
उज्जैन, 27 सितंबर। प्रदेश में सुगम, सुरक्षित, आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को गति देने की दिशा में रविवार को उज्जैन में महत्वपूर्ण पहल हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्री महाकाल लोक के अन्नक्षेत्र पार्किंग परिसर स्थित शक्ति पथ से पीएम ई-बस सेवा एवं उज्जैन दर्शन सेवा का शुभारंभ किया और बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं भी बस में सफर किया और नई परिवहन व्यवस्था का प्रत्यक्ष अनुभव लिया। शुभारंभ अवसर पर धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण भी दिखाई दिया। वेदपाठी बटुकों द्वारा वेद मंत्रों का वाचन किया गया तथा डमरू वादन के बीच बस सेवा का शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्री महाकालेश्वर को प्रणाम करते हुए कहा कि उज्जैन में विकास की नई सौगातों का क्रम लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग 21 वर्ष पहले राज्य परिवहन निगम की बसें संचालित होती थीं, लेकिन बाद में सार्वजनिक परिवहन बस सेवा बंद हो गई थी और अब उस कमी को दूर करने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य परिवहन निगम की बसों को एक राज्य से दूसरे राज्य तक चलाने के साथ शहरों के भीतर नगरीय स्तर पर भी बस सेवाएं संचालित की जाएंगी। उज्जैन में धार्मिक पर्यटन को ध्यान में रखते हुए 10 बसों की सौगात दिए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन सेवाओं का लाभ श्रद्धालु, पर्यटक और नगरवासी उठा सकेंगे। उज्जैन में ई-बस व्यवस्था शुरू करने की तैयारी पहले से चल रही थी और केंद्र की पीएम ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत शहर के लिए इलेक्ट्रिक बसों को स्वीकृति दी गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों के लिए बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसें स्वीकृत की गई हैं, जिनमें उज्जैन भी शामिल है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक और आधुनिक बनाना है, वहीं इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग से शहरी परिवहन में स्वच्छ ऊर्जा आधारित विकल्प को बढ़ावा मिलने की संभावना है। उज्जैन जैसे धार्मिक एवं पर्यटन शहर के लिए सार्वजनिक परिवहन का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यहां वर्षभर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही रहती है तथा आगामी सिंहस्थ-2028 को देखते हुए शहर की परिवहन व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाना एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
उज्जैन दर्शन सेवा धार्मिक एवं पौराणिक स्थलों को एक ही परिवहन मार्ग से जोड़ेगी। शुभारंभ की गई उज्जैन दर्शन सेवा का निर्धारित मार्ग मेघदूत वन पार्किंग से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख धार्मिक एवं दर्शनीय स्थलों को जोड़ते हुए पुनः मेघदूत वन पार्किंग तक पहुंचता है। निर्धारित रूट में महाकाल लोक, हरसिद्धि मंदिर, क्षिप्रा नदी, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, भर्तृहरि गुफा, गढ़ कालिका माता मंदिर, काल भैरव मंदिर, सिद्धवट मंदिर, अंगारेश्वर मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम, भूखी माता मंदिर, चिंतामण गणेश मंदिर, अष्ट विनायक मंदिर, शनि नवग्रह मंदिर, इस्कॉन मंदिर, बस स्टैंड और उज्जैन रेलवे स्टेशन को जोड़ा गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस दर्शन रूट की लंबाई 27.01 किलोमीटर बताई गई है। इस मार्ग का उद्देश्य अलग-अलग स्थानों तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बार-बार निजी वाहन अथवा अलग परिवहन साधन लेने की आवश्यकता को कम करना है। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार यात्री संबंधित बस स्टॉप पर उतरकर मंदिर अथवा दर्शनीय स्थल का दर्शन कर सकेंगे और दर्शन पूर्ण होने के बाद उसी मार्ग पर चलने वाली अगली उपलब्ध बस से आगे की यात्रा जारी रख सकेंगे। इस प्रकार एक ही टिकट की वैधता अवधि में मार्ग के अलग-अलग पड़ावों से बस में चढ़ने और उतरने की सुविधा यात्रियों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था बताई गई है। प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के निकट निर्धारित बस स्टॉप बनाए जाने से यात्रियों के लिए आवागमन अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है। उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, महाकाल लोक, हरसिद्धि मंदिर, काल भैरव, मंगलनाथ, सांदीपनि आश्रम और चिंतामण गणेश जैसे स्थलों का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व है। महाकाल लोक का पहला चरण 2022 में राष्ट्र को समर्पित किया गया था और परियोजना का उद्देश्य तीर्थयात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ क्षेत्र में भीड़ प्रबंधन तथा विरासत संरचनाओं के संरक्षण को बेहतर बनाना था। ऐसे में उज्जैन दर्शन सेवा धार्मिक स्थलों के बीच परिवहन कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली व्यवस्था के रूप में सामने आती है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड को दर्शन मार्ग से जोड़ना विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, क्योंकि इससे शहर में पहुंचने के बाद प्रमुख स्थलों तक जाने के लिए अलग-अलग परिवहन साधन तलाशने की आवश्यकता कम होगी।
₹200 के निर्धारित शुल्क और डिजिटल भुगतान की सुविधा, जीरो-एमिशन ई-बसों से पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा। उज्जैन दर्शन सेवा के लिए दिए गए विवरण के अनुसार यात्रा का शुल्क 200 रुपये निर्धारित किया गया है और भुगतान यूपीआई अथवा डिजिटल माध्यम से किया जा सकेगा। बसों को पूर्ण रूप से इलेक्ट्रिक और जीरो-एमिशन व्यवस्था के रूप में संचालित करने की योजना है। इसका अर्थ है कि संचालन के दौरान पारंपरिक डीजल बसों की तरह सीधे टेलपाइप उत्सर्जन नहीं होगा। इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग व्यवस्था विकसित करना आवश्यक होता है और उज्जैन के लिए स्वीकृत ई-बस व्यवस्था के साथ डिपो तथा चार्जिंग अधोसंरचना विकसित करने की प्रक्रिया भी पहले से चल रही थी। जनवरी 2026 की एक रिपोर्ट में उज्जैन में 100 ई-बसों के लिए मक्सी रोड क्षेत्र में डिपो और चार्जिंग सुविधा विकसित किए जाने की जानकारी दी गई थी। केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा योजना का व्यापक उद्देश्य शहरी सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने के साथ इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से स्वच्छ एवं टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देना है। केंद्र सरकार की जानकारी के अनुसार पीएम ई-बस सेवा के तहत देश में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती की योजना बनाई गई है और भुगतान सुरक्षा तंत्र जैसी व्यवस्थाएं भी योजना का हिस्सा हैं। उज्जैन में इस व्यवस्था का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि धार्मिक पर्यटन के कारण शहर में बड़ी संख्या में वाहन आते-जाते हैं। यदि अधिक यात्री सामूहिक सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हैं तो निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इससे सड़क पर वाहनों का दबाव, पार्किंग की समस्या और परिवहन से संबंधित कुछ स्थानीय चुनौतियों को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है। इलेक्ट्रिक बसों में आधुनिक टिकटिंग और डिजिटल भुगतान व्यवस्था यात्रियों के लिए सुविधा बढ़ा सकती है। इसके अलावा बसों में लाइव सीसीटीवी, जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं यात्री सुरक्षा और संचालन की निगरानी के लिए उपयोगी हो सकती हैं। उज्जैन दर्शन सेवा में डिजिटल असिस्टेंट सह उज्जैन दर्शन गाइड की व्यवस्था भी प्रस्तावित है, जिससे यात्रियों को मार्ग, प्रमुख मंदिरों और दर्शनीय स्थलों से संबंधित जानकारी यात्रा के दौरान उपलब्ध हो सकेगी। इस प्रकार नई सेवा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाली बस व्यवस्था न होकर पर्यटन और सार्वजनिक परिवहन को जोड़ने वाला एक एकीकृत मॉडल बनाने का प्रयास है।
