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रक्षाबंधन पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संदेश, प्रेम और भाईचारे के साथ महिला सुरक्षा व सम्मान का संकल्प लेने का आह्वान

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नई दिल्ली। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए इस पर्व को प्रेम, भाईचारे, पारस्परिक सम्मान और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का पर्व नहीं है, बल्कि यह समाज में एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी, सम्मान और सुरक्षा की भावना को मजबूत करने की प्रेरणा भी देता है। उन्होंने शुभकामना व्यक्त की कि यह पावन पर्व देशवासियों के बीच आपसी प्रेम और भाईचारे को और सुदृढ़ करे तथा समाज में ऐसी सकारात्मक सोच विकसित हो, जिसमें प्रत्येक महिला और बालिका की सुरक्षा, गरिमा एवं सम्मान को सर्वोच्च महत्व दिया जाए। रक्षाबंधन के अवसर पर दिया गया यह संदेश पर्व की पारंपरिक भावना को व्यापक सामाजिक सरोकारों से जोड़ता है। भाई की कलाई पर बहन द्वारा बांधा जाने वाला रक्षा सूत्र प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है, लेकिन बदलते सामाजिक परिवेश में इस भावना का विस्तार पूरे समाज की जिम्मेदारी तक होना आवश्यक है। श्री कोविंद ने इसी व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखते हुए ऐसे समाज के निर्माण का आह्वान किया, जहां महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और समान अवसरों वाला वातावरण प्राप्त हो। रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर मनाया जा रहा है और देशभर में परिवारों के बीच इस पर्व को लेकर उत्साह का वातावरण है।
प्रेम, विश्वास और पारस्परिक सम्मान का संदेश: रक्षाबंधन भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का ऐसा पर्व है, जो भाई-बहन के बीच स्नेह और विश्वास के रिश्ते को विशेष रूप से अभिव्यक्त करता है। बहन द्वारा भाई की कलाई पर राखी बांधने और भाई द्वारा बहन के प्रति स्नेह एवं जिम्मेदारी का भाव व्यक्त करने की परंपरा इस पर्व की मूल भावना को सामने लाती है। समय के साथ रक्षाबंधन का सामाजिक अर्थ भी व्यापक हुआ है और यह परिवार के साथ-साथ समाज में परस्पर सम्मान तथा सहयोग की भावना को मजबूत करने वाला अवसर बन गया है। पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद के संदेश में भी इसी व्यापक भावना को महत्व दिया गया। उन्होंने देशवासियों से ऐसे समाज के निर्माण की दिशा में योगदान देने का आह्वान किया, जहां महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा तथा गरिमा का सदैव सम्मान हो। उनके पूर्व सार्वजनिक रक्षाबंधन संदेशों में भी महिलाओं की सुरक्षा, उनके हितों और कल्याण को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने पर बल दिया गया है। रक्षाबंधन की परंपरा हमें यह संदेश देती है कि रिश्तों की मजबूती केवल रस्मों से नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान, सहयोग और एक-दूसरे के साथ खड़े रहने से होती है। आज जब समाज तेजी से बदल रहा है, ऐसे में पारिवारिक रिश्तों में संवेदनशीलता और सामाजिक जीवन में पारस्परिक सम्मान की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है। इस पर्व का संदेश केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा तक सीमित न रहकर हर नागरिक द्वारा महिलाओं और बालिकाओं के सम्मान, अधिकार और गरिमा की रक्षा की सामूहिक जिम्मेदारी तक पहुंचना चाहिए। यही भावना रक्षाबंधन को एक पारिवारिक त्योहार के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव का महत्वपूर्ण पर्व बनाती है।
महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी: पूर्व राष्ट्रपति के संदेश में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा एवं गरिमा को विशेष महत्व देने की बात कही गई है। यह विषय रक्षाबंधन के व्यापक सामाजिक संदेश से सीधे जुड़ता है। समाज में महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना केवल परिवार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। सार्वजनिक स्थानों, शिक्षण संस्थानों, कार्यस्थलों और परिवहन व्यवस्था सहित प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना आवश्यक है। महिलाओं को भयमुक्त वातावरण मिलने पर वे शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय, प्रशासन, विज्ञान, खेल और सामाजिक नेतृत्व सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का पूरा उपयोग कर सकती हैं। इसी प्रकार बालिकाओं की सुरक्षा और शिक्षा पर विशेष ध्यान देना भविष्य के अधिक समान और सशक्त समाज की नींव तैयार करता है। रक्षाबंधन का रक्षा सूत्र इसी भावना का प्रतीक बन सकता है कि समाज की प्रत्येक महिला और बालिका को सम्मान, सुरक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। देश में रक्षाबंधन के अवसर पर विभिन्न स्तरों पर महिला सुरक्षा और सुविधा से जुड़े संदेश भी सामने आए हैं। इस दृष्टि से पूर्व राष्ट्रपति का संदेश पर्व की पारंपरिक भावना को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ता है और नागरिकों को केवल शुभकामनाएं देने के साथ-साथ सकारात्मक सामाजिक संकल्प लेने की प्रेरणा भी देता है। यदि परिवारों में बच्चों को बचपन से ही समानता, सम्मान, संवाद और जिम्मेदारी के संस्कार दिए जाएं तो आने वाली पीढ़ी अधिक संवेदनशील और सुरक्षित समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
