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‘श्रम संवाद’ अभियान के तहत फरीदाबाद में श्रम संहिताओं पर जिला जागरूकता कार्यक्रम, नियोक्ताओं और हितधारकों को दी गई जानकारी

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HQ Report
फरीदाबाद। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा श्रम संहिताओं के संबंध में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किए गए “श्रम संवाद” जागरूकता अभियान के तहत सोमवार को फरीदाबाद स्थित क्षेत्रीय श्रम संस्थान में जिला स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य हाल ही में लागू की गई श्रम संहिताओं, उनके प्रमुख प्रावधानों, नियोक्ताओं के लिए निर्धारित अनुपालन आवश्यकताओं तथा श्रमिकों से संबंधित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बारे में विभिन्न हितधारकों को जानकारी उपलब्ध कराना रहा। मंत्रालय के अनुसार “श्रम संवाद” अभियान के अंतर्गत अगले 90 दिनों में देश के सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 316 जिलों में स्थित औद्योगिक समूहों तक पहुंच बनाई जाएगी। इस पहल के माध्यम से उद्योगों, नियोक्ताओं, श्रमिकों, सरकारी अधिकारियों, कानूनी विशेषज्ञों तथा श्रम क्षेत्र से जुड़े अन्य पक्षों के बीच श्रम कानूनों और उनके अनुपालन को लेकर संवाद तथा जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
फरीदाबाद में आयोजित कार्यक्रम में करीब 75 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। इनमें नियोक्ता, सरकारी अधिकारी, अधिवक्ता तथा श्रम एवं रोजगार क्षेत्र से जुड़े अन्य प्रतिनिधि और हितधारक शामिल रहे। कार्यक्रम को विभिन्न विषयों पर केंद्रित पांच जानकारीपूर्ण सत्रों में विभाजित किया गया था। इन सत्रों में नई श्रम संहिताओं के प्रमुख प्रावधानों, उनके उद्देश्यों, नियोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले आवश्यक अनुपालनों तथा भारत सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में प्रतिभागियों को नए कानूनी ढांचे की मूल अवधारणाओं से परिचित कराने के साथ यह समझाने का प्रयास किया गया कि श्रम संहिताओं से जुड़े प्रावधानों को संस्थानों और उद्योगों में लागू करते समय किन-किन पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है। मंत्रालय के अनुसार कार्यक्रम जागरूकता बढ़ाने और श्रम क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों को एक मंच पर लाकर संवाद स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा।
कार्यक्रम के एक प्रमुख सत्र में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के निदेशक श्री मिनहाज अहमद ने श्रम संहिताओं के प्रमुख प्रावधानों और उनके उद्देश्यों पर जानकारी दी। सत्र के दौरान नए कानूनी ढांचे में किए गए प्रमुख बदलावों को समझाया गया और कर्मचारियों तथा नियोक्ताओं के लिए इनके महत्व पर चर्चा की गई। इसके बाद श्रम कल्याण आयुक्त श्री हेमंत तिर्की ने नियोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले प्रमुख अनुपालनों पर विस्तार से जानकारी दी। इस सत्र में संस्थानों के लिए लागू जिम्मेदारियों, वैधानिक आवश्यकताओं तथा नए अनुपालन ढांचे को समझने के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर रहा कि कानूनों की जानकारी और उनके अनुपालन की स्पष्ट समझ से उद्योग एवं श्रमिक दोनों पक्षों के बीच बेहतर कार्य संबंध और अधिक व्यवस्थित श्रम प्रबंधन की दिशा में मदद मिल सकती है।
जागरूकता कार्यक्रम में श्रम कानूनों के साथ सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी चर्चा का हिस्सा बनाया गया। प्रतिभागियों को ऐसी सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई, जिनका उद्देश्य पात्र श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा का लाभ पहुंचाना है। विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के कामगारों और औपचारिक रोजगार व्यवस्था से बाहर रहने वाले श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा की पहुंच बढ़ाने को महत्वपूर्ण विषय के रूप में सामने रखा गया। कार्यक्रम में यह समझाने का प्रयास किया गया कि श्रम कानूनों की जानकारी केवल नियोक्ताओं के लिए अनुपालन का विषय नहीं है, बल्कि श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच से भी जुड़ी है। इस प्रकार “श्रम संवाद” के माध्यम से कानून, अनुपालन और सामाजिक सुरक्षा के बीच संबंध को एक साथ समझाने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYM) और रोजगार से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा पहलों के बारे में भी जानकारी दी गई। मंत्रालय की ओर से आयोजित इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों का एक उद्देश्य यह भी है कि पात्र श्रमिकों और नियोक्ताओं को उपलब्ध सामाजिक सुरक्षा तंत्र की जानकारी हो तथा वे संबंधित योजनाओं की पात्रता और प्रक्रिया को समझ सकें। श्रम क्षेत्र में जागरूकता का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि औद्योगिक क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के श्रमिक, ठेका श्रमिक, छोटे प्रतिष्ठान और अलग-अलग रोजगार व्यवस्थाएं एक साथ कार्य करती हैं। ऐसे में कानून और योजनाओं की सही जानकारी होने से संबंधित पक्ष अपने दायित्वों तथा उपलब्ध सुविधाओं को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। फरीदाबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्र में इस प्रकार का जिला स्तरीय कार्यक्रम उद्योग जगत और श्रम प्रशासन के बीच प्रत्यक्ष संवाद का अवसर भी प्रदान करता है।
“श्रम संवाद” अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित करने की योजना है। मंत्रालय के अनुसार अगले 90 दिनों में 316 जिलों के औद्योगिक समूहों तक पहुंच बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान उद्योगों और श्रम क्षेत्र से जुड़े हितधारकों को श्रम संहिताओं के प्रमुख प्रावधानों तथा अनुपालन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ उनकी जिज्ञासाओं और व्यावहारिक समस्याओं को समझने का अवसर भी मिलेगा। जिला स्तर पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने से स्थानीय उद्योगों और प्रतिष्ठानों को अपने क्षेत्र में लागू श्रम संबंधी नियमों को समझने तथा संबंधित अधिकारियों से सीधे संवाद करने का अवसर मिल सकता है। साथ ही श्रमिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित योजनाओं की जानकारी भी स्थानीय स्तर तक पहुंचाई जा सकती है।
फरीदाबाद के कार्यक्रम का अंतिम चरण इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र रहा, जिसमें प्रतिभागियों ने वक्ताओं के साथ सीधे संवाद किया और श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन तथा अनुपालन से जुड़े सवाल पूछे। प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को नई श्रम संहिताओं तथा संबंधित श्रम कल्याण योजनाओं के विभिन्न पहलुओं पर स्पष्टीकरण प्राप्त करने का अवसर मिला। मंत्रालय के अनुसार इस प्रकार का संवाद कार्यक्रम की उपयोगिता को बढ़ाता है, क्योंकि इससे केवल जानकारी देने के बजाय हितधारकों को अपनी व्यावहारिक जिज्ञासाएं सामने रखने और विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त करने का अवसर मिलता है। श्रम कानूनों से जुड़े प्रावधानों को लेकर उद्योगों और श्रमिकों के बीच यदि किसी विषय पर भ्रम या जानकारी का अभाव हो तो प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से उसे स्पष्ट करने में सहायता मिल सकती है।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की इस पहल का व्यापक उद्देश्य श्रम संहिताओं के बारे में जागरूकता, अनुपालन और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना है। फरीदाबाद में आयोजित जिला जागरूकता कार्यक्रम ने नियोक्ताओं, सरकारी अधिकारियों, अधिवक्ताओं और श्रम क्षेत्र से जुड़े अन्य प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर नए श्रम कानूनी ढांचे पर चर्चा का अवसर दिया। कार्यक्रम में पांच सत्रों के माध्यम से श्रम संहिताओं, नियोक्ता अनुपालन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को समझाने का प्रयास किया गया तथा प्रश्नोत्तर के माध्यम से प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। आने वाले 90 दिनों में देश के 316 जिलों के औद्योगिक समूहों तक “श्रम संवाद” अभियान पहुंचने के साथ श्रम कानूनों की जानकारी को स्थानीय स्तर पर अधिक व्यापक बनाने और श्रम क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच संवाद को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
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