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HQ Report
जबलपुर। भाई-बहन के पवित्र प्रेम, अटूट विश्वास, स्नेह, सम्मान और समर्पण का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व जबलपुर के ओड़िया हाउस में हर्षोल्लास एवं आत्मीय वातावरण के बीच मनाया गया। रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित इस विशेष समारोह में श्रीमती विनीता सिंह यादव की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं, बहनों, भाइयों, परिवारजनों और गणमान्य नागरिकों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रक्षाबंधन पर्व की खुशियां साझा कीं। बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर प्रेम और विश्वास का प्रतीक रक्षा सूत्र बांधा तथा उनके सुखी, स्वस्थ, समृद्ध एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की। भाइयों ने भी अपनी बहनों के प्रति स्नेह, सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लेते हुए उन्हें उपहार भेंट किए। ओड़िया हाउस का वातावरण पूरे दिन पारिवारिक आत्मीयता और उत्सव की उमंग से सराबोर रहा। कार्यक्रम स्थल पर रक्षाबंधन पर्व की पारंपरिक छटा देखते ही बन रही थी। महिलाओं और बहनों ने उत्साहपूर्वक एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं। बच्चों में भी रक्षाबंधन को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। कई परिवारों ने सामूहिक रूप से राखी बांधने की रस्म पूरी की और मिठाई खिलाकर एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। इस दौरान कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, परंपरा और पारिवारिक संस्कारों की सुंदर झलक दिखाई दी। आयोजन में शामिल लोगों ने कहा कि रक्षाबंधन केवल एक धार्मिक या पारंपरिक पर्व नहीं है, बल्कि यह रिश्तों में विश्वास और जिम्मेदारी को मजबूत करने का अवसर भी है। आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच ऐसे पर्व परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे के करीब लाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं। यही कारण है कि ओड़िया हाउस में आयोजित रक्षाबंधन समारोह को लेकर सभी वर्गों में खासा उत्साह दिखाई दिया।

रक्षाबंधन समारोह के दौरान श्रीमती विनीता सिंह यादव ने उपस्थित बहनों और भाइयों को पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा का प्रतीक है, जिसमें रिश्तों की मजबूती, आपसी विश्वास और स्नेह को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि भाई-बहन का रिश्ता जीवन के सबसे सहज, आत्मीय और मजबूत रिश्तों में से एक है। इसमें किसी प्रकार का स्वार्थ नहीं होता, बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहने की भावना होती है। उन्होंने कहा कि राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके साथ जुड़ी भावनाएं बहुत गहरी होती हैं। यह धागा भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में परिवार और समाज में सकारात्मक मूल्यों को मजबूत करना बेहद आवश्यक है और रक्षाबंधन जैसे पर्व इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। श्रीमती यादव ने कहा कि बेटियों और बहनों के सम्मान एवं सुरक्षा के प्रति समाज को हमेशा संवेदनशील रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस समाज में महिलाओं का सम्मान होता है, वही समाज मजबूत और प्रगतिशील बनता है। रक्षाबंधन के अवसर पर भाइयों को केवल बहनों की रक्षा का संकल्प ही नहीं लेना चाहिए, बल्कि उनके अधिकारों, सम्मान, शिक्षा, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता के लिए भी सदैव सहयोगी बनना चाहिए। उन्होंने सभी परिवारों से अपील की कि वे बच्चों को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ें तथा त्योहारों के माध्यम से उनमें प्रेम, भाईचारे, सेवा, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करें। समारोह में उपस्थित महिलाओं ने भी श्रीमती विनीता सिंह यादव के साथ रक्षाबंधन पर्व की खुशियां साझा कीं और उन्हें शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के दौरान सौहार्दपूर्ण वातावरण में एक-दूसरे का स्वागत किया गया तथा सभी ने मिलकर पर्व की खुशियां मनाईं। आयोजन में पारंपरिक भावनाओं के साथ आधुनिक सामाजिक सरोकारों का भी समावेश दिखाई दिया।
ओड़िया हाउस में आयोजित रक्षाबंधन समारोह की सबसे खास बात यह रही कि इसमें परिवार और समाज को जोड़ने वाली भारतीय परंपराओं को प्रमुखता दी गई। कार्यक्रम स्थल पर बहनों के लिए राखी बांधने की विशेष व्यवस्था की गई थी। बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर विभिन्न रंगों और डिजाइनों से सजी राखियां बांधीं। राखी बांधने से पहले भाइयों के माथे पर तिलक लगाया गया और आरती उतारकर उनके मंगलमय जीवन की कामना की गई। इसके बाद मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की खुशियां साझा की गईं। भाइयों ने भी अपनी बहनों को उपहार भेंट किए और जीवन के हर सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहने का संकल्प लिया। समारोह में मौजूद बच्चों ने भी अपने भाई-बहनों को राखियां बांधीं। बच्चों के लिए यह अवसर विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। छोटे-छोटे बच्चों में राखी बांधने और उपहार पाने को लेकर खासा उत्साह देखा गया। कार्यक्रम में शामिल परिवारों ने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व पीढ़ियों को जोड़ने का काम करता है। दादा-दादी और माता-पिता अपने बच्चों को इस पर्व के महत्व के बारे में बताते हैं, जिससे नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति और परंपराओं से परिचित होती है। इस अवसर पर कई लोगों ने अपने पुराने रक्षाबंधन के अनुभव भी साझा किए। किसी ने बचपन की यादों को ताजा किया तो किसी ने दूर रहने वाले भाई या बहन को याद किया। कुछ बहनों ने अपने भाइयों के लिए विशेष रूप से राखियां तैयार की थीं। वहीं भाइयों ने भी अपनी बहनों के लिए उपहार और मिठाइयां लेकर कार्यक्रम में सहभागिता की। आयोजन के दौरान वातावरण में प्रेम और आत्मीयता का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। उपस्थितजनों ने कहा कि रक्षाबंधन ऐसा पर्व है, जो बिना किसी भेदभाव के सभी को रिश्तों की अहमियत समझाता है। यह पर्व बताता है कि जीवन में चाहे कितनी भी व्यस्तता क्यों न हो, परिवार और अपने रिश्तों के लिए समय निकालना जरूरी है। ओड़िया हाउस में आयोजित कार्यक्रम ने इसी संदेश को मजबूती से सामने रखा।









