
“स्वस्थ हृदय, स्वस्थ जीवन की पहचान—आइए, हृदय को स्वस्थ रखने का संकल्प लें।” इसी संदेश के साथ विश्व हृदय दिवस के अवसर पर लोगों को अपने हृदय के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने, संतुलित जीवनशैली अपनाने और हृदय रोगों से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने का संदेश दिया गया। हृदय मानव शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है और इसकी स्वस्थ कार्यप्रणाली पूरे शरीर के लिए आवश्यक है। आधुनिक जीवनशैली, खान-पान में बदलाव, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तंबाकू का सेवन, अधिक नमक और अस्वास्थ्यकर वसा का सेवन तथा बढ़ता तनाव हृदय स्वास्थ्य के लिए जोखिम बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोग यानी कार्डियोवैस्कुलर डिजीज दुनिया में मृत्यु का प्रमुख कारण हैं। वर्ष 2022 में इन रोगों से अनुमानित 19.8 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई, जो वैश्विक मौतों का लगभग 32 प्रतिशत था। ऐसे में विश्व हृदय दिवस केवल शुभकामना देने का अवसर नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी समझने और जीवनशैली में आवश्यक सुधार करने की प्रेरणा देने का दिन भी है।
हृदय रोगों को अक्सर केवल बुजुर्गों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्या मान लिया जाता है, लेकिन हृदय स्वास्थ्य पर जीवनशैली और अन्य जोखिम कारकों का प्रभाव उम्र से अलग भी हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अस्वास्थ्यकर खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू का सेवन और हानिकारक मात्रा में शराब का सेवन हृदय रोग तथा स्ट्रोक के प्रमुख व्यवहार संबंधी जोखिम कारकों में शामिल हैं। इनके कारण उच्च रक्तचाप, रक्त में शर्करा और वसा का बढ़ना तथा अधिक वजन या मोटापा जैसी स्थितियां विकसित हो सकती हैं, जो आगे चलकर हृदयाघात, स्ट्रोक और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ाती हैं। इसलिए हृदय को स्वस्थ रखने की शुरुआत किसी बीमारी के सामने आने के बाद नहीं, बल्कि स्वस्थ रहते हुए ही की जानी चाहिए। रोजमर्रा की आदतों में छोटे लेकिन निरंतर बदलाव लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
संतुलित आहार हृदय स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण आधारशिला है। आज की तेज जीवनशैली में लोग घर के पारंपरिक भोजन की जगह अत्यधिक प्रसंस्कृत, अधिक नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक करने लगे हैं। ऐसे खान-पान को लंबे समय तक अपनाना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन स्वस्थ आहार में पर्याप्तता, संतुलन, संयम और विविधता को महत्वपूर्ण मानता है। फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और मेवे जैसे खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं, जबकि अत्यधिक नमक, मुक्त शर्करा तथा संतृप्त और ट्रांस वसा की मात्रा को सीमित रखना महत्वपूर्ण है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार वयस्कों के लिए नमक का सेवन प्रतिदिन 5 ग्राम से कम रखना चाहिए। अधिक सोडियम का सेवन रक्तचाप बढ़ा सकता है, जो हृदय संबंधी रोगों के जोखिम से जुड़ा है।
हृदय को स्वस्थ रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि को जीवन का हिस्सा बनाना भी जरूरी है। लंबे समय तक लगातार बैठे रहना और शारीरिक गतिविधि का अभाव शरीर के लिए कई प्रकार के जोखिम बढ़ा सकता है। नियमित पैदल चलना, साइकिल चलाना, तैराकी, योग, व्यायाम या व्यक्ति की क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अन्य शारीरिक गतिविधियां सक्रिय जीवनशैली बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पर्याप्त शारीरिक सक्रियता हृदय रोग सहित गैर-संचारी रोगों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह भी जरूरी है कि व्यायाम की शुरुआत व्यक्ति अपनी उम्र, क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप करे। जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी है या लंबे समय से शारीरिक गतिविधि नहीं की है, उन्हें उपयुक्त गतिविधि के संबंध में स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।
