
भोपाल/रीवा। मध्यप्रदेश की प्राकृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विविधता को युवाओं से जोड़ने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “माँ तुझे सलाम” कार्यक्रम के तहत भोपाल संभाग के युवाओं का दल रीवा जिले के भ्रमण के लिए रवाना किया गया। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने युवाओं के दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। दो दिवसीय भ्रमण के दौरान युवा रीवा जिले के प्रमुख धार्मिक, पर्यटन एवं प्राकृतिक स्थलों का अवलोकन करेंगे। भ्रमण कार्यक्रम में महामृत्युंजय मंदिर, संग्रहालय, मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी, पुरवा प्रपात तथा बसामन मामा गौ-अभयारण्य जैसे महत्वपूर्ण स्थल शामिल हैं। कार्यक्रम का आयोजन खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा किया गया है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को अपने ही प्रदेश की भौगोलिक विविधता, प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक स्थलों और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण केंद्रों को नजदीक से देखने-समझने का अवसर उपलब्ध कराना है। उप मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि मध्यप्रदेश और विशेष रूप से विंध्य क्षेत्र में पर्यटन के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। रीवा संभाग प्राकृतिक सौंदर्य, वन संपदा, जलप्रपात, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों से समृद्ध है। उन्होंने युवाओं से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों को देखने और उनकी विशेषताओं को समझने की दिशा में ऐसे भ्रमण कार्यक्रमों को उपयोगी बताया। कार्यक्रम में शामिल युवाओं के लिए यह भ्रमण केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें अपने प्रदेश की विविधता, स्थानीय जीवन, प्राकृतिक संसाधनों, धार्मिक परंपराओं और विकास की संभावनाओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर भी प्रदान करेगा। भोपाल संभाग से आए इस दल में भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा और राजगढ़ के युवा शामिल हैं। संभागीय खेल अधिकारी एमके धौलपुरी ने बताया कि युवाओं के दल को दो दिवस तक रीवा जिले के विभिन्न प्रमुख स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इस प्रकार “माँ तुझे सलाम” योजना के माध्यम से युवाओं को प्रदेश के विभिन्न अंचलों से जोड़ने और उनके बीच राज्य की विविध सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत के प्रति परिचय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में नगर निगम अध्यक्ष श्री व्यंकटेश पाण्डेय, राजगोपाल मिश्रचारी, अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा युवा उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान युवाओं में भ्रमण को लेकर उत्साह भी दिखाई दिया और उन्हें रीवा के विभिन्न पर्यटन स्थलों को करीब से देखने का अवसर मिलने की जानकारी दी गई।
उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश में पर्यटन विकास की संभावनाओं का उल्लेख किया और कहा कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी विशिष्ट पहचान है। विंध्य क्षेत्र में प्राकृतिक सौंदर्य के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के अनेक स्थान मौजूद हैं। रीवा संभाग के वन, जलप्रपात और प्राकृतिक क्षेत्र पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं। इसके साथ ही मैहर, चित्रकूट और अमरकंटक जैसे धार्मिक स्थल प्रदेश की व्यापक धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश में स्थित विभिन्न वन्यजीव और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का भी उल्लेख किया, जिनमें मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी, पन्ना नेशनल पार्क, संजय टाइगर रिजर्व, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और संजय दुबरी अभयारण्य शामिल हैं। युवाओं के लिए इस प्रकार के भ्रमण का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इससे उन्हें पुस्तकों, समाचारों या डिजिटल माध्यमों में पढ़ी-सुनी जाने