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कोल्लम में शी-मार्ट सहित सहकारिता क्षेत्र की विभिन्न पहलों का शुभारंभ, दक्षिण भारत के तीन राज्यों में खुलेंगे 300 आउटलेट

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कोल्लम, केरल। महिलाओं को सहकारिता के माध्यम से आर्थिक अवसरों और बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने केरल के कोल्लम में राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) से संबंधित विभिन्न पहलों का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में सबसे प्रमुख पहल ‘शी-मार्ट’ रही, जिसे महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमियों को सीधे बाजार एवं उपभोक्ताओं से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। कार्यक्रम में घोषित योजना के अनुसार शी-मार्ट को आगे बढ़ाकर केरलम, तमिलनाडु और कर्नाटक में 300 आउटलेट की श्रृंखला के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही NCCF और NAFED की मोबाइल वैन के माध्यम से प्याज, भारत आटा और भारत चावल को किफायती दरों पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी शुरू की गई। कार्यक्रम में किसानों की बेटियों को NAFED कल्याण छात्रवृत्ति योजना के तहत छात्रवृत्ति चेक वितरित किए गए तथा दालों में आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत महिला किसानों को उड़द और चना के बीज किट भी उपलब्ध कराए गए। आधिकारिक जानकारी के अनुसार कोल्लम में आयोजित कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, महिलाओं को उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना और किसानों तथा उपभोक्ताओं तक आवश्यक वस्तुओं की पहुंच को बेहतर बनाना रहा। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने ‘सहकार से समृद्धि’ की अवधारणा के संदर्भ में सहकारी संस्थाओं की भूमिका पर भी बात की। NCCF की आधिकारिक जानकारी के अनुसार संस्था कृषि वस्तुओं की खरीद, उपभोक्ता-केंद्रित खुदरा सेवाओं, बाजार संचालन और आवश्यक वस्तुओं के वितरण सहित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से कृषि-वस्तु पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर काम करती है। कोल्लम में शुरू की गई पहलों को इसी व्यापक सहकारी व्यवस्था के अंतर्गत महिलाओं, किसानों और आम उपभोक्ताओं से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेष रूप से शी-मार्ट की परिकल्पना महिला उद्यमियों के लिए केवल उत्पाद तैयार करने तक सीमित न रहकर उनके लिए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों और छोटे महिला उद्यमों के सामने अक्सर उत्पादन, पैकेजिंग और वित्त के साथ-साथ बाजार तक पहुंच की चुनौती रहती है। ऐसे में खुदरा बिक्री के लिए समर्पित मंच मिलने से महिला समूहों के उत्पादों को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का अवसर बढ़ सकता है। इस पहल का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्धारित आउटलेट किस गति से स्थापित होते हैं, उनमें महिलाओं के उत्पादों की निरंतर उपलब्धता कैसी रहती है और बाजार व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से संचालित होती है।