तंबाकू से दूरी हृदय की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। धूम्रपान और अन्य प्रकार के तंबाकू उत्पादों का सेवन हृदय तथा रक्तवाहिकाओं को प्रभावित कर सकता है। तंबाकू सेवन हृदय रोग और स्ट्रोक के प्रमुख परिवर्तनीय जोखिम कारकों में शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन हृदय रोगों की रोकथाम के लिए तंबाकू छोड़ने को महत्वपूर्ण कदम मानता है। इसके साथ ही निष्क्रिय धूम्रपान यानी दूसरे व्यक्ति के धुएं के संपर्क से भी बचना आवश्यक है। तंबाकू छोड़ना केवल हृदय के लिए ही नहीं, बल्कि फेफड़ों और शरीर के अन्य अंगों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इसलिए विश्व हृदय दिवस पर तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों के लिए इसे छोड़ने का संकल्प स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
रक्तचाप की नियमित जांच भी हृदय स्वास्थ्य की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उच्च रक्तचाप को कई बार “साइलेंट” समस्या कहा जाता है क्योंकि अनेक लोगों में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार रक्तचाप की जांच ही यह जानने का प्रमुख तरीका है कि किसी व्यक्ति का रक्तचाप बढ़ा हुआ है या नहीं। लंबे समय तक अनियंत्रित उच्च रक्तचाप हृदय, मस्तिष्क और गुर्दों सहित शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान रक्तचाप की जांच कराना उपयोगी है। जिन लोगों में उच्च रक्तचाप पाया जाता है, उन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार जीवनशैली में बदलाव और आवश्यकता होने पर निर्धारित दवाओं का नियमित सेवन करना चाहिए। अपनी ओर से दवा शुरू करना, बंद करना या उसकी मात्रा बदलना उचित नहीं है।
हृदय स्वास्थ्य में मधुमेह और रक्त में वसा के स्तर पर ध्यान देना भी आवश्यक है। रक्त में बढ़ी हुई शर्करा और असामान्य रक्त वसा हृदय संबंधी जोखिम से जुड़े कारकों में शामिल हैं। कई बार व्यक्ति स्वयं को सामान्य महसूस करता रहता है, जबकि रक्तचाप, रक्त शर्करा या कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियां धीरे-धीरे शरीर पर प्रभाव डाल रही होती हैं। यही कारण है कि उम्र, पारिवारिक इतिहास और चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हृदय रोग के जोखिम वाले लोगों की समय पर पहचान और उचित उपचार से समय से पहले होने वाली मौतों को रोकने में मदद मिल सकती है। इसलिए स्वास्थ्य जांच को केवल बीमारी होने के बाद की प्रक्रिया न मानकर निवारक स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा समझना चाहिए।
आज की जीवनशैली में तनाव और पर्याप्त आराम भी स्वास्थ्य चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बन चुके हैं। लगातार काम का दबाव, अनियमित दिनचर्या, नींद की कमी और शारीरिक निष्क्रियता व्यक्ति की समग्र जीवनशैली को प्रभावित कर सकते हैं। स्वस्थ दिनचर्या में पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन और समय-समय पर विश्राम को स्थान देना आवश्यक है। तनाव को पूरी तरह समाप्त करना हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं होता, लेकिन तनाव को संभालने के स्वस्थ तरीकों को जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है। योग, ध्यान, प्राणायाम, प्रकृति के बीच समय बिताना, परिवार के साथ संवाद और अपनी पसंद की सकारात्मक गतिविधियों में समय देना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक तनाव, बेचैनी या नींद से संबंधित समस्या बनी रहती है, तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित है।
हृदय रोगों की रोकथाम में परिवार और समाज की भी भूमिका है। स्वस्थ जीवनशैली केवल किसी एक व्यक्ति का व्यक्तिगत प्रयास नहीं, बल्कि परिवार की सामूहिक आदतों से भी जुड़ी होती है। यदि घर में संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और तंबाकू मुक्त वातावरण को बढ़ावा दिया जाता है, तो बच्चों और युवाओं में भी स्वस्थ आदतें विकसित होने की संभावना बढ़ती है। इसी प्रकार स्कूल, कार्यालय, सामाजिक संस्थाएं और स्थानीय समुदाय स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा दे सकते हैं। लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच, पौष्टिक भोजन, शारीरिक सक्रियता और तंबाकू से दूरी के महत्व के बारे में जानकारी देना हृदय रोगों की रोकथाम की दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी हृदय रोगों की रोकथाम के लिए व्यक्तिगत व्यवहार के साथ-साथ ऐसे वातावरण और नीतियों को महत्वपूर्ण मानता है जो स्वस्थ विकल्पों को अपनाना आसान बनाएं।
