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बीएड योग्यताधारी कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों के लिए छह माह के सर्टिफिकेट ब्रिज कोर्स की शुरुआत

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नई दिल्ली। प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता को और मजबूत करने की दिशा में आज बीएड योग्यता के साथ नियुक्त पात्र कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों के लिए छह माह के सर्टिफिकेट ब्रिज कोर्स का शुभारंभ किया गया। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य प्राथमिक स्तर पर कार्यरत ऐसे शिक्षकों को बच्चों की आयु, सीखने की जरूरतों और प्राथमिक शिक्षा की प्रकृति के अनुरूप आवश्यक शिक्षण-पद्धतियों एवं शैक्षणिक दक्षताओं से सुसज्जित करना है। पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के निर्धारित ढांचे के अनुरूप तैयार किया गया है, ताकि शिक्षकों को प्राथमिक स्तर की शिक्षण आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवस्थित प्रशिक्षण मिल सके। प्राथमिक और बुनियादी शिक्षा बच्चों के सर्वांगीण विकास की नींव तैयार करती है। ऐसे में प्राथमिक कक्षाओं में अध्यापन करने वाले शिक्षकों की शैक्षणिक क्षमता, बच्चों को समझने की दक्षता और कक्षा में उपयुक्त शिक्षण विधियों का प्रयोग शिक्षा की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया यह छह माह का ब्रिज कोर्स कार्यरत शिक्षकों के लिए अपने मौजूदा अनुभव को प्राथमिक-स्तरीय शिक्षण की विशेष आवश्यकताओं से जोड़ने का अवसर प्रदान करेगा। पाठ्यक्रम में अकादमिक अध्ययन के साथ-साथ ऑनलाइन संपर्क कक्षाओं और विद्यालय आधारित अनुभव को भी शामिल किया गया है, जिससे प्रशिक्षण केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहकर वास्तविक कक्षा-कक्ष के अनुभवों से भी जुड़ सके। इस पहल के माध्यम से शिक्षकों को प्राथमिक स्तर पर बच्चों के सीखने की प्रक्रिया, उनकी विकासात्मक आवश्यकताओं और कक्षा में प्रभावी सहभागिता को बेहतर ढंग से समझने के लिए आवश्यक शैक्षणिक आधार उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।
छह माह की अवधि वाले इस प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता इसका मिश्रित प्रशिक्षण स्वरूप है, जिसमें अकादमिक अध्ययन, ऑनलाइन संपर्क कक्षाएं तथा 20 दिनों का विद्यालय आधारित अनुभव शामिल किया गया है। ऑनलाइन संपर्क कक्षाओं के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण सामग्री और विशेषज्ञ मार्गदर्शन से जुड़े रह सकेंगे, जबकि विद्यालय आधारित 20 दिनों का अनुभव उन्हें वास्तविक शैक्षणिक वातावरण में अपने प्रशिक्षण को समझने और लागू करने का अवसर देगा। प्राथमिक शिक्षा में केवल विषय का ज्ञान पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि बच्चों की उम्र और विकास के अनुरूप विषय को सरल, सहज तथा प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना भी आवश्यक होता है। इसी कारण पाठ्यक्रम में प्राथमिक चरण की शिक्षण-पद्धतियों से संबंधित दक्षताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बाल-केंद्रित शिक्षण दृष्टिकोण को समझने और अपनाने में सहायता मिलेगी, जिसमें बच्चे को सीखने की प्रक्रिया के केंद्र में रखा जाता है। इसके साथ ही समावेशी शिक्षा की अवधारणा पर भी जोर दिया गया है, ताकि अलग-अलग पृष्ठभूमि, क्षमताओं और सीखने की जरूरतों वाले बच्चों को कक्षा में सीखने के समान अवसर मिल सकें। विकासात्मक रूप से उपयुक्त शिक्षण पद्धतियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को उनकी आयु और सीखने की अवस्था के अनुरूप शैक्षणिक अनुभव प्राप्त हो। विद्यालय आधारित अनुभव इस पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक पक्ष मजबूत करेगा, क्योंकि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिक्षक वास्तविक कक्षा परिस्थितियों को समझते हुए अपने शिक्षण व्यवहार और पद्धतियों का अनुभवात्मक विकास कर सकेंगे। इस प्रकार पाठ्यक्रम में ज्ञान, प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के ढांचे के अनुरूप तैयार किया गया है और इसका क्रियान्वयन राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) के माध्यम से किया जाएगा। NIOS के माध्यम से कार्यक्रम के संचालन से कार्यरत शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण की ऐसी व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है, जिसमें वे अपने सेवाकालीन दायित्वों के साथ प्रशिक्षण प्रक्रिया में भाग ले सकें। प्राथमिक स्तर पर अध्यापन करने वाले शिक्षकों के लिए सतत व्यावसायिक विकास का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों की सीखने की जरूरतों, कक्षा-कक्ष की पद्धतियों और शिक्षण संसाधनों में निरंतर बदलाव होते रहते हैं। ऐसे में सेवाकाल के दौरान शिक्षकों