रिश्तों की डोर से सामाजिक एकता तक: रक्षाबंधन का महत्व केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है। यह पर्व परिवारों को एक साथ आने, पुरानी यादों को साझा करने और आपसी संबंधों को मजबूत करने का अवसर देता है। आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच त्योहार लोगों को अपने परिवार और प्रियजनों के साथ समय बिताने का अवसर प्रदान करते हैं। दूर रहने वाले भाई-बहन भी इस अवसर पर एक-दूसरे से संपर्क करते हैं और स्नेह का आदान-प्रदान करते हैं। यही कारण है कि रक्षाबंधन का भावनात्मक महत्व आज भी व्यापक है। समकालीन सामाजिक जीवन में इस पर्व की भावना को और विस्तार देते हुए प्रेम, विश्वास और सम्मान को सामाजिक व्यवहार का हिस्सा बनाना आवश्यक है। परिवार में भाई-बहन के बीच सम्मानजनक संबंध बच्चों के व्यक्तित्व विकास पर भी सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। संवाद, सहयोग, एक-दूसरे की सहायता और कठिन समय में साथ खड़े रहने की भावना रिश्तों को मजबूत बनाती है। रक्षाबंधन इसी आपसी विश्वास को प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त करता है। आज के दौर में जब परिवारों का स्वरूप और सामाजिक जीवन की परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, तब ऐसे त्योहार पारिवारिक जुड़ाव और सांस्कृतिक निरंतरता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रक्षाबंधन की यही व्यापक भावना समाज में भाईचारे, सद्भाव और परस्पर सम्मान को मजबूत करने की दिशा में भी प्रेरणा दे सकती है। पर्व की मूल भावना को व्यापक सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए यह संदेश दिया जा सकता है कि सम्मान और सुरक्षा केवल किसी एक रिश्ते की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक के व्यवहार का हिस्सा होना चाहिए।
महिलाओं के सम्मान से ही मजबूत होगा समाज: रक्षाबंधन के अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति द्वारा महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा एवं गरिमा को महत्व देने का संदेश सामाजिक विकास की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता को सामने लाता है। किसी भी समाज की प्रगति का मूल्यांकन केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि इस बात से भी होता है कि वहां महिलाओं और बालिकाओं को कितना सुरक्षित, सम्मानजनक और समान अवसरों वाला वातावरण प्राप्त है। महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी समाज की समग्र प्रगति से जुड़ी हुई है। इसी प्रकार बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और अपनी प्रतिभा विकसित करने के अवसर देना राष्ट्र के भविष्य में निवेश के समान है। रक्षाबंधन का पर्व हमें रिश्तों में सम्मान और जिम्मेदारी का महत्व समझाता है। इस भावना को व्यापक बनाकर महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार, उनकी स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा तथा उनके विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा सकता है। सामाजिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव भी बड़े परिवर्तन की आधारशिला बन सकते हैं। परिवारों में बेटियों और बेटों के साथ समान व्यवहार, शिक्षा में समान अवसर और निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी जैसी पहल सामाजिक सोच को मजबूत करती हैं। इस दिशा में प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। पूर्व राष्ट्रपति के संदेश का सार भी इसी व्यापक भावना में निहित है कि रक्षाबंधन का अवसर हमें एक ऐसे समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करे, जहां महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा तथा गरिमा को हमेशा प्राथमिकता मिले।
रक्षाबंधन बने सामाजिक संकल्प का पर्व: रक्षाबंधन के पावन अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद का संदेश देशवासियों के लिए शुभकामनाओं के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण संदेश भी प्रस्तुत करता है। उन्होंने पर्व के माध्यम से प्रेम, भाईचारे और पारस्परिक सम्मान की भावना को मजबूत करने तथा महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा एवं गरिमा को प्राथमिकता देने वाले समाज के निर्माण की प्रेरणा दी। रक्षाबंधन का रक्षा सूत्र हमें यह याद दिलाता है कि रिश्तों की वास्तविक मजबूती विश्वास, सम्मान, सहयोग और जिम्मेदारी में होती है। यदि यही भावना परिवार से आगे बढ़कर समाज के प्रत्येक व्यक्ति के व्यवहार का हिस्सा बने तो एक अधिक संवेदनशील, सुरक्षित और समरस समाज का निर्माण किया जा सकता है। रक्षाबंधन पर बहन की कलाई से भाई की कलाई तक पहुंचने वाली स्नेह की डोर केवल एक पारिवारिक परंपरा नहीं, बल्कि प्रेम और जिम्मेदारी का प्रतीक है। इस पर्व पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने परिवार और समाज में महिलाओं तथा बालिकाओं के सम्मान, सुरक्षा और समान अवसरों के प्रति सदैव सजग रहेंगे। देश में भाईचारा, सद्भाव और पारस्परिक सम्मान की भावना मजबूत हो तथा प्रत्येक नागरिक एक-दूसरे के अधिकार और गरिमा का सम्मान करे—यही रक्षाबंधन की व्यापक भावना है। पूर्व राष्ट्रपति ने इसी भावना के साथ सभी देशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं और ऐसे समाज की कल्पना को सामने रखा, जहां हर महिला और बालिका सुरक्षित, सम्मानित और अपने सपनों को पूरा करने के लिए स्वतंत्र वातावरण प्राप्त कर सके।
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