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उद्योग से खाद्य, राजस्व, महिला एवं बाल विकास और कौशल विकास तक बदलाव; कई अधिकारियों को नई और अतिरिक्त जिम्मेदारियां

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मध्यप्रदेश में फिर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कई अहम विभागों में बदले चेहरे
भोपाल। मध्यप्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर एक बार फिर बड़ा फेरबदल किया गया है। 5 सितंबर को जारी सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार राज्य के कई महत्वपूर्ण विभागों और मैदानी पदों पर पदस्थ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। इस फेरबदल में जहां कुछ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, वहीं लंबे समय से एक ही पद पर कार्यरत अधिकारियों को भी बदला गया है। इसके अलावा कुछ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर महत्वपूर्ण विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी बढ़ाई गई है। प्रशासनिक फेरबदल का असर उद्योग एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, राजस्व, महिला एवं बाल विकास, श्रम, कौशल विकास तथा आदिवासी विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ा है। आदेश के बाद प्रशासनिक गलियारों में नई पदस्थापनाओं को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। इस फेरबदल में कई अधिकारियों के अनुभव और पूर्व जिम्मेदारियों को देखते हुए नई भूमिका निर्धारित की गई है। कुछ अधिकारियों की जिम्मेदारियां सीमित की गई हैं, जबकि कुछ को पहले से अधिक व्यापक दायित्व सौंपे गए हैं। खासतौर पर उद्योग और एमएसएमई से जुड़े विभागों में हाल के महीनों में हुए बदलावों के बाद अब शीर्ष स्तर पर एक और महत्वपूर्ण परिवर्तन सामने आया है। इसी तरह खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति से जुड़े निगमों के बीच भी जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास किया गया है। प्रशासनिक स्तर पर किए गए इन बदलावों का उद्देश्य विभागीय कार्यों में बेहतर समन्वय, जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण और शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कामकाज को आगे बढ़ाना माना जा रहा है।
अनिल सुचारी को सागर संभाग आयुक्त पद से हटाकर भंडार गृह निगम की जिम्मेदारी। जुलाई 2025 से सागर संभाग के आयुक्त के रूप में कार्य कर रहे अनिल सुचारी को अब मध्यप्रदेश भंडार गृह निगम का प्रबंध संचालक बनाया गया है। सागर संभाग में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने के बाद अब उन्हें भंडारण व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण निगम की कमान सौंपी गई है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति व्यवस्था में भंडारण की भूमिका महत्वपूर्ण होने के कारण नई जिम्मेदारी भी प्रशासनिक दृष्टि से अहम मानी जा रही है। वहीं नवंबर 2024 से उद्योग आयुक्त एवं लघु उद्योग निगम के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी संभाल रहे दिलीप कुमार को सागर संभाग का नया आयुक्त बनाया गया है। दिलीप कुमार सितंबर 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं और सेवानिवृत्ति से पहले उन्हें मैदानी प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। उनके स्थानांतरण के साथ उद्योग एवं एमएसएमई विभाग में शीर्ष स्तर पर चल रहे पुनर्गठन को एक और विस्तार मिला है। पिछले कुछ समय में उद्योग विभाग में कई महत्वपूर्ण बदलाव हो चुके हैं। पहले राघवेंद्र कुमार सिंह को हटाकर मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई को उद्योग नीति एवं निवेश प्रोत्साहन तथा एमएसएमई से संबंधित जिम्मेदारियां दी गई थीं। इसके बाद जॉन किंग्सले को दोनों विभागों का सचिव बनाया गया। अब उद्योग आयुक्त के स्तर पर भी परिवर्तन किया गया है। कुमार पुरुषोत्तम को उद्योग आयुक्त एवं लघु उद्योग निगम के प्रबंध संचालक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इस तरह उद्योग क्षेत्र की प्रशासनिक संरचना में पिछले कुछ समय के दौरान लगातार बदलाव देखने को मिले हैं। नई व्यवस्था में विभागीय समन्वय और निवेश से जुड़े कामों को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण रहेगा।