शी-मार्ट महिलाओं और बाजार के बीच सेतु के रूप में विकसित करने की योजना। कोल्लम कार्यक्रम में शी-मार्ट को महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमियों को बाजार से जोड़ने वाली पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार NCCF और संबंधित सहकारी संस्थाओं के सहयोग से शी-मार्ट की श्रृंखला को तीन दक्षिण भारतीय राज्यों—केरलम, तमिलनाडु और कर्नाटक—में 300 दुकानों तक विस्तार देने की योजना है। इस संबंध में NCCF और भारत लाजना सहकारी समिति के बीच समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान भी कार्यक्रम के दौरान हुआ। इसके अलावा NCCF और सेंट्रल फाइनेंशियल क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट को-ऑपरेटिव के बीच भी सहयोग संबंधी समझौता हुआ। कार्यक्रम में ‘Vanitham She-Mart Shops’ का शुभारंभ किया गया और इन दुकानों के माध्यम से NCCF के ‘Janah’ ब्रांड के उत्पादों तथा भारत आटा और भारत चावल की बिक्री की शुरुआत की गई। महिला उद्यमिता के दृष्टिकोण से शी-मार्ट का महत्व इस बात में है कि किसी उत्पाद का निर्माण या उत्पादन कर लेना ही उद्यम की सफलता के लिए पर्याप्त नहीं होता। उत्पाद को उपभोक्ता तक पहुंचाने के लिए बाजार, वितरण, खुदरा नेटवर्क, प्रचार और बिक्री व्यवस्था की आवश्यकता होती है। ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए इन क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग उपलब्ध होना उनके छोटे कारोबार को व्यापक बाजार से जोड़ सकता है। ऐसी व्यवस्था में स्थानीय खाद्य उत्पाद, हस्तशिल्प, प्रसंस्कृत कृषि उत्पाद, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और अन्य महिला-निर्मित उत्पाद बाजार तक पहुंचने का अवसर पा सकते हैं, हालांकि किन-किन श्रेणियों के उत्पादों को प्रत्येक शी-मार्ट में स्थान मिलेगा, यह संबंधित संचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगा। कार्यक्रम में महिला स्वयं सहायता समूहों को बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने शी-मार्ट को महिलाओं को व्यापार और वाणिज्य से जोड़ने वाली पहल के रूप में रेखांकित किया। महिला आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए बाजार तक पहुंच, वित्तीय सेवाएं, प्रशिक्षण, डिजिटल भुगतान, पैकेजिंग और गुणवत्ता मानकों की जानकारी जैसे घटक भी महत्वपूर्ण होंगे। यदि शी-मार्ट नेटवर्क इन पहलुओं को सहकारी ढांचे के साथ जोड़ पाता है, तो इससे महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों के लिए नियमित बिक्री चैनल मिल सकते हैं। 300 आउटलेट की प्रस्तावित श्रृंखला के कारण इसका प्रभाव केवल एक शहर या जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तीन राज्यों के अलग-अलग क्षेत्रों में महिला उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच नए बाजार संबंध बनाने की संभावना पैदा होगी। इससे सहकारिता आधारित खुदरा व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को भी विस्तार मिल सकता है।
किफायती खाद्य सामग्री की उपलब्धता के लिए NCCF-NAFED मोबाइल वैन की शुरुआत। कार्यक्रम में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के साथ आम उपभोक्ताओं और किसानों से जुड़ी पहल भी शुरू की गई। NCCF और NAFED की मोबाइल वैन के माध्यम से प्याज, भारत आटा और भारत चावल को किफायती कीमतों पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की गई। आधिकारिक जानकारी के अनुसार कार्यक्रम के दौरान मोबाइल वैन को रवाना किया गया और प्याज की बिक्री 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से किए जाने की जानकारी दी गई। मोबाइल वैन आधारित बिक्री व्यवस्था का उद्देश्य खुदरा स्तर पर आवश्यक खाद्य वस्तुओं की पहुंच को बढ़ाना है, विशेषकर उन क्षेत्रों तक जहां स्थायी खुदरा केंद्र हर स्थान पर उपलब्ध नहीं होते। प्याज जैसी आवश्यक खाद्य वस्तु की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है। इसी