वाली जानकारी को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिलता है। किसी क्षेत्र के प्राकृतिक वातावरण, स्थानीय संस्कृति, धार्मिक परंपरा, वन्यजीव संरक्षण, ग्रामीण जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से देखने से प्रदेश के प्रति व्यापक समझ विकसित हो सकती है। रीवा का भ्रमण इस दृष्टि से विशेष महत्व रखता है क्योंकि यहां एक ओर धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत है, वहीं दूसरी ओर जलप्रपात, वन क्षेत्र और वन्यजीव पर्यटन की संभावनाएं भी मौजूद हैं। मुकुंदपुर क्षेत्र की व्हाइट टाइगर सफारी रीवा की विशिष्ट पहचान से जुड़ी है। पुरवा प्रपात प्राकृतिक सौंदर्य का महत्वपूर्ण केंद्र है, जबकि महामृत्युंजय मंदिर धार्मिक आस्था का प्रमुख स्थल है। संग्रहालय क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जानकारी को समझने का माध्यम बनता है। बसामन मामा गौ-अभयारण्य के माध्यम से पशुपालन, गौ संरक्षण और प्राकृतिक खेती से जुड़े प्रयासों को समझने का अवसर भी युवाओं को मिलेगा। इस प्रकार दो दिवसीय भ्रमण में धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीव, इतिहास, संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि से जुड़े विभिन्न पहलुओं को एक साथ देखने का अवसर युवाओं को मिलेगा। ऐसे कार्यक्रमों का व्यापक उद्देश्य युवाओं में अपने राज्य के प्रति जानकारी और जुड़ाव बढ़ाना भी है। प्रदेश के अलग-अलग संभागों से आने वाले युवाओं को दूसरे अंचलों का भ्रमण कराने से क्षेत्रीय विविधताओं को समझने और आपसी संवाद को बढ़ाने की संभावना बनती है। विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए यह अनुभव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज पर्यटन और डिजिटल माध्यमों के बीच एक मजबूत संबंध बन चुका है। किसी पर्यटन स्थल को स्वयं देखने, उसके बारे में जानकारी प्राप्त करने और वहां के स्थानीय परिवेश को समझने से युवा उस क्षेत्र के बारे में दूसरों को भी जानकारी दे सकते हैं। इस दृष्टि से “माँ तुझे सलाम” के अंतर्गत कराया जा रहा यह भ्रमण युवाओं के लिए अनुभव आधारित सीख का अवसर भी बन रहा है।
रीवा की कनेक्टिविटी और ऊर्जा क्षेत्र में विकास का उल्लेख करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा को विभिन्न दिशाओं से हाईवे कनेक्टिविटी प्राप्त है और रेलमार्ग से भी यह क्षेत्र जुड़ा हुआ है। उन्होंने हवाई संपर्क का भी उल्लेख करते हुए कहा कि रीवा से प्रमुख शहरों के लिए एटीआर-72 विमान सेवा उपलब्ध है। इससे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएं बनती हैं, क्योंकि किसी पर्यटन क्षेत्र तक पहुंच की सुविधा उसके पर्यटन विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब किसी स्थान तक सड़क, रेल और हवाई मार्ग से पहुंच आसान होती है तो वहां पर्यटन, स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य सेवा क्षेत्रों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ती हैं। उप मुख्यमंत्री ने इस संदर्भ में यह भी कहा कि कई लोग सप्ताहांत में हवाई जहाज से रीवा पहुंचकर आसपास के क्षेत्रों का भ्रमण करते हैं। पर्यटन का विकास केवल किसी एक स्थल की प्रसिद्धि से नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में उपलब्ध सुविधाओं, कनेक्टिविटी, सुरक्षा, स्वच्छता, आवास, परिवहन और स्थानीय गतिविधियों के विकास से जुड़ा होता है। रीवा और विंध्य क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए इस प्रकार के युवा भ्रमण कार्यक्रम स्थानीय पर्यटन स्थलों के बारे में नई पीढ़ी को जानकारी देने का माध्यम बन सकते हैं। इसके साथ ही उप मुख्यमंत्री ने रीवा की ऊर्जा क्षमता का उल्लेख करते हुए 750 मेगावाट की रीवा सौर परियोजना का भी संदर्भ दिया। आधिकारिक रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड के अनुसार रीवा सौर परियोजना की कुल क्षमता 750 मेगावाट है और परियोजना में मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड तथा दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन बिजली खरीदार हैं। परियोजना पूरी तरह 3 जनवरी 2020 को चालू हुई थी। आरयूएमएसएल के अनुसार