महाकाल से लेकर मंगलनाथ और सांदीपनि आश्रम तक धार्मिक विरासत को एक श्रृंखला में जोड़ेगा दर्शन मार्ग। उज्जैन दर्शन सेवा का विशेष महत्व इसके रूट में शामिल धार्मिक और पौराणिक स्थलों की विविधता के कारण है। भगवान महाकालेश्वर का मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल है और उज्जैन की धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। महाकाल लोक में शिव परंपरा से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को कलात्मक माध्यमों से प्रस्तुत किया गया है। हरसिद्धि मंदिर उज्जैन की प्रमुख धार्मिक स्थली है, जबकि क्षिप्रा नदी के घाट धार्मिक अनुष्ठानों और पर्वों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। भर्तृहरि गुफाएं तपस्या और साधना परंपरा से जुड़ी मानी जाती हैं तथा गढ़ कालिका मंदिर की धार्मिक परंपरा महाकवि कालिदास से जुड़ी मान्यताओं के कारण भी चर्चित है। काल भैरव को उज्जैन की धार्मिक परंपरा में विशेष स्थान प्राप्त है। सिद्धवट पितृ कर्मों से जुड़े प्रमुख तीर्थों में माना जाता है। मंगलनाथ और अंगारेश्वर मंदिर ज्योतिष एवं धार्मिक मान्यताओं से जुड़े हुए हैं। सांदीपनि आश्रम से भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा की शिक्षा से जुड़ी धार्मिक मान्यता है। चिंतामण गणेश, अष्ट विनायक, शनि नवग्रह और इस्कॉन मंदिर भी दर्शन मार्ग के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। इस प्रकार रूट में शामिल स्थलों की प्रकृति अलग-अलग है और एक ही यात्रा में श्रद्धालुओं को उज्जैन की धार्मिक परंपरा के विभिन्न केंद्रों तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है। यात्रा की यह व्यवस्था खासकर उन श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी हो सकती है जो पहली बार उज्जैन आते हैं और शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों के बारे में व्यवस्थित जानकारी चाहते हैं। बस में डिजिटल गाइड की व्यवस्था होने से यात्रियों को संबंधित स्थल के इतिहास, धार्मिक महत्व और मार्ग की जानकारी भी उपलब्ध कराई जा सकती है। हालांकि किसी भी धार्मिक स्थल पर दर्शन का समय भीड़, स्थानीय व्यवस्थाओं और मंदिर प्रशासन के नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए बस सेवा की सुविधा के साथ यात्रियों के लिए समय-सारिणी और स्टॉप की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण होगा। उज्जैन दर्शन मार्ग के माध्यम से धार्मिक पर्यटन को एक व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश शहर की पर्यटन अर्थव्यवस्था और यात्री सुविधा दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
उज्जैन शहर में 12 बस मार्गों का नेटवर्क, आवासीय, व्यावसायिक, शैक्षणिक और धार्मिक क्षेत्रों को जोड़ने की योजना। उज्जैन में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं रखा गया है। दिए गए विवरण के अनुसार शहर में सुगम परिवहन के लिए कुल 12 मार्ग निर्धारित किए गए हैं। इनमें तपोभूमि से पान विहार, उज्जैन रेलवे स्टेशन से कालियादेह महल, कानीपुरा से अभिलाषा कॉलोनी, देवास गेट से तपोभूमि, देवास गेट से ताजपुर, देवास गेट से नए आरटीओ कार्यालय, महाकाल चौराहा से अभिलाषा कॉलोनी, देवास गेट से नानाखेड़ा, अवंतिका विश्वविद्यालय से नानाखेड़ा, देवास गेट से मुरलीपुरा, तपोभूमि से नजरपुर तथा उज्जैन दर्शन मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों के माध्यम से शहर के अलग-अलग हिस्सों को सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने की परिकल्पना की गई है। इससे नगरवासियों को रोजगार, शिक्षा, बाजार, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य आवश्यक स्थानों तक आने-जाने में सुविधा मिल सकती है। उज्जैन में सार्वजनिक परिवहन के विस्तार की आवश्यकता को सिंहस्थ-2028 के संदर्भ में भी देखा जा सकता है। सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शहर में पहुंचने की संभावना रहती है और उस समय यातायात प्रबंधन, पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन तथा अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण विषय होंगे। इलेक्ट्रिक बसों और सुगम परिवहन सेवा का विस्तार नियमित