राजस्व विभाग में भी बड़ा बदलाव, अनुभा श्रीवास्तव और निधि निवेदिता को नई जिम्मेदारियां। मार्च 2024 से प्रमुख राजस्व आयुक्त के पद पर कार्यरत अनुभा श्रीवास्तव को अब सचिव, राजस्व विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। उनके पद और दायित्व में यह परिवर्तन राजस्व प्रशासन के स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग में करीब आठ महीने तक जिम्मेदारी संभालने के बाद निधि निवेदिता को प्रमुख राजस्व आयुक्त एवं आयुक्त भू-अभिलेख बनाया गया है। इससे राजस्व विभाग में प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। राजस्व प्रशासन में भू-अभिलेख, भूमि संबंधी मामलों और विभिन्न राजस्व प्रक्रियाओं का बड़ा महत्व है। ऐसे में नई जिम्मेदारी के साथ निधि निवेदिता के सामने विभागीय कार्यों के प्रभावी संचालन की चुनौती रहेगी। दूसरी ओर अनुभा श्रीवास्तव को सचिव, राजस्व विभाग की जिम्मेदारी दिए जाने से विभाग के शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर भी दायित्वों का नया संयोजन तैयार हुआ है। इस फेरबदल के बीच अधिकारियों की नई पदस्थापनाओं को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं, हालांकि आधिकारिक आदेश में पदस्थापनाओं का आधार प्रशासनिक निर्णय ही है। राजस्व विभाग राज्य के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक विभागों में शामिल है और इसके कामकाज का सीधा संबंध आम नागरिकों से जुड़ी भूमि, अभिलेख, राजस्व प्रकरणों तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं से रहता है। ऐसे में विभाग में हुए बदलावों को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई टीम से राजस्व संबंधी कार्यों में गति और बेहतर समन्वय की अपेक्षा रहेगी।
सतेन्द्र सिंह को दो महत्वपूर्ण कल्याण विभागों की जिम्मेदारी, नेहा मारव्या का दायरा सीमित। नवंबर 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले सतेन्द्र सिंह को पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के साथ अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की भी जिम्मेदारी दी गई है। एक ही अधिकारी को दोनों महत्वपूर्ण सामाजिक कल्याण विभागों की जिम्मेदारी दिए जाने से इन विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने की संभावना है। वहीं नेहा मारव्या के मामले में उनकी पूर्व जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। 13 जुलाई को उन्हें टीएडीपी, टीआरई और MAPSET सहित कई जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, लेकिन अब इनमें से अधिकांश दायित्व वापस लेते हुए उन्हें केवल अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम का प्रबंध संचालक बनाया गया है। कम समय के भीतर जिम्मेदारियों में हुआ यह बदलाव प्रशासनिक स्तर पर उल्लेखनीय माना जा रहा है। विभागीय स्तर पर उनके कार्यक्षेत्र को सीमित किए जाने के बाद अब उनका मुख्य फोकस अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम के कामकाज पर रहेगा। दूसरी ओर आदिवासी विकास से जुड़े विभागों में भी जिम्मेदारियों का पुनर्गठन किया गया है। अब तक आयुक्त जनजातीय कार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे तरुण राठी को आदिवासी विकास से संबंधित कई अतिरिक्त दायित्व सौंपे गए हैं। इससे आदिवासी विभाग से जुड़े विभिन्न कार्यों के बीच बेहतर प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी उनके ऊपर बढ़ गई है। आदिवासी क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन, विभागीय कार्यक्रमों और प्रशासनिक समन्वय के लिहाज से यह जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। नई व्यवस्था में विभागीय स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और विभिन्न इकाइयों के बीच तालमेल पर विशेष ध्यान देना होगा।
खाद्य आपूर्ति और महिला एवं बाल विकास विभाग में भी बदलाव। प्रशासनिक फेरबदल में अनुराग वर्मा की जिम्मेदारियां भी सीमित की गई हैं। अब वे मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक के रूप में काम करेंगे। मध्यप्रदेश भंडार गृह निगम की जिम्मेदारी उनसे वापस लेकर अनिल सुचारी को सौंप दी गई है। इससे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति से जुड़े दोनों प्रमुख निगमों की जिम्मेदारियां अलग-अलग अधिकारियों के पास चली गई हैं। भंडारण और नागरिक आपूर्ति व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय नई व्यवस्था की महत्वपूर्ण आवश्यकता होगी। वहीं लगभग पांच महीने बाद संदीप जीआर को श्रम विभाग से हटाकर महिला एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग राज्य में महिलाओं और बच्चों से संबंधित अनेक योजनाओं और कार्यक्रमों का संचालन करता है। ऐसे में नई जिम्मेदारी प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, मैदानी स्तर पर निगरानी और विभिन्न विभागों के साथ समन्वय पर नई पदस्थापना के बाद विशेष ध्यान देना होगा। दूसरी ओर श्रम विभाग में भी इस बदलाव के बाद नई प्रशासनिक व्यवस्था तैयार होगी। महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े कार्यक्रमों में प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखना और योजनाओं को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ाना नई जिम्मेदारी की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। इस फेरबदल से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार ने एक साथ कई विभागों में अधिकारियों की जिम्मेदारियों को पुनर्व्यवस्थित किया है।
