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नई दिल्ली में राज्य दिव्यांगजन सलाहकार बोर्ड की सदस्य पूजा गर्ग ने की मुलाकात

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दिव्यांगजनों के उत्थान और सशक्तिकरण से जुड़े प्रयासों पर हुई चर्चा, खेलकूद एवं कौशल गतिविधियों से जोड़ने पर दिया जोर
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश सरकार के राज्य दिव्यांगजन सलाहकार बोर्ड की सदस्य पूजा गर्ग ने नई दिल्ली में मुलाकात कर प्रदेश में दिव्यांगजनों के उत्थान एवं सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। मुलाकात के दौरान दिव्यांगजनों के लिए संचालित योजनाओं, उनकी आवश्यकताओं और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। बातचीत में विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों और युवाओं को उनकी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। उन्हें खेलकूद तथा अन्य कौशल आधारित गतिविधियों से जोड़ने का आग्रह किया गया, ताकि उनकी प्रतिभा को पहचानने और विकसित करने के लिए उन्हें उचित अवसर मिल सकें। दिव्यांगजनों के अधिकारों, पुनर्वास और कल्याण से जुड़े विषयों पर सलाह देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य दिव्यांगजन सलाहकार बोर्ड का गठन किया है। जनवरी 2026 में गठित इस बोर्ड में दिव्यांगता एवं उनके कल्याण के क्षेत्र में कार्य करने वाले विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों को भी सदस्य बनाया गया है, जिसमें पूजा गर्ग का नाम भी शामिल है।
दिव्यांगजनों के लिए योजनाओं और कार्यों की जानकारी साझा की। मुलाकात के दौरान पूजा गर्ग ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण एवं उत्थान के लिए किए जा रहे विशेष कार्यों की जानकारी दी। दिव्यांगजनों के लिए सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ उनके अधिकारों, पुनर्वास और सामाजिक सहभागिता से जुड़े विषयों पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई। दिव्यांगजनों को केवल सहायता उपलब्ध कराने के साथ उन्हें अपनी क्षमता के अनुरूप आत्मनिर्भर और सक्रिय बनाने के अवसर उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है। इस दृष्टि से शिक्षा, प्रशिक्षण, खेल, कौशल विकास और सामाजिक सहभागिता जैसे क्षेत्रों में अवसरों का विस्तार उपयोगी हो सकता है। बातचीत में इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और संभावनाओं को लेकर विचार-विमर्श हुआ। राज्य दिव्यांगजन सलाहकार बोर्ड का उद्देश्य भी दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2017 के अनुरूप दिव्यांगजनों के अधिकारों और संरक्षण से जुड़े विषयों पर सरकार को परामर्श देना है।
दिव्यांग बेटे-बेटियों को खेलकूद से जोड़ने पर जोर। मुलाकात के दौरान विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि दिव्यांग बच्चों और युवाओं को खेलकूद की गतिविधियों से अधिक से अधिक जोड़ा जाए। खेल किसी भी बच्चे के शारीरिक विकास के साथ आत्मविश्वास, अनुशासन, टीम भावना और सामाजिक सहभागिता को बढ़ाने का माध्यम बन सकते हैं। दिव्यांग बच्चों की क्षमताओं और उनकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त खेल गतिविधियों के अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो वे अपनी प्रतिभा को बेहतर तरीके से सामने ला सकते हैं। खेलों के अलावा कला, कंप्यूटर, तकनीकी प्रशिक्षण, रचनात्मक गतिविधियों और अन्य कौशल क्षेत्रों में भी दिव्यांग बच्चों को अवसर देने पर ध्यान दिया जा सकता है। बातचीत में इसी तरह की गतिविधियों के माध्यम से दिव्यांग बेटे-बेटियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया गया। उद्देश्य यह है कि बच्चों को उनकी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए उचित मंच मिले और वे अपनी रुचि के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठा सकें। इस प्रकार खेल एवं कौशल गतिविधियां दिव्यांगजनों के आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने में उपयोगी भूमिका निभा सकती हैं।
कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भरता के अवसर बढ़ाने की पहल। दिव्यांगजनों को कौशल आधारित गतिविधियों से जोड़ना भी चर्चा का महत्वपूर्ण विषय रहा। आज विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी एवं व्यावसायिक कौशल के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। दिव्यांग युवाओं की क्षमता और रुचि के अनुसार प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए तो वे अपने लिए बेहतर अवसर तलाश सकते हैं। कंप्यूटर, डिजिटल तकनीक, कला, हस्तकला, संचार, खेल तथा अन्य व्यावहारिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण उनकी प्रतिभा को सामने लाने में सहायक हो सकता है। इस दिशा में परिवार, शैक्षणिक संस्थानों, प्रशिक्षण संस्थाओं और सामाजिक संगठनों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। मुलाकात में दिव्यांग बच्चों और युवाओं को केवल योजनाओं के लाभार्थी के रूप में देखने के बजाय उनकी प्रतिभा और क्षमता को पहचानकर उन्हें अवसर देने की भावना पर जोर दिया गया। खेलकूद और कौशल गतिविधियों में सहभागिता से उनमें आत्मविश्वास विकसित होने के साथ सामाजिक स्तर पर संवाद और सहभागिता के नए अवसर भी बन सकते हैं। इस प्रकार दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की प्रक्रिया को शिक्षा, कौशल, खेल और सामाजिक सहभागिता के व्यापक दायरे से जोड़ने की आवश्यकता सामने आई।
नीतिगत स्तर पर सुझावों और जमीनी जरूरतों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण। राज्य दिव्यांगजन सलाहकार बोर्ड में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, ताकि दिव्यांगजनों से जुड़े विषयों पर सरकार को आवश्यक परामर्श मिल सके। ऐसे में बोर्ड के सदस्यों द्वारा दिव्यांगजनों की वास्तविक आवश्यकताओं और उनके सामने आने वाली चुनौतियों को सामने रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। नई दिल्ली में हुई इस मुलाकात के दौरान भी दिव्यांगजनों के उत्थान से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई और बच्चों तथा युवाओं को खेल एवं कौशल गतिविधियों से जोड़ने का सुझाव रखा गया। जमीनी स्तर पर काम करने वाले प्रतिनिधियों के अनुभवों से नीतियों और कार्यक्रमों को अधिक उपयोगी बनाने में सहायता मिल सकती है। दिव्यांग बच्चों के परिवारों को भी उनके बच्चों की रुचि और क्षमता के अनुरूप अवसरों की जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है। साथ ही विद्यालयों, प्रशिक्षण केंद्रों और खेल संस्थानों में आवश्यक सुविधाओं और समावेशी वातावरण का विकास भी महत्वपूर्ण रहेगा। इससे दिव्यांग बेटे-बेटियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच मिल सकेगा।
दिव्यांगजनों को अवसर और सम्मान के साथ आगे बढ़ाने का संदेश। नई दिल्ली में हुई मुलाकात का व्यापक उद्देश्य दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध योजनाओं और सुविधाओं के साथ-साथ उन्हें अवसर, प्रशिक्षण और सक्रिय सहभागिता से जोड़ने की दिशा में विचार-विमर्श करना रहा। खेलकूद और कौशल गतिविधियों को दिव्यांग बच्चों एवं युवाओं के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बनाने पर जोर दिया गया। यदि बच्चों को उनकी क्षमता के अनुसार उचित प्रशिक्षण और मंच उपलब्ध कराया जाए तो वे खेल, शिक्षा, कला, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा को सामने ला सकते हैं। राज्य दिव्यांगजन सलाहकार बोर्ड के माध्यम से ऐसे विषयों को नीति स्तर पर सामने रखने का अवसर भी मिलता है। जनवरी 2026 में गठित बोर्ड में पूजा गर्ग सहित दिव्यांगजन कल्याण क्षेत्र से जुड़े अनेक विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों को सदस्य बनाया गया है। आने वाले समय में दिव्यांग बच्चों और युवाओं को खेलकूद, कौशल विकास तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयासों से उनकी सामाजिक सहभागिता और आत्मविश्वास को बढ़ावा मिल सकता है। मुलाकात में इसी भावना के साथ दिव्यांग बेटे-बेटियों के लिए अवसरों का विस्तार करने और उन्हें उनकी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने का मंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
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