
भारतीय वायु सेना दिवस पर वीर वायु योद्धाओं, पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों को राष्ट्र का नमन; साहस, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और अदम्य समर्पण की गौरवगाथा को किया गया स्मरण
नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना दिवस के अवसर पर देशभर में भारतीय वायु सेना के वीर जवानों, अधिकारियों, पूर्व सैनिकों तथा उनके परिवारों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की जा रही है। भारतीय वायु सेना दिवस प्रत्येक वर्ष 8 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन देश की वायु शक्ति, उसके गौरवशाली इतिहास, अदम्य साहस और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए समर्पित वायु योद्धाओं के प्रति सम्मान प्रकट करने का अवसर है। इस अवसर पर देशवासियों की ओर से भारतीय वायु सेना के सभी वीर योद्धाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी जा रही हैं।
“नभः स्पृशं दीप्तम्” भारतीय वायु सेना का आदर्श वाक्य है, जिसका भावार्थ है—“गौरव के साथ आकाश को स्पर्श करना।” यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि भारतीय वायु सेना की कार्यशैली, संकल्प, साहस और राष्ट्रसेवा की भावना का प्रतिनिधित्व करता है। भारतीय वायु सेना ने दशकों के अपने सफर में देश की संप्रभुता और आकाशीय सुरक्षा की रक्षा के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं, मानवीय संकटों और राहत अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
1932 में हुई थी भारतीय वायु सेना की स्थापना
भारतीय वायु सेना के गौरवशाली इतिहास की शुरुआत 8 अक्टूबर 1932 से मानी जाती है। सरकारी अभिलेखों के अनुसार इसी दिन भारतीय वायु सेना की स्थापना हुई थी। प्रारंभिक दौर में इसकी संरचना छोटी थी, लेकिन इसके जवानों और अधिकारियों के भीतर राष्ट्रसेवा की भावना, प्रशिक्षण के प्रति समर्पण और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करने का दृढ़ संकल्प मौजूद था। समय के साथ यह छोटी शुरुआत आधुनिक, सक्षम और तकनीकी रूप से उन्नत वायु शक्ति के रूप में विकसित हुई।
भारतीय वायु सेना ने 1 अप्रैल 1933 को अपनी पहली परिचालन उड़ान भरी। उस समय छह प्रशिक्षित अधिकारियों और 19 वायु सैनिकों के समूह के साथ चार वेस्टलैंड वॉपिटी IIA बाइप्लेन का उपयोग किया गया था। यह शुरुआत आकार में भले ही छोटी थी, लेकिन इसी ने आगे चलकर भारतीय वायु शक्ति के विस्तार और विकास की नींव रखी।
दशकों के दौरान भारतीय वायु सेना ने बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के अनुरूप अपने संगठन, प्रशिक्षण, तकनीक, विमानन क्षमता और परिचालन रणनीतियों में लगातार विकास किया। आज वायु शक्ति केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें परिवहन विमान, हेलीकॉप्टर, वायु निगरानी, रडार, वायु रक्षा प्रणालियां, संचार, अंतरिक्ष एवं साइबर क्षमताएं और अत्याधुनिक तकनीक का व्यापक समावेश हो चुका है।
आकाश की सुरक्षा में समर्पित वायु योद्धा
देश की सीमाओं की सुरक्षा केवल जमीन तक सीमित नहीं है। आधुनिक समय में आकाशीय क्षेत्र की सुरक्षा भी राष्ट्रीय सुरक्षा का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारतीय वायु सेना के वायु योद्धा दिन-रात अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए देश के आकाश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्पर रहते हैं।
वायु सेना के जवानों के लिए प्रत्येक मिशन अनुशासन, प्रशिक्षण, समयबद्धता और अत्यधिक सावधानी की मांग करता है। विमान संचालन, तकनीकी रखरखाव, निगरानी, संचार और वायु रक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले हजारों कर्मियों का सामूहिक प्रयास भारतीय वायु शक्ति को मजबूती प्रदान करता है।
