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राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2026 का आयोजन 1 से 7 अक्टूबर तक, ‘जुड़े आवास, वन्यजीव का विकास’ थीम पर होंगी विविध गतिविधियां

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भोपाल। वन्यजीवों के संरक्षण, प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और समाज में वन्यजीवों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश में राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2026 का आयोजन 1 से 7 अक्टूबर तक किया जाएगा। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान एवं जू, भोपाल में आयोजित होने वाले इस सप्ताह की इस वर्ष की थीम “जुड़े आवास, वन्यजीव का विकास” रखी गई है, जिसका अंग्रेजी रूप “Connecting Habitats, Thriving Wildlife” है। सप्ताह के दौरान वन्यजीव संरक्षण को केवल वन विभाग अथवा वन्यजीव विशेषज्ञों तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों, युवाओं, प्रकृति प्रेमियों, परिवारों और आम नागरिकों को इससे जोड़ने के लिए विभिन्न गतिविधियों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। पोस्टर के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत 1 अक्टूबर को राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2026 के शुभारंभ के साथ होगी। इसी दिन पेंटिंग प्रतियोगिता, “एक फोटो एक कहानी” जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी तथा वाइल्ड लाइफ पासपोर्ट की शुरुआत भी की जाएगी। वन्यजीव सप्ताह का उद्देश्य लोगों को जंगलों, वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों के महत्व से परिचित कराने के साथ यह समझ विकसित करना है कि वन्यजीव संरक्षण केवल किसी एक प्रजाति की सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन से जुड़ा हुआ है। प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहेंगे तो वन्यजीवों को भोजन, पानी, प्रजनन और विचरण के लिए आवश्यक परिस्थितियां मिलेंगी। इसी विचार को इस वर्ष की थीम में प्रमुखता दी गई है। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान एवं जू, भोपाल को आयोजन का प्रमुख स्थल बनाया गया है, जहां पूरे सप्ताह प्रकृति एवं वन्यजीवों से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को संरक्षण के संदेश से जोड़ा जाएगा। इस आयोजन में प्रतियोगिताओं के साथ शैक्षणिक एवं जागरूकता आधारित कार्यक्रम भी रखे गए हैं, ताकि वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता को सामाजिक व्यवहार का हिस्सा बनाया जा सके।
1 अक्टूबर से शुरू होगी गतिविधियों की श्रृंखला, वाइल्ड लाइफ पासपोर्ट बनेगा आकर्षण का केंद्र। वन्यजीव सप्ताह के पहले दिन विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागियों को प्रकृति और वन्यजीवों से जोड़ने वाली गतिविधियों की शुरुआत होगी। पेंटिंग प्रतियोगिता के माध्यम से प्रतिभागियों को वन्यजीवों, जंगलों और प्रकृति से जुड़े विषयों को अपनी रचनात्मकता के माध्यम से प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही “एक फोटो एक कहानी” गतिविधि के माध्यम से किसी वन्यजीव अथवा प्रकृति से जुड़े दृश्य को कहानी के रूप में प्रस्तुत करने की पहल की जाएगी। इस तरह की गतिविधियां बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति जिज्ञासा और संवेदनशीलता विकसित करने में सहायक हो सकती हैं। इसी दिन वाइल्ड लाइफ पासपोर्ट की शुरुआत की जाएगी, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को पूरे सप्ताह आयोजित होने वाली गतिविधियों से जोड़ने की परिकल्पना की गई है। 