अवि प्रसाद और रघुराज एमआर को नई जिम्मेदारियां, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर भी फोकस। करीब दो वर्ष की मौजूदा पदस्थापना के बाद अवि प्रसाद को मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन का प्रबंध संचालक बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े निगम और विभाग दोनों की जिम्मेदारी मिलने से उनके कार्यक्षेत्र का दायरा महत्वपूर्ण रूप से बढ़ गया है। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित प्रशासनिक और विभागीय कार्यों के बीच समन्वय बनाए रखना उनकी नई भूमिका का अहम हिस्सा होगा। वहीं श्रम विभाग में कार्य कर रहे रघुराज एमआर को तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। कौशल विकास और रोजगार राज्य में युवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। तकनीकी शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार से संबंधित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक रहेगा। नई जिम्मेदारी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब कौशल आधारित शिक्षा और रोजगार के अवसरों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। दूसरी ओर कुमार पुरुषोत्तम को मुख्यमंत्री के अपर सचिव और कृषि विपणन बोर्ड से जुड़ी मौजूदा जिम्मेदारियों के साथ उद्योग आयुक्त एवं लघु उद्योग निगम के प्रबंध संचालक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। यह बदलाव उद्योग एवं एमएसएमई क्षेत्र के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में उद्योग विभाग में राघवेंद्र कुमार सिंह, दिलीप कुमार और अंकित अस्थाना से जुड़े बदलावों तथा नीरज मंडलोई और जॉन किंग्सले की नई जिम्मेदारियों के बाद अब कुमार पुरुषोत्तम को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इससे उद्योग एवं निवेश से जुड़े विभागों में प्रशासनिक स्तर पर नई व्यवस्था और समन्वय की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
फेरबदल में तीन स्तरों पर बदलाव के संकेत, नई टीम से परिणाम की अपेक्षा। 5 सितंबर के प्रशासनिक आदेश को समग्र रूप से देखा जाए तो इसमें एक साथ कई विभागों के अधिकारियों की जिम्मेदारियों का पुनर्निर्धारण किया गया है। लंबे समय से एक ही पद पर कार्यरत अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, कुछ अधिकारियों को उनके अनुभव के अनुरूप महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे गए हैं और कई विभागों में अतिरिक्त प्रभार के माध्यम से प्रशासनिक समन्वय की नई व्यवस्था बनाई गई है। उद्योग एवं एमएसएमई, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, राजस्व, महिला एवं बाल विकास, कौशल विकास, स्वास्थ्य तथा आदिवासी विकास जैसे विभाग इस फेरबदल से सीधे प्रभावित हुए हैं। नई पदस्थापनाओं के बाद अब इन विभागों में अधिकारियों के सामने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय और प्रशासनिक कार्यों को गति देने की जिम्मेदारी होगी। खासतौर पर उद्योग एवं एमएसएमई क्षेत्र में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर बेहतर तालमेल जरूरी रहेगा। इसी तरह राजस्व, खाद्य आपूर्ति, महिला एवं बाल विकास और आदिवासी विकास जैसे विभागों का सीधा संबंध आमजन से है, इसलिए नई पदस्थापनाओं का असर मैदानी स्तर के कामकाज पर भी दिखाई दे सकता है। सरकार की ओर से किए गए इस फेरबदल के बाद अब अधिकारियों की नई जिम्मेदारियों के अनुरूप विभागीय कामकाज की दिशा और गति पर नजर रहेगी। आने वाले समय में इन बदलावों का वास्तविक प्रभाव योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक समन्वय और विभागीय परिणामों के स्तर पर सामने आएगा। कुल मिलाकर ताजा प्रशासनिक फेरबदल ने मध्यप्रदेश की शासन व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारियों का नया संयोजन तैयार किया है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर नई टीम और नई कार्यशैली के साथ कामकाज आगे बढ़ने की संभावना है।
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