हृदयाघात के संभावित संकेतों को पहचानना भी जागरूकता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हृदयाघात में छाती के बीच में दर्द या असहजता जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि लक्षण व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकते हैं और कुछ मामलों में लक्षण स्पष्ट नहीं भी हो सकते हैं। किसी व्यक्ति में हृदयाघात की आशंका हो तो इसे सामान्य परेशानी मानकर घर पर इंतजार करने के बजाय तत्काल आपात चिकित्सा सहायता लेना आवश्यक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हृदयाघात एक चिकित्सकीय आपातस्थिति है और समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से उपचार तथा रिकवरी की संभावना बेहतर हो सकती है। इसलिए परिवार के सदस्यों को भी आपात स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की जानकारी होना जरूरी है।
विश्व हृदय दिवस का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि हृदय स्वास्थ्य केवल अस्पताल और चिकित्सकों का विषय नहीं है। यह व्यक्ति की दैनिक जीवनशैली से सीधे जुड़ा हुआ है। सुबह की नियमित सैर से लेकर भोजन में नमक और अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा पर ध्यान देने तक, तंबाकू से दूरी बनाने से लेकर नियमित स्वास्थ्य जांच कराने तक अनेक ऐसे कदम हैं जिन्हें दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार फल-सब्जियों का पर्याप्त सेवन, नियमित शारीरिक गतिविधि, तंबाकू छोड़ना, नमक कम करना और हानिकारक शराब सेवन से बचना हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।
बच्चों और युवाओं में हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित करना भी दीर्घकालीन दृष्टि से महत्वपूर्ण है। स्वस्थ आदतें जितनी जल्दी जीवन का हिस्सा बनती हैं, उतना ही व्यक्ति के लिए उन्हें लंबे समय तक बनाए रखना आसान हो सकता है। बच्चों को आउटडोर खेलों के लिए प्रोत्साहित करना, लंबे समय तक स्क्रीन पर बैठे रहने की आदत को संतुलित करना और घर में पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता देना स्वस्थ जीवनशैली की नींव रख सकता है। युवाओं में भी तंबाकू और अन्य स्वास्थ्य-हानिकारक आदतों के प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। हृदय स्वास्थ्य को केवल उम्रदराज लोगों की चिंता के रूप में देखने की बजाय इसे जीवन के हर चरण में अपनाई जाने वाली स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
महिलाओं में हृदय स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। परिवार और समाज में महिलाओं की व्यस्त दिनचर्या के कारण कई बार वे अपने स्वास्थ्य की नियमित जांच को प्राथमिकता नहीं दे पातीं। परिवार की जिम्मेदारियों के साथ स्वयं के स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी आवश्यक है। रक्तचाप, रक्त शर्करा, रक्त वसा और वजन जैसे स्वास्थ्य संकेतकों की निगरानी व्यक्ति की समग्र स्वास्थ्य देखभाल का हिस्सा हो सकती है। किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है। इसी प्रकार पुरुषों में भी नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है। हृदय रोग किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं हैं, इसलिए जागरूकता का संदेश सभी तक पहुंचना चाहिए।
हृदय को स्वस्थ रखने के लिए भोजन में संतुलन और स्थानीय पौष्टिक विकल्पों पर ध्यान दिया जा सकता है। ताजे फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा बन सकते हैं। अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, अधिक नमक, अधिक चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वस्थ आहार में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और मेवे जैसे खाद्य पदार्थों को स्थान देना तथा नमक, मुक्त शर्करा और अस्वास्थ्यकर वसा की अधिकता से बचना महत्वपूर्ण है।