2 अक्टूबर को पक्षी अवलोकन, एमी के लिए सूचनात्मक कार्यशाला एवं प्रतियोगिता, स्टोन पेंटिंग/वुड टाइल पेंटिंग प्रतियोगिता, कहानी प्रतियोगिता और वन्यजीत खोजकर्ता जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। पक्षी अवलोकन के माध्यम से प्रतिभागियों को स्थानीय पक्षियों की पहचान, उनके व्यवहार और प्राकृतिक आवास के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। वहीं पत्थर और लकड़ी की टाइल पर पेंटिंग जैसी रचनात्मक प्रतियोगिताएं प्रकृति और कला के बीच संबंध को सामने लाएंगी। कहानी प्रतियोगिता के माध्यम से वन्यजीवों से जुड़ी कल्पना, अनुभव और संरक्षण संदेश को शब्दों में व्यक्त करने का अवसर मिलेगा। वन्यजीव सप्ताह में प्रतियोगिताओं की यह श्रृंखला केवल पुरस्कार अथवा प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इनके माध्यम से प्रतिभागियों को वन्यजीवों के बारे में जानकारी प्राप्त करने और प्रकृति को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर भी मिलेगा। बच्चों और युवाओं को शुरुआत से ही वन्यजीव संरक्षण से जोड़ना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी इन्हीं पीढ़ियों के हाथों में होगी। इस दृष्टि से आयोजन की गतिविधियों को रचनात्मक, शैक्षणिक और सहभागितापूर्ण स्वरूप दिया गया है।
3 और 4 अक्टूबर को प्रकृति की आवाज से लेकर फैमिली वाइल्ड लाइफ डे तक आयोजन। वन्यजीव सप्ताह के तीसरे दिन 3 अक्टूबर को “वन विहार की आवाजें”, “स्टेप्ड फॉर वाइल्ड लाइफ” तथा युवा संसद जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। “वन विहार की आवाजें” के माध्यम से प्रतिभागियों को जंगल में मौजूद विभिन्न प्राकृतिक ध्वनियों, पक्षियों की आवाजों और वन्यजीवों की गतिविधियों को समझने का अवसर मिल सकता है। जंगल को केवल पेड़-पौधों और जानवरों के समूह के रूप में नहीं, बल्कि अनेक प्रकार की आवाजों, गतिविधियों और प्राकृतिक प्रक्रियाओं से बने जीवंत तंत्र के रूप में समझना वन्यजीव शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। युवा संसद जैसी गतिविधि युवाओं को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर विचार व्यक्त करने का मंच प्रदान करेगी। इसके बाद 4 अक्टूबर को फैमिली वाइल्ड लाइफ डे, मेहंदी प्रतियोगिता और पाम पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन प्रस्तावित है। फैमिली वाइल्ड लाइफ डे के माध्यम से परिवारों को एक साथ प्रकृति और वन्यजीवों से जोड़ने की कोशिश की जाएगी। वन्यजीव संरक्षण को यदि परिवार और समाज के दैनिक जीवन से जोड़ा जाए तो बच्चों में प्रकृति के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिल सकती है। मेहंदी और पाम पेंटिंग जैसी गतिविधियां पारंपरिक एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति को वन्यजीव विषयों से जोड़ने का अवसर देंगी। इस प्रकार वन्यजीव सप्ताह में केवल पारंपरिक व्याख्यान या जागरूकता कार्यक्रमों पर निर्भर रहने के बजाय कला, कहानी, पक्षी अवलोकन, परिवार आधारित गतिविधि और युवाओं की सहभागिता जैसे विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। आयोजन का यह स्वरूप वन्यजीव संरक्षण को जनसामान्य के बीच सहज और रुचिकर तरीके से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। खासकर बच्चों के लिए जब वन्यजीवों से जुड़ी जानकारी खेल, कला, कहानी और प्रत्यक्ष अवलोकन के माध्यम से उपलब्ध होती है तो उनके भीतर प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव विकसित होने की संभावना बढ़ती है। इसी सामाजिक सहभागिता को वन्यजीव सप्ताह का महत्वपूर्ण उद्देश्य माना जा सकता है।