प्रकार आटा और चावल रोजमर्रा की खाद्य आवश्यकताओं का हिस्सा हैं। इसलिए भारत ब्रांड के माध्यम से इन वस्तुओं की बिक्री को उपभोक्ताओं तक किफायती दरों पर पहुंचाने की व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है। NCCF की आधिकारिक वेबसाइट पर भारत आटा और भारत चावल से संबंधित खरीद एवं वितरण गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि संस्था आवश्यक खाद्य वस्तुओं की खुदरा आपूर्ति से संबंधित कार्य भी कर रही है। मोबाइल वैन का एक लाभ यह भी हो सकता है कि बाजार की मांग और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार वस्तुओं को अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सके। हालांकि किसी भी किफायती बिक्री योजना का प्रभाव वितरण की निरंतरता, उपलब्ध मात्रा, बिक्री केंद्रों की पहुंच और स्थानीय मांग पर निर्भर करता है। कोल्लम कार्यक्रम में इन मोबाइल वैन की शुरुआत को उपभोक्ताओं तक आवश्यक खाद्य सामग्री की पहुंच से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। इसके साथ महिला-उद्यमिता आधारित शी-मार्ट में भी भारत आटा और भारत चावल की बिक्री शुरू करने की घोषणा की गई, जिससे महिलाओं द्वारा संचालित खुदरा केंद्रों को आवश्यक वस्तुओं के वितरण नेटवर्क से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है। सहकारी संस्थाओं के लिए यह व्यवस्था किसानों से प्राप्त कृषि उत्पादों, बाजार और उपभोक्ताओं के बीच एक संगठित आपूर्ति श्रृंखला बनाने का अवसर भी प्रदान करती है। NCCF अपने आधिकारिक विवरण में पारदर्शी खरीद, कृषि वस्तुओं के प्रबंधन, बाजार संचालन और उपभोक्ता-केंद्रित खुदरा सेवाओं को अपनी प्रमुख गतिविधियों में शामिल बताता है। इस दृष्टि से कोल्लम में शुरू की गई मोबाइल वैन और शी-मार्ट व्यवस्था सहकारिता आधारित खुदरा वितरण के दो अलग-अलग लेकिन परस्पर जुड़े माध्यमों के रूप में सामने आती हैं।
किसानों की बेटियों के लिए छात्रवृत्ति और महिला किसानों को बीज किट, परिवारों को शिक्षा और कृषि से जोड़ने की पहल। कोल्लम के कार्यक्रम में किसानों के परिवारों से जुड़ी कल्याणकारी गतिविधियों को भी शामिल किया गया। NAFED कल्याण छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत पंजीकृत किसानों की बेटियों को छात्रवृत्ति चेक वितरित किए गए। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस योजना के तहत लगभग 2,000 परिवारों की बेटियों को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने की बात कही गई। किसान परिवारों की बेटियों की शिक्षा को आर्थिक सहायता से जोड़ना ग्रामीण परिवारों में उच्च शिक्षा और कौशल विकास के अवसरों को समर्थन देने वाला कदम हो सकता है। कृषि परिवारों में शिक्षा का खर्च कई बार परिवार के आर्थिक निर्णयों से सीधे जुड़ा होता है। छात्रवृत्ति जैसी सहायता से पात्र विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में आर्थिक सहयोग मिल सकता है। कार्यक्रम में दालों में आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत महिला किसानों को उड़द और चना के बीज किट वितरित करने की पहल भी शुरू की गई। दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने का संबंध कृषि विविधीकरण और खाद्य सुरक्षा से भी है। महिला किसानों को बीज उपलब्ध कराने से उन्हें कृषि गतिविधियों में प्रत्यक्ष रूप से भागीदारी का अवसर मिलता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका अक्सर खेती, पशुपालन, प्रसंस्करण, बीज संरक्षण और स्वयं सहायता समूहों जैसी विभिन्न गतिविधियों में दिखाई