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राजस्थान में श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन और डिजिटल पहलों की मुख्य श्रम आयुक्त ने की व्यापक समीक्षा

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जयपुर। केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त (Chief Labour Commissioner-Central) सोनल मिश्रा, आईएएस ने राजस्थान के दो दिवसीय दौरे के दौरान केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त संगठन के कामकाज की व्यापक समीक्षा की और प्रदेश में चारों श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन की प्रगति का जायजा लिया। दौरे के दौरान उन्होंने राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, श्रम विभाग के अधिकारियों तथा विभिन्न हितधारकों के साथ विस्तार से चर्चा की। समीक्षा का प्रमुख केंद्र श्रमिकों के हितों की सुरक्षा, श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, औद्योगिक संबंधों को बेहतर बनाने और डिजिटल माध्यमों के जरिए श्रमिक कल्याण योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर रहा। केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त ने राज्य में वेतन संहिता (Code on Wages), औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code), सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security) तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code) से जुड़े नियमों के निर्माण की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों के साथ चर्चा करते हुए श्रम संहिताओं के प्रावधानों को समयबद्ध और प्रभावी तरीके से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना रहा कि श्रम सुधारों का उद्देश्य श्रमिकों के कल्याण और अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ उद्योगों के लिए अनुकूल और सुगम कारोबारी वातावरण तैयार करना भी है। समीक्षा के दौरान श्रमिकों को उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने तथा नियोक्ताओं के लिए अनुपालन व्यवस्था को सरल और प्रभावी बनाने से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। राजस्थान में श्रम क्षेत्र से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा के दौरान केंद्रीय और राज्य स्तर के अधिकारियों के बीच समन्वय को भी महत्वपूर्ण माना गया। दो दिवसीय दौरे के माध्यम से केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त संगठन की ओर से राज्य में श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन की वास्तविक स्थिति को समझने और आगे की आवश्यक दिशा तय करने का प्रयास किया गया। यह दौरा ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब देश में श्रम कानूनों को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।
दौरे के दौरान सोनल मिश्रा ने राजस्थान सरकार के श्रम सचिव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और प्रमुख हितधारकों के साथ विस्तृत बैठकें कीं। बैठकों में चारों श्रम संहिताओं के अंतर्गत राज्य स्तर पर नियम बनाने की स्थिति तथा उनके क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई। वेतन संहिता के माध्यम से मजदूरी से जुड़े प्रावधानों को व्यवस्थित करने, औद्योगिक संबंध संहिता के माध्यम से नियोक्ता और श्रमिकों के बीच औद्योगिक संबंधों को अधिक सुव्यवस्थित करने, सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा अधिकारों को मजबूत करने तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता के माध्यम से कार्यस्थल पर सुरक्षा और बेहतर कार्य परिस्थितियों को सुनिश्चित करने जैसे विषय समीक्षा के केंद्र में रहे। केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त ने इस बात पर जोर दिया कि श्रम संहिताओं का वास्तविक लाभ तभी श्रमिकों तक पहुंच सकेगा, जब इनके प्रावधानों की जानकारी श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों को स्पष्ट रूप से उपलब्ध हो तथा अनुपालन व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित हो। उन्होंने श्रम विभाग और संबंधित अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया। समीक्षा के दौरान श्रमिक कल्याण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने को महत्वपूर्ण बताया गया। सरकार की श्रम नीति का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जिसमें श्रमिकों को उनके वैधानिक अधिकार एवं सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिले और उद्योगों को भी स्पष्ट एवं सुविधाजनक नियामकीय व्यवस्था उपलब्ध हो। इसी संदर्भ में श्रम संहिताओं को लेकर जागरूकता और उनके प्रभावी अनुपालन को महत्वपूर्ण माना गया। राजस्थान जैसे बड़े