परियोजना से उत्पादित बिजली का एक हिस्सा दिल्ली मेट्रो को भी उपलब्ध कराया जाता है और सौर ऊर्जा से डीएमआरसी की दिन के समय की ऊर्जा आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत पूरा करने की व्यवस्था परियोजना की विशेषताओं में शामिल है। यह परियोजना रीवा को केवल पर्यटन के संदर्भ में ही नहीं, बल्कि अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण पहचान देती है। इससे युवाओं को यह समझने का अवसर मिलता है कि किसी जिले का विकास केवल शहरों और भवनों के विस्तार से नहीं होता, बल्कि ऊर्जा, परिवहन, पर्यावरण, कृषि, पर्यटन और स्थानीय संसाधनों के समन्वित विकास से भी होता है। रीवा सौर परियोजना के माध्यम से सौर ऊर्जा उत्पादन और बड़े संस्थागत उपभोक्ता तक अक्षय ऊर्जा पहुंचाने की व्यवस्था को भी समझा जा सकता है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार रीवा परियोजना मध्यप्रदेश में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है और इसके माध्यम से दिल्ली मेट्रो को भी सौर ऊर्जा उपलब्ध कराई जा रही है। इस तरह युवाओं के रीवा भ्रमण में पर्यटन स्थलों के साथ-साथ क्षेत्र के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को देखने का अवसर भी जुड़ता है। यदि युवा किसी पर्यटन स्थल के साथ उस क्षेत्र की ऊर्जा परियोजना, कृषि व्यवस्था, पशुपालन, स्थानीय बाजार और परिवहन व्यवस्था को भी समझें तो उनके सामने विकास का अधिक व्यापक चित्र सामने आता है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसे अनुभव युवाओं को अपने आसपास के संसाधनों को नई दृष्टि से देखने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
उप मुख्यमंत्री ने बसामन मामा गौ-अभयारण्य का उल्लेख करते हुए प्राकृतिक खेती और गौपालन को भी ग्रामीण जीवन तथा स्वस्थ भविष्य से जोड़कर देखा। उनके अनुसार यहां नौ हजार से अधिक गौवंश को आश्रय देने के साथ प्राकृतिक खेती का मॉडल भी विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि गौपालन और प्राकृतिक खेती से भावी पीढ़ी के स्वास्थ्य को जोड़कर देखने की आवश्यकता है। उनके वक्तव्य में युवाओं के स्वास्थ्य और विकास के बीच संबंध पर भी जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी स्वस्थ रहेगी तभी विकास के कार्यों का लाभ प्रभावी रूप से उठाया जा सकेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि और पशुपालन की भूमिका को देखते हुए प्राकृतिक खेती जैसे विषयों के प्रति युवाओं की जानकारी बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है। आज खेती के क्षेत्र में केवल उत्पादन बढ़ाना ही चर्चा का विषय नहीं है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग, पशुपालन, स्थानीय खाद्य प्रणाली और पर्यावरण संरक्षण भी महत्वपूर्ण विषय हैं। बसामन मामा गौ-अभयारण्य के भ्रमण के दौरान युवाओं को पशु संरक्षण और ग्रामीण जीवन से जुड़े इन पहलुओं को देखने का अवसर मिलेगा। इस प्रकार यह यात्रा केवल धार्मिक या पर्यटन स्थलों की यात्रा न होकर विभिन्न सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों से परिचय कराने वाली यात्रा के रूप में भी देखी जा सकती है। युवाओं के लिए ऐसे कार्यक्रमों का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि वे प्रदेश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाकर वहां की जीवनशैली और परिस्थितियों को समझते हैं। भोपाल संभाग के युवाओं का रीवा आना इसी संवाद की एक कड़ी है। भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा और राजगढ़ से आने वाले युवाओं को रीवा जिले के धार्मिक, प्राकृतिक और सामाजिक परिवेश से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इसी तरह भविष्य में प्रदेश के अन्य जिलों के युवाओं को भी अलग-अलग अंचलों के भ्रमण से जोड़ने की संभावना पर्यटन और युवा कार्यक्रमों को और व्यापक बना सकती है। पर्यटन के माध्यम से रोजगार के अवसरों का विस्तार भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। किसी क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर स्थानीय परिवहन, होटल, भोजन, हस्तशिल्प, गाइड सेवा, स्थानीय उत्पाद और अन्य छोटे व्यवसायों