दिनों में नगरवासियों की जरूरत पूरी करने के साथ बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान अतिरिक्त परिवहन क्षमता उपलब्ध कराने में भी सहायक हो सकता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मध्यप्रदेश के कई शहरों में पीएम ई-बस सेवा और मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को विस्तार देने की तैयारी की गई है। उज्जैन के लिए स्वीकृत ई-बस व्यवस्था को इसी व्यापक शहरी परिवहन विस्तार का हिस्सा माना जा रहा है। यदि निर्धारित रूटों पर बसों का संचालन नियमित अंतराल में होता है, टिकटिंग व्यवस्था सरल रहती है और बस स्टॉप यात्रियों के लिए आसानी से उपलब्ध होते हैं तो सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ सकता है। इसके साथ ही बसों की समयपालन व्यवस्था, चार्जिंग व्यवस्था, रखरखाव, रूट मॉनिटरिंग और यात्री सूचना प्रणाली को प्रभावी बनाए रखना सेवा की सफलता के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
मुख्यमंत्री ने स्वयं बस में किया सफर, सिंहस्थ-2028 से पहले परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर। पीएम ई-बस सेवा और उज्जैन दर्शन सेवा के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्वयं बस में सफर करना कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। इससे नई परिवहन व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से देखने और यात्रियों के अनुभव को समझने का अवसर भी मिला। कार्यक्रम में सांसद श्री अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बाल योगी उमेशनाथ जी महाराज, डॉ. लता वानखेड़े, महापौर श्री मुकेश टटवाल, मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष श्री ओम जैन, सिंहस्थ मेला प्राधिकरण समिति के अध्यक्ष श्री जगदीश अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा एडीजी श्री राकेश गुप्ता, डीआईजी श्री नवनीत भसीन, संभागायुक्त श्री आशीष सिंह, कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा, जिला पंचायत सीईओ श्री श्रेयांस कूमट, नगर निगम आयुक्त श्री अभिलाष मिश्रा, स्मार्ट सिटी के सीईओ श्री संदीप सोनी, अधीक्षण यंत्री श्री के.एच. मालवीय सहित अन्य अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। मुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक परिवहन के पुराने अनुभव का उल्लेख करते हुए इसे फिर से मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। उज्जैन के संदर्भ में यह व्यवस्था विशेष महत्व रखती है क्योंकि शहर एक साथ धार्मिक, पर्यटन, शैक्षणिक और आवासीय गतिविधियों का केंद्र है। महाकाल लोक के विकास के बाद उज्जैन में धार्मिक पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है और अब परिवहन कनेक्टिविटी को उसके साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। महाकाल लोक के पहले चरण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2022 को राष्ट्र को समर्पित किया था। अब उज्जैन दर्शन सेवा प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच सार्वजनिक परिवहन आधारित कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की दिशा में अगला कदम है। निर्धारित शुल्क, डिजिटल भुगतान, जीपीएस ट्रैकिंग, सीसीटीवी और इलेक्ट्रिक बस जैसी सुविधाएं सेवा को आधुनिक स्वरूप देने का प्रयास हैं। दूसरी ओर नगर के 12 मार्गों पर सुगम परिवहन सेवा का विस्तार स्थानीय यात्रियों की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। सिंहस्थ-2028 से पहले यदि ये व्यवस्थाएं नियमित, विश्वसनीय और यात्रियों के लिए सहज रूप में संचालित होती हैं तो बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान भी सार्वजनिक परिवहन की भूमिका बढ़ सकती है। इस पूरी व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य श्रद्धालुओं, पर्यटकों और नगरवासियों के लिए आवागमन को अधिक व्यवस्थित बनाना है, ताकि उज्जैन आने वाला व्यक्ति धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन का विकल्प चुन सके और शहर के भीतर यातायात व्यवस्था भी अधिक सुव्यवस्थित रह सके।