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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की आज की व्यस्तताएं: विकास, सुशासन, निवेश और जनकल्याण को मिली नई गति

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भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आज का दिन प्रशासनिक, विकासात्मक, संगठनात्मक तथा जनहित से जुड़े कार्यक्रमों के नाम रहा। राजधानी भोपाल से लेकर विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठकों, जनप्रतिनिधियों से मुलाकात, निवेश एवं अधोसंरचना विकास संबंधी चर्चाओं तथा शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं की प्रगति की समीक्षा तक दिनभर अनेक महत्वपूर्ण गतिविधियां संपन्न हुईं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक विकास का लाभ पहुंचाना, प्रशासन को अधिक संवेदनशील एवं जवाबदेह बनाना तथा मध्यप्रदेश को निवेश, उद्योग, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है। दिन की शुरुआत विभागीय बैठकों और प्रशासनिक समीक्षा के साथ हुई, जिसमें विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक निर्धारित समय-सीमा में पहुंचे। उन्होंने कहा कि शासन की सफलता केवल योजनाएं बनाने में नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन में निहित है। प्रत्येक विभाग नियमित रूप से अपने कार्यों की समीक्षा करे, लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करे तथा नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराए। बैठकों के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीण एवं शहरी विकास से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के गांवों और शहरों का संतुलित विकास ही आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की आधारशिला है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों का विस्तार किया जा रहा है, वहीं शहरों में आधुनिक अधोसंरचना, यातायात व्यवस्था, स्वच्छता, डिजिटल सेवाओं तथा नियोजित शहरी विकास को गति दी जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। मुख्यमंत्री ने निवेश और औद्योगिक विकास को लेकर भी अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण चर्चा की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश आज देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे निवेश गंतव्यों में शामिल है। राज्य की नई औद्योगिक नीतियों, सरल अनुमतियों, बेहतर सड़क एवं रेल संपर्क, पर्याप्त भूमि उपलब्धता, ऊर्जा संसाधनों तथा कुशल मानव संसाधन के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए तथा उद्योगों की स्थापना के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं समयबद्ध रूप से पूरी की जाएं।
मुख्यमंत्री ने शहरी विकास के क्षेत्र में पारदर्शी और सरल प्रशासनिक व्यवस्था पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने भवन निर्माण, नगर नियोजन, सार्वजनिक सुविधाओं और आधारभूत ढांचे के विकास को नई गति देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अधिकतम सेवाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाएं, जिससे पारदर्शिता बढ़े और लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। बैठक में कृषि क्षेत्र की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग, फसल विविधीकरण, कृषि यंत्रीकरण तथा किसानों को समय पर योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कृषि विभाग को निर्देश दिए कि किसान हितैषी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र कृषक तक पहुंचे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नवाचार आधारित कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए। स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रत्येक नागरिक का अधिकार हैं। जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत किया जाए। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, डिजिटल शिक्षण, कौशल विकास तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया। महिला सशक्तिकरण और युवाओं के कौशल विकास को लेकर भी मुख्यमंत्री ने विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्व-सहायता समूहों, स्वरोजगार योजनाओं और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण उपलब्ध कराने तथा उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश भी दिए गए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रशासन की कार्यशैली जनकेंद्रित होनी चाहिए। प्रत्येक अधिकारी नियमित रूप से क्षेत्रीय भ्रमण करे, आम नागरिकों से संवाद स्थापित करे तथा उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं लागू करना नहीं, बल्कि नागरिकों का विश्वास अर्जित करना भी है। इसके लिए संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है। दिनभर मुख्यमंत्री ने विभिन्न जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधिमंडलों से भी मुलाकात की। इन बैठकों में स्थानीय विकास कार्यों, अधोसंरचना परियोजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, सड़क, पेयजल, पर्यटन और औद्योगिक विकास से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए जनहित के विषयों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर कार्य कर रही है। नागरिक सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाओं और समयबद्ध सेवा वितरण प्रणाली के माध्यम से शासन और जनता के बीच की दूरी कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने प्रदेश के समावेशी विकास पर बल देते हुए कहा कि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक समान रूप से पहुंचना चाहिए। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, महिलाओं, युवाओं, किसानों, श्रमिकों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए सरकार निरंतर नई योजनाएं और कार्यक्रम संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और हरित विकास को भी प्रदेश की विकास नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने अधिक से अधिक पौधरोपण, जल स्रोतों के संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। दिनभर की व्यस्तताओं के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि सभी विभाग आगामी लक्ष्यों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करें तथा प्रत्येक योजना की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परियोजना में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा और निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने की संस्कृति विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब सरकार, प्रशासन, जनप्रतिनिधि और नागरिक मिलकर कार्य करेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश में विकास, निवेश, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और अधोसंरचना के क्षेत्रों में चल रहे प्रयास आने वाले समय में मध्यप्रदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे। उन्होंने सभी अधिकारियों से पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और जनसेवा की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया तथा कहा कि सरकार का प्रत्येक निर्णय प्रदेश की जनता के हित और राज्य के सर्वांगीण विकास को केंद्र में रखकर लिया जा रहा है।
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