, सामाजिक संबंध और जीवन की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि किशोरावस्था और युवावस्था जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दौर होता है। इसी समय सही दिशा, सकारात्मक सोच और अच्छे संस्कार भविष्य का निर्माण करते हैं। यदि इस आयु में युवा नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहें तो वे अपने जीवन में बड़ी उपलब्धियां प्राप्त कर सकते हैं और समाज के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि कई बार जिज्ञासा, मित्रों का दबाव, तनाव या गलत संगति के कारण युवा नशे की ओर आकर्षित हो जाते हैं। इसलिए आवश्यक है कि वे आत्मविश्वास बनाए रखें, सही मित्रों का चयन करें, परिवार और शिक्षकों से संवाद बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ से पूरी तरह दूर रहें।
विद्यालय के शिक्षकों ने विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदार, स्वस्थ और जागरूक नागरिक बनना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को खेल, योग, संगीत, साहित्य, विज्ञान और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया ताकि उनका ध्यान सकारात्मक कार्यों की ओर बना रहे।
कार्यक्रम के दौरान नशे के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को भी विस्तार से समझाया गया। बताया गया कि नशीले पदार्थों का सेवन हृदय, फेफड़ों, यकृत, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र सहित शरीर के अनेक अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। लंबे समय तक नशा करने से कई असाध्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है और व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।
वक्ताओं ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति की समस्या नहीं बल्कि सामाजिक चुनौती है। इससे परिवारों में आर्थिक कठिनाइयां, घरेलू विवाद, अपराध और सामाजिक असुरक्षा जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। इसलिए समाज के प्रत्येक वर्ग को नशामुक्ति अभियान में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति नशे की लत से जूझ रहा हो तो उसका उपहास करने के बजाय उसे उचित परामर्श और उपचार के लिए प्रेरित करें। परिवार, मित्र और समाज का सहयोग किसी भी व्यक्ति को नशे की लत से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
“नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” अभियान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह अभियान केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने, स्वस्थ आदतें विकसित करने और समाज में नशामुक्त वातावरण तैयार करने का व्यापक प्रयास है। अभियान के माध्यम से स्कूलों, महाविद्यालयों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं को भी इस जनआंदोलन से जोड़ा जा रहा है।
विद्यार्थियों ने कार्यक्रम के दौरान उत्साहपूर्वक भाग लिया और नशे के विरुद्ध जागरूकता फैलाने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे स्वयं नशे से दूर रहेंगे और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज के अन्य लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगे।
कार्यक्रम में स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर भी विशेष बल दिया गया। विद्यार्थियों को नियमित व्यायाम, योग, संतुलित आहार, खेलकूद, पुस्तक पठन और सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह दी गई। वक्ताओं ने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
विद्यालय प्रशासन ने भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को समय-समय पर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि विद्यालय केवल शिक्षा देने का केंद्र नहीं बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी, आत्मविश्वास और सकारात्मक जीवन मूल्यों का विकास करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित विद्यार्थियों ने नशामुक्त समाज के निर्माण की शपथ ली। उन्होंने संकल्प लिया कि वे किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ का सेवन नहीं करेंगे, दूसरों को भी इससे दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे तथा अपने विद्यालय और समाज में नशामुक्त वातावरण बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
विशेषज्ञों ने कहा कि यदि परिवार, विद्यालय, समाज और प्रशासन मिलकर इस दिशा में निरंतर प्रयास करें तो नशे की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। इसके लिए जागरूकता, परामर्श, समय पर उपचार और सामाजिक सहयोग सभी आवश्यक हैं।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक संदेश के साथ हुआ कि “नशे से दूरी है ज़रूरी” केवल एक अभियान नहीं बल्कि स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध समाज के निर्माण का संकल्प है। सभी उपस्थित लोगों ने यह संदेश अपने-अपने परिवारों और समाज तक पहुंचाने का संकल्प लिया। विश्वास व्यक्त किया गया कि इस प्रकार के जनजागरूकता कार्यक्रम युवाओं को सही दिशा प्रदान करेंगे, उन्हें नशे जैसी बुराइयों से दूर रखेंगे और एक जागरूक, स्वस्थ, सुरक्षित तथा नशामुक्त भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
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