शारीरिक सक्रियता को अपनाने के लिए हमेशा महंगे उपकरण या जिम की आवश्यकता नहीं होती। व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार नियमित पैदल चलने, सीढ़ियों का उपयोग करने, साइकिल चलाने, योग या अन्य शारीरिक गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल कर सकता है। महत्वपूर्ण यह है कि लंबे समय तक निष्क्रिय रहने की आदत को कम किया जाए और नियमित गतिविधि को जीवन का हिस्सा बनाया जाए। विश्व स्वास्थ्य संगठन की जानकारी के अनुसार शारीरिक सक्रियता हृदय सहित कई गैर-संचारी रोगों के जोखिम को कम करने में सहायक है।
हृदय स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए नियमित स्वास्थ्य शिविर और जांच अभियान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे कार्यक्रमों में रक्तचाप, रक्त शर्करा, वजन और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य संकेतकों की जांच के साथ लोगों को संतुलित आहार, व्यायाम और तंबाकू से दूरी के बारे में जानकारी दी जा सकती है। प्राथमिक स्तर पर जोखिम की पहचान होने से व्यक्ति समय रहते चिकित्सकीय सलाह ले सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हृदय रोगों के जोखिम वाले लोगों की समय पर पहचान और उचित उपचार से गंभीर परिणामों को रोकने में मदद मिल सकती है।
विश्व हृदय दिवस हमें यह भी याद दिलाता है कि स्वास्थ्य केवल बीमारी की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि स्वस्थ आदतों की निरंतरता से जुड़ा विषय है। एक दिन जागरूक होकर अगले दिन पुरानी जीवनशैली में लौट जाने की बजाय छोटे-छोटे बदलावों को लंबे समय तक अपनाना अधिक महत्वपूर्ण है। भोजन में संयम, नियमित गतिविधि, तंबाकू से दूरी, रक्तचाप और अन्य जोखिम कारकों की निगरानी तथा समय पर चिकित्सकीय परामर्श जीवनशैली का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी व्यक्तिगत स्थिति के लिए व्यक्ति को अपने चिकित्सक या योग्य स्वास्थ्यकर्मी की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।
आज के समय में हृदय को स्वस्थ रखने का संदेश हर परिवार तक पहुंचाना आवश्यक है। “स्वस्थ हृदय, स्वस्थ जीवन की पहचान” केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवनशैली के प्रति जागरूक होने का आह्वान है। विश्व हृदय दिवस पर हम यह संकल्प ले सकते हैं कि अपने भोजन, दिनचर्या और स्वास्थ्य संबंधी आदतों पर ध्यान देंगे, नियमित शारीरिक गतिविधि को महत्व देंगे, तंबाकू से दूरी बनाएंगे और आवश्यक स्वास्थ्य जांच को नजरअंदाज नहीं करेंगे। परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों को भी स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रेरित करना इस जागरूकता को व्यापक बना सकता है।
हृदय हमारे जीवन की धड़कन का केंद्र है और इसकी देखभाल हमारी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल होनी चाहिए। आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच अपने स्वास्थ्य के लिए समय निकालना आवश्यक है। विश्व हृदय दिवस का अवसर हमें अपनी दिनचर्या पर विचार करने और जहां आवश्यक हो वहां सकारात्मक बदलाव करने की प्रेरणा देता है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, तंबाकू से दूरी, रक्तचाप और अन्य जोखिम कारकों की निगरानी तथा समय पर चिकित्सा सलाह—ये सभी हृदय स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
आइए, विश्व हृदय दिवस पर हम स्वयं स्वस्थ रहने के साथ अपने परिवार और समाज को भी हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का संकल्प लें। स्वस्थ आदतों को अपनी दिनचर्या में स्थान दें, शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें और आवश्यकता पड़ने पर समय पर चिकित्सकीय सहायता लें। एक स्वस्थ हृदय बेहतर जीवन, सक्रिय जीवन और सुखद भविष्य की आधारशिला बन सकता है।
विश्व हृदय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। स्वस्थ रहें, जागरूक रहें और अपने हृदय का ख्याल रखें।