को अपनी शैक्षणिक दक्षताओं को विकसित करने के अवसर मिलना शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में सहायक हो सकता है। छह माह के इस पाठ्यक्रम में अकादमिक अध्ययन और ऑनलाइन संपर्क कक्षाओं के साथ विद्यालय आधारित अनुभव को शामिल करना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त सैद्धांतिक जानकारी को विद्यालय में अनुभव के माध्यम से समझने से शिक्षकों को प्राथमिक कक्षाओं की वास्तविक परिस्थितियों के साथ अपने प्रशिक्षण को जोड़ने का अवसर मिलेगा। बाल-केंद्रित, समावेशी और विकासात्मक रूप से उपयुक्त शिक्षण पद्धतियों पर जोर दिए जाने से पाठ्यक्रम का केंद्र केवल शिक्षक की विषयगत जानकारी बढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों के सीखने के अनुभव को अधिक प्रभावी बनाना भी है। प्राथमिक चरण में बच्चे के साथ संवाद, उसकी जिज्ञासा को समझना, सीखने की गति के अनुरूप शिक्षण करना और विभिन्न प्रकार की सीखने की जरूरतों को ध्यान में रखना शिक्षक की भूमिका का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे प्रशिक्षण से शिक्षकों को इन पहलुओं पर व्यवस्थित रूप से विचार करने और अपने कक्षा-कक्ष अभ्यास को बेहतर बनाने के अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
इस ब्रिज कोर्स का व्यापक उद्देश्य प्राथमिक और आधारभूत चरण में शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत करना है। प्राथमिक स्तर वह चरण है जहां बच्चों में सीखने की बुनियादी आदतें, भाषा और संचार क्षमता, सामाजिक व्यवहार तथा विभिन्न विषयों को समझने की आधारभूत क्षमता विकसित होती है। इस स्तर पर शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं होती, बल्कि बच्चों में सीखने की रुचि विकसित करने, उन्हें प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित करने और उनकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझने से भी जुड़ी होती है। प्रस्तावित प्रशिक्षण इसी व्यापक शिक्षक भूमिका को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक-स्तरीय शैक्षणिक दक्षताओं को मजबूत करने पर केंद्रित है। पाठ्यक्रम में समावेशी दृष्टिकोण को शामिल किए जाने का अर्थ यह है कि कक्षा में मौजूद सभी बच्चों के लिए सीखने का वातावरण अधिक सहभागितापूर्ण और अनुकूल बनाने पर ध्यान दिया जाए। विकासात्मक रूप से उपयुक्त शिक्षण बच्चों की उम्र और मानसिक-विकास की अवस्था को ध्यान में रखकर शिक्षण गतिविधियों को व्यवस्थित करने में सहायता कर सकता है। वहीं विद्यालय आधारित अनुभव शिक्षकों को अपने विद्यालय और विद्यार्थियों की वास्तविक परिस्थितियों को समझने का अवसर देगा। छह माह के इस कार्यक्रम में अकादमिक शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण का संयोजन शिक्षकों को अपने अनुभव के आधार पर नए शैक्षणिक तरीकों को समझने तथा उन्हें प्राथमिक कक्षाओं की जरूरतों से जोड़ने में सहायता कर सकता है। इस पूरी प्रक्रिया का अंतिम उद्देश्य प्राथमिक और आधारभूत स्तर पर बच्चों को बेहतर शिक्षण अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में शिक्षकों की क्षमता को मजबूत करना है।
कार्यक्रम की शुरुआत के साथ कार्यरत पात्र प्राथमिक शिक्षकों के लिए अपने शिक्षण कौशल को प्राथमिक स्तर की विशेष शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने का एक औपचारिक अवसर उपलब्ध हुआ है। बीएड योग्यता के साथ सेवा में आए पात्र प्राथमिक शिक्षकों को छह माह के इस प्रमाणपत्र ब्रिज कोर्स के माध्यम से प्राथमिक चरण की शिक्षण-पद्धतियों से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के ढांचे के अनुरूप तैयार पाठ्यक्रम और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के माध्यम से इसके क्रियान्वयन की व्यवस्था कार्यक्रम को व्यवस्थित स्वरूप प्रदान करती है। अकादमिक अध्ययन, ऑनलाइन संपर्क कक्षाओं और 20 दिनों के विद्यालय आधारित अनुभव को एक साथ शामिल किए जाने से प्रशिक्षण के सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक दोनों पक्षों को स्थान दिया गया है। बाल-केंद्रित, समावेशी और विकासात्मक रूप से उपयुक्त शिक्षण पद्धतियों पर जोर देकर कार्यक्रम का लक्ष्य प्राथमिक और आधारभूत चरण में शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत करना है। आने वाले समय में इस प्रकार के प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभवों को शिक्षक अपने विद्यालयी संदर्भ में किस प्रकार लागू करते हैं, यह प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर इसके प्रभाव को समझने का महत्वपूर्ण आधार होगा। फिलहाल छह माह के इस ब्रिज कोर्स की शुरुआत प्राथमिक शिक्षकों के सेवाकालीन प्रशिक्षण को प्राथमिक-स्तरीय शिक्षण की आवश्यकताओं के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई है।
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