देती है। यदि उन्हें कृषि इनपुट, बाजार और प्रशिक्षण का समुचित सहयोग मिलता है तो उनकी आर्थिक भागीदारी को मजबूत किया जा सकता है। इसी व्यापक संदर्भ में कोल्लम कार्यक्रम में महिला उद्यमिता, महिला कृषि भागीदारी और किसान परिवारों की बेटियों की शिक्षा को एक साथ जोड़ा गया। सहकारिता व्यवस्था के माध्यम से इन पहलों को आगे बढ़ाने का उद्देश्य यह है कि किसान और ग्रामीण परिवार केवल उत्पादन की प्रक्रिया का हिस्सा न रहें, बल्कि बाजार, वितरण और सामाजिक विकास की विभिन्न व्यवस्थाओं से भी जुड़ें। छात्रवृत्ति के साथ बीज किट का वितरण यह दर्शाता है कि कार्यक्रम में शिक्षा और कृषि—दोनों क्षेत्रों को ग्रामीण परिवारों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति से जोड़कर देखा गया। हालांकि इन योजनाओं का लाभ पात्रता मानदंडों और संबंधित संस्थाओं की कार्यान्वयन व्यवस्था के अनुसार मिलेगा। NAFED और NCCF की विभिन्न गतिविधियां कृषि उत्पादन, बाजार और उपभोक्ता वितरण से संबंधित हैं और कोल्लम में शुरू की गई पहल इसी सहकारी तंत्र के अलग-अलग पक्षों को एक मंच पर लाने का प्रयास है।
दक्षिण भारत में सहकारिता नेटवर्क को विस्तार देने पर जोर, केरल की सहकारी परंपरा को बाजार व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश। कोल्लम कार्यक्रम में केरल की सहकारी व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार केंद्रीय मंत्री ने केरल में 23 हजार से अधिक सहकारी समितियों के नेटवर्क का उल्लेख करते हुए सहकारिता क्षेत्र की व्यापक उपस्थिति पर बात की। सहकारिता मॉडल में सदस्य मिलकर उत्पादन, विपणन, वित्तीय सेवाओं या उपभोक्ता वितरण जैसी गतिविधियों को संचालित करते हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों के मामले में भी सामूहिक संगठन बाजार तक पहुंच को आसान बना सकता है। शी-मार्ट इसी सामूहिक शक्ति को खुदरा बाजार से जोड़ने की कोशिश है। केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में 300 आउटलेट की प्रस्तावित श्रृंखला के माध्यम से महिला उद्यमियों के लिए स्थानीय बाजार से आगे क्षेत्रीय बाजार तक पहुंच की संभावना पैदा होगी। कार्यक्रम में NCCF के ‘Janah’ उत्पादों की बिक्री शुरू करने और महिला ग्राहकों के लिए भारत आटा तथा भारत चावल उपलब्ध कराने की पहल भी इसी खुदरा नेटवर्क के विस्तार से जुड़ी है। NCCF की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार संस्था कृषि वस्तुओं की खरीद, उपभोक्ता-केंद्रित खुदरा सेवाओं और कृषि वस्तुओं के घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी गतिविधियां संचालित करती है। ऐसे में शी-मार्ट को इन गतिविधियों के साथ जोड़ने से महिला उद्यमियों के लिए बाजार उपलब्ध कराने का एक संस्थागत माध्यम तैयार किया जा सकता है। इसके साथ ही कार्यक्रम में मत्स्य और समुद्री क्षेत्र की आर्थिक संभावनाओं को भी सहकारिता के माध्यम से आगे बढ़ाने की बात सामने आई। NCCF और भारतीय मत्स्य प्रवर्तक संघ के बीच मत्स्य उत्पादों की आपूर्ति-श्रृंखला को NCCF के ‘Janah’ ब्रांड से जोड़ने संबंधी समझौते का भी आदान-प्रदान हुआ। इससे यह संकेत मिलता है कि कार्यक्रम का दायरा केवल महिला खुदरा दुकानों तक सीमित नहीं था, बल्कि कृषि, मत्स्य, उपभोक्ता वस्तुओं और सहकारी विपणन को एक व्यापक नेटवर्क से जोड़ने पर केंद्रित था। दक्षिण भारत में सहकारिता आधारित बाजार व्यवस्था के विस्तार से स्थानीय उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच नई आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित होने की संभावना है। हालांकि इन पहलों का दीर्घकालीन परिणाम उनके संचालन, बाजार प्रतिस्पर्धा, उत्पाद की गुणवत्ता, नियमित आपूर्ति और महिला उद्यमियों की वास्तविक भागीदारी पर निर्भर करेगा।