5 अक्टूबर को प्रकृति पथ, वाइल्ड लाइफ मूट कोर्ट और रंगोली प्रतियोगिता से बढ़ेगा जागरूकता का दायरा। वन्यजीव सप्ताह के पांचवें दिन 5 अक्टूबर को “अदृश्यों से मिलिए – प्रकृति पथ पर”, वाइल्ड लाइफ मूट कोर्ट तथा रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। “अदृश्यों से मिलिए” जैसी गतिविधि के माध्यम से उन छोटे जीवों, वनस्पतियों, कीटों और प्रकृति के ऐसे घटकों को समझने का अवसर मिल सकता है, जो सामान्यतः लोगों की नजरों से अनदेखे रह जाते हैं, लेकिन पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। प्रकृति में प्रत्येक जीव और प्रत्येक प्राकृतिक घटक की अपनी भूमिका होती है। किसी एक प्रजाति या आवास में होने वाला बदलाव दूसरे जीवों को भी प्रभावित कर सकता है। इसी परस्पर निर्भरता को इस वर्ष की “जुड़े आवास, वन्यजीव का विकास” थीम से जोड़कर समझा जा सकता है। वाइल्ड लाइफ मूट कोर्ट जैसी गतिविधि वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कानूनों, अधिकारों, जिम्मेदारियों और संरक्षण संबंधी मुद्दों को रोचक एवं संवादात्मक तरीके से समझने का अवसर देगी। इसके माध्यम से प्रतिभागी वन्यजीव अपराध, संरक्षण की आवश्यकता और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी जैसे विषयों पर विचार कर सकते हैं। वहीं रंगोली प्रतियोगिता में वन्यजीव एवं प्रकृति से संबंधित विषयों को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। 6 अक्टूबर को “वन अधिकारी की भूमिका में एक कदम” गतिविधि विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए रखी गई है। इसके साथ ही महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए “एक दिन वन्यजीव बचावकर्ता के रूप में” तथा वॉक-थ्रू क्विज जैसी गतिविधियां भी होंगी। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कार्यों को करीब से समझने का अवसर देना है। वन अधिकारी की भूमिका से जुड़ी गतिविधि विद्यार्थियों को संरक्षण व्यवस्था की जिम्मेदारियों से परिचित करा सकती है, जबकि वन्यजीव बचावकर्ता के रूप में एक दिन जैसी गतिविधि वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और आपात परिस्थितियों में उनके संरक्षण के महत्व को समझने का माध्यम बनेगी। क्विज के माध्यम से प्रतिभागियों के वन्यजीव ज्ञान को रोचक तरीके से सामने लाया जाएगा। इस प्रकार आयोजन का यह चरण विद्यार्थियों को जागरूक दर्शक के बजाय संरक्षण प्रक्रिया में विचारशील सहभागी बनाने पर केंद्रित दिखाई देता है।
7 अक्टूबर को टोडलर पाप प्रतियोगिता, फेस पेंटिंग और समापन समारोह के साथ होगा वन्यजीव सप्ताह का समापन। वन्यजीव सप्ताह के अंतिम दिन 7 अक्टूबर को टोडलर पाप प्रतियोगिता, फेस पेंटिंग प्रतियोगिता और समापन समारोह आयोजित किया जाएगा। छोटे बच्चों को वन्यजीव और प्रकृति से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित गतिविधियां उन्हें कम उम्र में ही पर्यावरण एवं वन्यजीवों के प्रति सहज परिचय प्रदान कर सकती हैं। फेस पेंटिंग प्रतियोगिता में प्रतिभागी वन्यजीवों और प्रकृति से प्रेरित विभिन्न रूपों को कलात्मक ढंग से प्रस्तुत कर सकेंगे। पूरे सप्ताह आयोजित गतिविधियों के बाद समापन समारोह में प्रतिभागियों की सहभागिता, प्रतियोगिताओं और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संदेशों को रेखांकित किया जाएगा। सात दिनों तक चलने वाली गतिविधियों का व्यापक स्वरूप यह दर्शाता है कि वन्यजीव संरक्षण को केवल जंगलों तक सीमित विषय नहीं माना गया है, बल्कि इसे विद्यालयों, महाविद्यालयों, परिवारों, युवाओं और आम नागरिकों से जोड़ने की कोशिश की गई है। वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों का संरक्षण इस पूरे प्रयास का मूल आधार है। जब जंगल खंडित होते हैं, जल स्रोत प्रभावित होते हैं या वन्यजीवों के प्राकृतिक विचरण क्षेत्र में मानवीय दबाव बढ़ता है, तो इसका प्रभाव वन्यजीवों के साथ पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है। इसलिए “जुड़े आवास, वन्यजीव का विकास” जैसी थीम लोगों को इस व्यापक संबंध को समझने का संदेश देती है। वन्यजीव सप्ताह का आयोजन लोगों को यह समझने का अवसर देता है कि वन्यजीवों की रक्षा केवल वन क्षेत्रों में गश्त या संरक्षण गतिविधियों तक सीमित नहीं है। इसमें समाज की जागरूकता, जिम्मेदार पर्यटन, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, वन क्षेत्रों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और वन्यजीवों के आवासों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। सात दिनों की प्रतियोगिताओं और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से इसी सोच को जनसामान्य तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
वन्यजीव संरक्षण के साथ प्रकृति और समाज के बीच संबंध मजबूत करने का संदेश। राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2026 का आयोजन भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान एवं जू में किया जा रहा है और पूरे सप्ताह की गतिविधियां अलग-अलग आयु वर्ग तथा रुचि के अनुसार तैयार की गई हैं। पोस्टर के अनुसार आयोजन में मध्यप्रदेश शासन, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, एमपीटीएफएस और एमपी ईको टूरिज्म से जुड़े संस्थागत सहयोग एवं पहचान को प्रदर्शित किया गया है। वन्यजीव सप्ताह का यह आयोजन लोगों को वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ प्राकृतिक आवासों की महत्ता समझाने का अवसर प्रदान करेगा। जंगल में रहने वाला प्रत्येक जीव अपने प्राकृतिक आवास, भोजन, पानी और दूसरे जीवों से जुड़ा होता है। इसलिए किसी एक क्षेत्र की जैव विविधता को सुरक्षित रखने के लिए पूरे आवास तंत्र की सुरक्षा आवश्यक होती है। यही विचार इस वर्ष की थीम के केंद्र में है। वन विहार जैसे शहरी क्षेत्र से जुड़े वन्यजीव परिसर आम नागरिकों को वन्यजीवों के प्रति जागरूक करने में विशेष भूमिका निभाते हैं, क्योंकि यहां बच्चों और परिवारों को प्रकृति के साथ सीखने का अवसर मिलता है। राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह में पेंटिंग, फोटो-कहानी, पक्षी अवलोकन, स्टोन और वुड टाइल पेंटिंग, कहानी लेखन, युवा संसद, फैमिली वाइल्ड लाइफ डे, मूट कोर्ट, क्विज, वन अधिकारी की भूमिका, वन्यजीव बचावकर्ता, फेस पेंटिंग और अन्य गतिविधियों का समावेश इसी व्यापक जनभागीदारी की दिशा में कदम है। आयोजन के माध्यम से यह संदेश मजबूत किया जाएगा कि वन्यजीव केवल जंगलों की संपदा नहीं, बल्कि प्राकृतिक संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी सुरक्षा का सीधा संबंध मानव जीवन, जल स्रोतों, जंगलों और पर्यावरणीय संतुलन से है। वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील समाज ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। ऐसे में 1 से 7 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2026 मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने और नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का अवसर बनेगा। “जुड़े आवास, वन्यजीव का विकास” का संदेश इसी व्यापक सोच को सामने लाता है कि प्रकृति का प्रत्येक हिस्सा एक-दूसरे से जुड़ा है और वन्यजीवों का भविष्य उनके सुरक्षित एवं निरंतर प्राकृतिक आवासों से जुड़ा हुआ है।
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