राज्य में औद्योगिक गतिविधियों और श्रमिकों की संख्या को देखते हुए श्रम संबंधी व्यवस्थाओं का प्रभावी क्रियान्वयन व्यापक महत्व रखता है। केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त की समीक्षा में नियम निर्माण की स्थिति के साथ-साथ उनके व्यवहारिक क्रियान्वयन से जुड़े पहलुओं को समझने का प्रयास किया गया। अधिकारियों से चर्चा के दौरान सामने आई जानकारियों के आधार पर आगे की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर भी विचार किया गया। केंद्र और राज्य सरकार के श्रम विभागों के बीच बेहतर तालमेल से श्रम कानूनों के अनुपालन और श्रमिक हितों से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने में सहायता मिल सकती है। इस बैठक के माध्यम से श्रम प्रशासन को आधुनिक बनाने और श्रमिकों के हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में समन्वित प्रयासों पर जोर दिया गया।
समीक्षा के दौरान डिजिटल श्रम पहलों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त ने मुख्य श्रम आयुक्त संगठन द्वारा संचालित विभिन्न डिजिटल पहलों की प्रगति की जानकारी ली, जिनमें ई-श्रम पोर्टल, यूनिफाइड श्रम सुविधा पोर्टल और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) योजना प्रमुख हैं। इन डिजिटल पहलों का उद्देश्य श्रमिकों तक सरकारी सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभों की पहुंच को अधिक सुगम बनाना तथा श्रम प्रशासन में तकनीक का प्रभावी उपयोग बढ़ाना है। ई-श्रम पोर्टल असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों से संबंधित जानकारी और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण डिजिटल पहल है। वहीं श्रम सुविधा से संबंधित डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से श्रम कानूनों के अनुपालन और संबंधित प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया जाता है। प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना असंगठित क्षेत्र के पात्र श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी पेंशन व्यवस्था से संबंधित पहल है। केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त ने इन डिजिटल व्यवस्थाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए इनके माध्यम से अधिक से अधिक पात्र श्रमिकों को लाभ पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग से श्रम प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने, जानकारी तक पहुंच आसान बनाने और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान एवं सेवाओं की उपलब्धता को बेहतर करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि डिजिटल व्यवस्था के साथ यह भी जरूरी है कि श्रमिकों को इन प्लेटफॉर्म के उपयोग की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। बड़ी संख्या में श्रमिकों के लिए डिजिटल सेवाओं का उपयोग अभी भी जागरूकता और तकनीकी जानकारी से जुड़ा विषय है। इसलिए जागरूकता अभियानों के माध्यम से श्रमिकों और नियोक्ताओं को डिजिटल पहलों से जोड़ना महत्वपूर्ण है। समीक्षा के दौरान राजस्थान में डिजिटल श्रम पहलों की स्थिति को लेकर उपलब्ध प्रगति पर चर्चा की गई और इन्हें अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में आवश्यक प्रयासों पर जोर दिया गया। डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच श्रम प्रशासन में ऑनलाइन सेवाओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। इससे श्रमिकों को अपने अधिकारों, योजनाओं और सेवाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में सुविधा मिल सकती है। वहीं नियोक्ताओं के लिए भी श्रम कानूनों के अनुपालन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में डिजिटल व्यवस्था सहायक हो सकती है।
दौरे के दौरान सोनल मिश्रा ने राजस्थान के विभिन्न औद्योगिक क्लस्टरों का भी दौरा किया और वहां श्रमिकों तथा नियोक्ताओं से सीधे संवाद किया। इस दौरान उन्होंने श्रम संहिताओं और डिजिटल पहलों को लेकर श्रमिकों तथा उद्योग प्रतिनिधियों के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास किया। किसी भी श्रम नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले श्रमिकों और नियोक्ताओं की राय महत्वपूर्ण होती है। औद्योगिक क्षेत्रों में संवाद के दौरान कार्यस्थल से जुड़े अनुभवों, श्रम कानूनों की जानकारी तथा डिजिटल सेवाओं के उपयोग से संबंधित पहलुओं को समझने का अवसर मिला। केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त ने नियोक्ताओं से श्रम संहिताओं के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने और डिजिटल पहलों में सक्रिय भागीदारी करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि श्रमिकों को उनके वैधानिक एवं सामाजिक सुरक्षा संबंधी लाभ समय पर मिलना चाहिए। इसके लिए नियोक्ताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। श्रम कानूनों के अनुपालन से कार्यस्थल पर श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के साथ औद्योगिक संबंधों में स्थिरता और विश्वास को बढ़ावा मिलता है। दूसरी ओर, जब श्रमिकों को उनके अधिकारों और उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी होती है तो वे भी अपने हितों की सुरक्षा के लिए अधिक जागरूक हो सकते हैं। औद्योगिक विकास के लिए श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच सहयोगपूर्ण संबंध आवश्यक होते हैं। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए दौरे के दौरान दोनों पक्षों के विचारों को समझा गया। केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त ने राजस्थान में श्रम संहिताओं और डिजिटल पहलों के संबंध में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया तथा श्रम कानूनों को लेकर श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जागरूकता और प्रभावी अनुपालन दोनों साथ-साथ चलने चाहिए। केवल कानून बनने से श्रमिकों को उनका पूरा लाभ नहीं मिल सकता, बल्कि कानून के प्रावधानों की जानकारी, प्रशासनिक निगरानी और संबंधित पक्षों की जिम्मेदार भागीदारी भी आवश्यक है। औद्योगिक क्षेत्रों के दौरे ने इस प्रक्रिया को जमीनी स्तर पर समझने का अवसर प्रदान किया। श्रमिकों से सीधे संवाद के माध्यम से उनकी अपेक्षाओं और अनुभवों को जानना भी श्रम प्रशासन के लिए उपयोगी माना जाता है। इसी प्रकार नियोक्ताओं से बातचीत के माध्यम से अनुपालन से जुड़े व्यावहारिक पक्षों को समझने में सहायता मिलती है। राजस्थान में श्रम क्षेत्र के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त का यह दौरा केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त संगठन श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के अधीनस्थ कार्यालय है, जो केंद्रीय क्षेत्र में लागू श्रम कानूनों के प्रवर्तन तथा औद्योगिक संबंधों में सामंजस्य स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संगठन श्रमिक कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राजस्थान दौरे के दौरान संगठन के कामकाज की समीक्षा के साथ-साथ श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन और डिजिटल पहलों की स्थिति का जायजा लिया गया। केंद्र सरकार की ओर से श्रमिक कल्याण को बढ़ावा देने और औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर लगातार जोर दिया जाता रहा है। श्रम सुधारों का व्यापक उद्देश्य श्रमिकों के अधिकारों और सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ श्रम प्रशासन को अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनाना है। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने इस क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा की हैं। ई-श्रम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से श्रमिकों से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित करने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसी तरह श्रम सुविधा पोर्टल जैसी व्यवस्थाएं श्रम कानूनों के अनुपालन को अधिक पारदर्शी एवं सुविधाजनक बनाने में सहायक हो सकती हैं। प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन जैसी योजनाओं के माध्यम से पात्र असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। राजस्थान दौरे के दौरान इन पहलों की प्रगति की समीक्षा यह दर्शाती है कि श्रम प्रशासन में डिजिटल माध्यमों की भूमिका को लगातार बढ़ाया जा रहा है। साथ ही श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर समन्वय को भी आवश्यक माना गया। केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त ने राजस्थान सरकार द्वारा श्रम संहिताओं के संबंध में जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों को श्रम संहिताओं के प्रावधानों से परिचित कराने की आवश्यकता पर बल दिया। श्रमिकों के हितों की रक्षा और उद्योगों के विकास के बीच संतुलन बनाना श्रम प्रशासन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए कानूनों का स्पष्ट अनुपालन, प्रभावी निगरानी, डिजिटल सेवाओं का उपयोग और हितधारकों के साथ नियमित संवाद आवश्यक है। राजस्थान में दो दिवसीय समीक्षा दौरे के दौरान इन सभी पहलुओं पर ध्यान दिया गया। केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त का दौरा राज्य में श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में आगे की रणनीति तैयार करने और डिजिटल पहलों को अधिक उपयोगी बनाने में सहायक हो सकता है।
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