को भी अवसर मिल सकते हैं। हालांकि इसके लिए पर्यटन स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और व्यवस्थित प्रबंधन का संतुलन आवश्यक होता है। युवाओं को पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराते समय उन्हें इन जिम्मेदारियों से भी परिचित कराया जा सकता है, ताकि भविष्य में वे पर्यटन को केवल मनोरंजन नहीं बल्कि स्थानीय विकास और संरक्षण से जुड़े क्षेत्र के रूप में देखें। रीवा के भ्रमण के दौरान प्राकृतिक स्थलों पर पर्यावरण संरक्षण, धार्मिक स्थलों पर अनुशासन और स्वच्छता, वन्यजीव क्षेत्रों में निर्धारित नियमों का पालन तथा स्थानीय संस्कृति के सम्मान जैसे विषय युवाओं के अनुभव का हिस्सा बन सकते हैं।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने देश के विकास से जुड़े व्यापक लक्ष्य का भी उल्लेख किया और कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित और विश्वगुरु बनाने का संकल्प लिया गया है। उन्होंने युवाओं को इस विकास यात्रा से जोड़ते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी और विशेष रूप से आज की जेन जी पीढ़ी विकास के परिणामों की प्रमुख भागीदार होगी। इस प्रकार के वक्तव्य को कार्यक्रम के संदर्भ में युवाओं को विकास प्रक्रिया से जोड़ने की बात के रूप में देखा गया। युवा किसी भी राज्य की मानव पूंजी का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं और उनकी शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य, रोजगार, नवाचार तथा सामाजिक भागीदारी राज्य के भविष्य को प्रभावित करती है। पर्यटन भ्रमण जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को अपने प्रदेश की वास्तविक परिस्थितियों को देखने का अवसर मिलता है, जो उनकी समझ को व्यापक बना सकता है। मध्यप्रदेश जैसे भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से विविध राज्य में एक जिले के युवा जब दूसरे जिले का भ्रमण करते हैं तो उन्हें यह समझने का अवसर मिलता है कि अलग-अलग क्षेत्रों की समस्याएं, संसाधन, अवसर और जीवनशैली किस प्रकार अलग हो सकती हैं। भोपाल संभाग और रीवा संभाग के बीच यह संपर्क इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित यह भ्रमण युवाओं को पर्यटन से जोड़ने के साथ-साथ प्रदेश की विविधता से परिचित कराने का माध्यम बना है। कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपस्थिति में युवाओं को रवाना किया गया और दो दिवसीय भ्रमण के लिए निर्धारित स्थलों की जानकारी दी गई। महामृत्युंजय मंदिर धार्मिक आस्था का केंद्र है, संग्रहालय इतिहास और संस्कृति की जानकारी उपलब्ध कराता है, व्हाइट टाइगर सफारी वन्यजीव एवं संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, पुरवा प्रपात प्राकृतिक पर्यटन का आकर्षण है और बसामन मामा गौ-अभयारण्य पशु संरक्षण तथा ग्रामीण जीवन से जुड़े पहलुओं को सामने लाता है। इन सभी स्थलों को एक ही भ्रमण कार्यक्रम में शामिल करने से युवाओं को रीवा के विभिन्न आयामों को एक साथ देखने का अवसर मिलेगा। यह यात्रा स्थानीय पर्यटन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ युवाओं में प्रदेश के प्रति जानकारी और जुड़ाव बढ़ाने का माध्यम बन सकती है। पर्यटन स्थलों पर युवाओं की भागीदारी से सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी व्यापक स्तर पर पहुंच सकती है, लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों पर जिम्मेदार पर्यटन के नियमों का पालन किया जाए। पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाना, प्लास्टिक और कचरा न फैलाना, वन्यजीव क्षेत्रों में निर्धारित दूरी और नियमों का पालन करना, धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखना तथा स्थानीय समुदाय का सम्मान करना पर्यटन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। युवा इन आदतों को अपनाकर अपने भ्रमण को अधिक सार्थक बना सकते हैं। इसी प्रकार पर्यटन के विकास में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय गाइड, वाहन चालक, छोटे दुकानदार, होटल संचालक, हस्तशिल्प से जुड़े लोग और अन्य सेवा प्रदाता पर्यटन गतिविधियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े होते हैं। इसलिए पर्यटन विकास को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में युवाओं की जागरूकता उपयोगी हो सकती है।