महिला नेतृत्व वाले विकास और सहकारिता आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में नई पहल, बाजार से जुड़ाव पर रहेगा जोर। कोल्लम में शुरू की गई पहलों का एक प्रमुख पहलू यह है कि इनमें महिलाओं को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं बल्कि उद्यमी, उत्पादक, किसान और खुदरा संचालक के रूप में जोड़ने की परिकल्पना की गई है। शी-मार्ट के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमियों को बाजार उपलब्ध कराने की योजना है, जबकि महिला किसानों के लिए दलहन बीज किट और किसान परिवारों की बेटियों के लिए छात्रवृत्ति ग्रामीण परिवारों से जुड़े अन्य आयामों को संबोधित करते हैं। दूसरी ओर NCCF और NAFED मोबाइल वैन के माध्यम से प्याज, भारत आटा और भारत चावल की बिक्री का उद्देश्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं को उपभोक्ताओं तक किफायती दरों पर पहुंचाना है। कार्यक्रम में शी-मार्ट की 300 दुकानों की प्रस्तावित श्रृंखला, महिला उत्पादों के लिए बाजार, सहकारी संस्थाओं के बीच समझौते, खाद्य सामग्री की बिक्री और किसान परिवारों के लिए सहायता को एक व्यापक सहकारिता ढांचे के हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया गया। महिला उद्यमिता को मजबूत करने के लिए बाजार तक पहुंच विशेष महत्व रखती है, क्योंकि उत्पादन क्षमता के साथ स्थायी ग्राहक और बिक्री नेटवर्क होना कारोबार की निरंतरता के लिए आवश्यक है। शी-मार्ट की सफलता के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि महिला समूहों को केवल दुकान उपलब्ध कराने के बजाय उत्पाद विकास, गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, लेखा-व्यवस्था, डिजिटल भुगतान, ग्राहक सेवा और बाजार की मांग को समझने जैसी क्षमताओं से भी जोड़ा जाए। इसी प्रकार मोबाइल वैन व्यवस्था में नियमित आपूर्ति और पारदर्शी मूल्य व्यवस्था उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण होगी। छात्रवृत्ति योजना में पात्र परिवारों तक समय पर सहायता पहुंचाना और कृषि बीज वितरण में गुणवत्ता तथा उपयुक्त प्रशिक्षण सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा। सहकारिता की मूल भावना सामूहिक प्रयास और साझा लाभ पर आधारित है; ऐसे में इन पहलों का प्रभाव तभी व्यापक हो सकेगा जब स्थानीय सहकारी संस्थाएं, महिला समूह, किसान, उपभोक्ता और संबंधित संस्थान एक-दूसरे के साथ प्रभावी ढंग से काम करें। कोल्लम में आयोजित कार्यक्रम ने महिला उद्यमिता, कृषि, उपभोक्ता हित और सहकारी बाजार व्यवस्था को एक साथ जोड़ने की दिशा में कई पहलें सामने रखीं। 300 शी-मार्ट की प्रस्तावित श्रृंखला यदि निर्धारित योजना के अनुसार विकसित होती है तो केरलम, तमिलनाडु और कर्नाटक में महिला उद्यमियों के लिए नए खुदरा बाजार तैयार हो सकते हैं। इसी के साथ NCCF और NAFED की खाद्य सामग्री वितरण व्यवस्था तथा NAFED कल्याण छात्रवृत्ति जैसी पहलों का उद्देश्य किसानों और आम उपभोक्ताओं तक सहकारिता आधारित सेवाओं की पहुंच बढ़ाना है। कोल्लम से शुरू हुई इन पहलों का आगे का प्रभाव उनके जमीनी क्रियान्वयन, निरंतरता और स्थानीय भागीदारी से तय होगा, लेकिन कार्यक्रम ने सहकारिता को महिला आर्थिक भागीदारी, बाजार पहुंच, किसान कल्याण और उपभोक्ता सेवा से जोड़ने की एक व्यापक दिशा अवश्य सामने रखी है।
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