रीवा भ्रमण के लिए रवाना हुआ भोपाल संभाग का यह युवा दल मध्यप्रदेश की विविधता को समझने की एक पहल का प्रतिनिधित्व करता है। दो दिनों में निर्धारित स्थलों का भ्रमण करते हुए युवा धार्मिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीव, ऊर्जा विकास, ग्रामीण जीवन, पशुपालन और प्राकृतिक खेती जैसे अलग-अलग विषयों से परिचित होंगे। कार्यक्रम में संभागीय खेल अधिकारी एमके धौलपुरी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार दल में भोपाल संभाग के विभिन्न जिलों के युवा शामिल हैं और उन्हें निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दो दिन तक रीवा जिले में भ्रमण कराया जाएगा। यह आयोजन युवाओं को प्रदेश के भीतर यात्रा करने और अपने राज्य को नजदीक से जानने का अवसर उपलब्ध कराता है। मध्यप्रदेश में पर्यटन के विकास की चर्चा के साथ-साथ ऐसे कार्यक्रमों की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि पर्यटन तभी व्यापक रूप से विकसित होता है जब स्थानीय नागरिक और युवा स्वयं अपने क्षेत्र की विशेषताओं से परिचित हों। यदि युवा अपने प्रदेश के धार्मिक स्थलों, जलप्रपातों, वन क्षेत्रों, वन्यजीव अभयारण्यों, संग्रहालयों और ऐतिहासिक स्थलों के बारे में जानकारी रखते हैं तो वे आगे चलकर इन स्थलों के संरक्षण और प्रचार में भी अपनी भूमिका निभा सकते हैं। रीवा के संदर्भ में पर्यटन के साथ ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियां भी जुड़ी हैं। 750 मेगावाट की रीवा सौर परियोजना ने इस क्षेत्र को अक्षय ऊर्जा के मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिया है और आधिकारिक जानकारी के अनुसार इससे दिल्ली मेट्रो को भी सौर ऊर्जा की आपूर्ति होती है। दूसरी ओर मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी, पुरवा प्रपात और अन्य प्राकृतिक स्थल रीवा की पर्यटन क्षमता को सामने रखते हैं। बसामन मामा गौ-अभयारण्य ग्रामीण संसाधनों, पशुपालन और प्राकृतिक खेती से जुड़े मॉडल को देखने का अवसर देता है। धार्मिक दृष्टि से महामृत्युंजय मंदिर तथा व्यापक विंध्य क्षेत्र में मैहर, चित्रकूट और अमरकंटक जैसे स्थल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े हैं। इन विभिन्न आयामों को एक साथ देखने से युवाओं के सामने मध्यप्रदेश की विकास यात्रा का एक बहुआयामी स्वरूप सामने आता है। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और युवाओं की भागीदारी के साथ यह भ्रमण शुरू हुआ। उप मुख्यमंत्री द्वारा युवाओं को हरी झंडी दिखाकर रवाना किए जाने के साथ दो दिवसीय रीवा यात्रा की शुरुआत हुई। इस यात्रा के दौरान युवाओं से अपेक्षा की जा सकती है कि वे पर्यटन स्थलों की सुंदरता के साथ उनके संरक्षण की आवश्यकता को भी समझें और अपने अनुभवों को अपने साथियों तथा समाज तक पहुंचाएं। पर्यटन, पर्यावरण, संस्कृति और विकास के बीच संतुलन बनाकर ही किसी क्षेत्र को लंबे समय तक आकर्षक और उपयोगी पर्यटन केंद्र बनाया जा सकता है। युवाओं की भागीदारी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकती है। “माँ तुझे सलाम” योजना के अंतर्गत आयोजित यह भ्रमण कार्यक्रम इसी व्यापक उद्देश्य से जुड़ा दिखाई देता है, जिसमें प्रदेश के युवाओं को प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से परिचित कराने, पर्यटन स्थलों का अनुभव कराने और राज्य की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक संपदा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया है। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मध्यप्रदेश और विंध्य में पर्यटन विकास की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए युवाओं के इस भ्रमण को रवाना किया और रीवा जिले के विभिन्न स्थलों की विशेषताओं से परिचित कराया। अब भोपाल संभाग से आए युवाओं का यह दल रीवा की धार्मिक, प्राकृतिक, ऐतिहासिक और ग्रामीण विरासत को करीब से देखेगा, जिसके माध्यम से उनके लिए यह यात्रा प्रदेश को नए नजरिये से समझने का अवसर बनेगी।