एक लड़ाकू विमान को आकाश में उड़ते हुए देखना जितना रोमांचकारी दिखाई देता है, उसके पीछे उतनी ही बड़ी तैयारी, प्रशिक्षण और टीमवर्क की भूमिका होती है। पायलट के साथ इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ, ग्राउंड स्टाफ, संचारकर्मी, वायु रक्षा विशेषज्ञ और अनेक अन्य कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। यही सामूहिक क्षमता भारतीय वायु सेना को प्रभावी और विश्वसनीय बनाती है।
वीरता और अनुशासन का अद्भुत संगम
भारतीय वायु सेना की पहचान केवल अत्याधुनिक विमानों और तकनीक से नहीं, बल्कि उसके अनुशासन, प्रशिक्षण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा से भी होती है। वायु योद्धाओं को कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने, तेजी से प्रतिक्रिया करने और अपने मिशन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
वायु सेना दिवस इस बात की भी याद दिलाता है कि राष्ट्र की सुरक्षा के पीछे हजारों परिवारों का त्याग जुड़ा होता है। जब कोई वायु योद्धा देशसेवा के लिए अपने दायित्व पर तैनात होता है, तब उसके परिवार के सदस्य भी अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रसेवा का हिस्सा बनते हैं। लंबे समय तक परिवार से दूर रहना, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करना और हर समय दायित्व के लिए तैयार रहना वायु योद्धाओं के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसीलिए वायु सेना दिवस पर केवल वर्दी पहने जवानों को ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों, पूर्व सैनिकों और उन सभी लोगों को भी सम्मान दिया जाता है जिन्होंने भारतीय वायु सेना की सेवा और विकास में योगदान दिया है।
युद्ध क्षमता के साथ मानवीय सेवा की मिसाल
भारतीय वायु सेना की भूमिका केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं रही है। प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकटों के समय भी वायु सेना ने राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बाढ़, भूकंप, चक्रवात या अन्य आपदाओं के दौरान दुर्गम क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में हवाई संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
जब सड़क मार्ग बाधित हो जाते हैं या किसी क्षेत्र तक सामान्य माध्यमों से पहुंचना कठिन हो जाता है, तब हेलीकॉप्टर और परिवहन विमान राहत कार्यों का महत्वपूर्ण साधन बनते हैं। भारतीय वायु सेना ने समय-समय पर ऐसे मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में अपनी क्षमताओं का उपयोग किया है। सरकारी स्रोत भी वायु सेना की मानवीय सहायता और आपदा राहत भूमिका को उसके व्यापक राष्ट्रीय दायित्व का हिस्सा बताते हैं।
इस भूमिका से यह संदेश सामने आता है कि भारतीय वायु सेना का मूल उद्देश्य केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना नहीं, बल्कि आवश्यकता के समय देशवासियों की सहायता के लिए भी उपलब्ध रहना है।
तकनीक के बदलते दौर में नई क्षमताओं का विकास
आज का युद्धक्षेत्र तेजी से बदल रहा है। आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों में केवल पारंपरिक सैन्य शक्ति ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन, साइबर क्षमताएं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सटीक हथियार प्रणालियां, निगरानी एवं संचार नेटवर्क जैसी तकनीकों की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है।
भारतीय वायु सेना ने समय के साथ इन बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी क्षमताओं को विकसित करने पर जोर दिया है। सरकारी विवरणों में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, अंतरिक्ष और साइबर क्षमताओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निर्णय प्रणालियों तथा ड्रोन तकनीक जैसी उभरती क्षमताओं पर किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया गया है।
आधुनिक तकनीक का उपयोग तभी प्रभावी हो सकता है जब उसके साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन और मजबूत परिचालन व्यवस्था भी मौजूद हो। इसी कारण भारतीय वायु सेना में प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता और नवाचार को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदम
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता आज भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। भारतीय वायु सेना की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए देश में रक्षा उत्पादन और स्वदेशी तकनीक के विकास को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
स्वदेशी विमानों, हथियार प्रणालियों, रडार, संचार उपकरणों और अन्य रक्षा प्रणालियों के विकास से भारत की तकनीकी क्षमता मजबूत होती है। इससे न केवल रक्षा तैयारियों को बल मिलता है, बल्कि देश के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीकी संस्थानों और रक्षा उद्योग के लिए भी नए अवसर पैदा होते हैं।
वायु सेना की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित हो रही स्वदेशी क्षमताएं भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। भविष्य की सुरक्षा आवश्यकताओं को देखते हुए स्वदेशी अनुसंधान, उत्पादन और नवाचार की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जाएगी।
आकाश में दिखाई देता है साहस का अद्भुत प्रदर्शन
भारतीय वायु सेना दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में हवाई प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहते हैं। तेज गति से उड़ते लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टरों की सटीक उड़ान, एरोबेटिक टीमों के रोमांचकारी करतब और विभिन्न विमानों की संरचनात्मक उड़ानें दर्शकों के लिए गौरव और उत्साह का अनुभव कराती हैं।
लेकिन इन प्रदर्शनों के पीछे केवल रोमांच नहीं, बल्कि वर्षों का कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और सटीक समन्वय होता है। आसमान में कुछ सेकंड के लिए दिखाई देने वाला कोई हवाई करतब उसके पीछे मौजूद लंबे प्रशिक्षण और तैयारी का परिणाम होता है।
वायु सेना के हवाई प्रदर्शन देश के युवाओं को विमानन, विज्ञान, तकनीक और रक्षा क्षेत्र के प्रति प्रेरित करने का भी माध्यम बनते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को यह समझने का अवसर मिलता है कि राष्ट्रसेवा के लिए साहस के साथ-साथ ज्ञान, तकनीकी दक्षता और अनुशासन भी आवश्यक हैं।
शहीद वायु योद्धाओं को श्रद्धांजलि
वायु सेना दिवस का सबसे भावपूर्ण पक्ष उन वीर वायु योद्धाओं का स्मरण है जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले सैनिकों की स्मृति भारतीय समाज के लिए सदैव सम्मान का विषय रहेगी।
उनके त्याग ने आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व का बोध कराया है। वर्दी पहनकर देश की सेवा करने वाला प्रत्येक सैनिक अपने जीवन को राष्ट्र के नाम समर्पित करता है। अनेक बार यह सेवा अत्यंत कठिन परिस्थितियों के बीच होती है, जहां एक छोटी सी गलती भी गंभीर परिणाम दे सकती है।
शहीदों का स्मरण केवल श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके जीवन से अनुशासन, कर्तव्य, साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा लेना ही उनके प्रति सच्चा सम्मान है।
परिवारों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण
किसी भी सैनिक की सेवा के पीछे उसके परिवार का त्याग और सहयोग महत्वपूर्ण होता है। वायु सेना के अधिकारी और जवान जब कठिन ड्यूटी पर रहते हैं, तब उनके परिवार उनके दायित्वों को समझते हुए मजबूती से साथ खड़े रहते हैं।
वायु योद्धाओं के परिवारों के लिए भी यह जीवन चुनौतियों से भरा होता है। स्थानांतरण, लंबे समय तक अलग रहना, अनिश्चित परिस्थितियां और सेवा से जुड़ी जिम्मेदारियां उनके जीवन का हिस्सा बनती हैं। इसलिए वायु सेना दिवस पर वायु योद्धाओं के साथ उनके परिवारों के प्रति भी सम्मान व्यक्त करना आवश्यक है।
सरकारी स्तर पर भी वायु सेना दिवस के अवसर पर वायु योद्धाओं, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं एवं सम्मान दिए जाते रहे हैं। 2025 में भी प्रधानमंत्री कार्यालय और रक्षा मंत्रालय की ओर से वायु योद्धाओं एवं उनके परिवारों के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त की गई थीं।
युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत
भारतीय वायु सेना देश के युवाओं के लिए साहस और अनुशासन की प्रेरणा का बड़ा स्रोत है। वायु सेना में सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और समर्पण का अवसर है।
वायु सेना के अधिकारी बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता के साथ शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता की आवश्यकता होती है। तकनीकी क्षेत्रों में भी विशेषज्ञों के लिए अनेक प्रकार की जिम्मेदारियां होती हैं।
आज के युवाओं के लिए वायु सेना यह संदेश देती है कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए निरंतर मेहनत, अनुशासन और सीखने की इच्छा जरूरी है। आकाश को छूने का सपना तभी पूरा हो सकता है जब उसके लिए जमीन पर कठोर परिश्रम किया जाए।
वायु शक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा
आधुनिक राष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था में वायु शक्ति का विशेष महत्व है। किसी भी देश की रक्षा क्षमता में उसकी वायु सेना की भूमिका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होती है। तेजी से लंबी दूरी तय करने, निगरानी करने, आवश्यक स्थानों पर सैनिक एवं सामग्री पहुंचाने और संकट के समय तत्काल प्रतिक्रिया देने की क्षमता वायु शक्ति को विशेष बनाती है।
भारतीय वायु सेना ने अपने लंबे इतिहास में बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को विकसित किया है। प्रारंभिक दौर के सीमित संसाधनों से लेकर आधुनिक विमान, हेलीकॉप्टर, रडार, मिसाइल और नेटवर्क आधारित प्रणालियों तक का सफर भारतीय वायु शक्ति के विकास की कहानी कहता है।
सरकारी अभिलेखों में भी भारतीय वायु सेना की यात्रा को साहस, उत्कृष्टता और राष्ट्रीय गौरव की यात्रा के रूप में रेखांकित किया गया है।
राष्ट्र की सीमाओं से आगे भी सेवा का दायित्व
भारतीय वायु सेना ने आवश्यकता पड़ने पर देश के बाहर भी राहत एवं बचाव अभियानों में योगदान दिया है। संघर्ष क्षेत्रों से नागरिकों की सुरक्षित निकासी, मानवीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत अभियानों में हवाई संसाधनों का उपयोग इसकी व्यापक क्षमता को दर्शाता है।
इस प्रकार भारतीय वायु सेना केवल युद्ध के समय सक्रिय रहने वाली संस्था नहीं है। शांति के समय प्रशिक्षण, निगरानी, अभ्यास, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसी गतिविधियां भी इसकी नियमित जिम्मेदारियों का हिस्सा हैं।
वायु सेना की यह बहुआयामी भूमिका बताती है कि आधुनिक सैन्य संस्थानों के लिए युद्धक क्षमता के साथ मानवीय संवेदनशीलता और नागरिक सहायता की क्षमता भी आवश्यक है।
गौरवशाली परंपरा से आधुनिक भारत की ओर
भारतीय वायु सेना की यात्रा इतिहास, वर्तमान और भविष्य के बीच एक मजबूत सेतु है। एक छोटे संगठन से शुरू होकर आज की आधुनिक वायु शक्ति तक पहुंचने की यह यात्रा अनेक पीढ़ियों के वायु योद्धाओं के परिश्रम और योगदान से संभव हुई है।
हर पीढ़ी ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अगली पीढ़ी के लिए बेहतर आधार तैयार किया। पुराने विमानों और तकनीकों से लेकर आधुनिक प्रणालियों तक का परिवर्तन इसी निरंतर विकास का परिणाम है।
भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालित प्रणालियां, ड्रोन, उन्नत सेंसर, साइबर और अंतरिक्ष आधारित तकनीकों की भूमिका और बढ़ सकती है। ऐसे समय में भारतीय वायु सेना के सामने नई चुनौतियों के साथ नई संभावनाएं भी होंगी।
“नभः स्पृशं दीप्तम्” में छिपा है संकल्प
भारतीय वायु सेना का आदर्श वाक्य “नभः स्पृशं दीप्तम्” उसकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह वाक्य भगवद्गीता के अध्याय 11 के एक श्लोक से लिया गया है और इसका भावार्थ आकाश को गौरव के साथ स्पर्श करने से जुड़ा है। भारतीय वायु सेना के आधिकारिक प्रतीक से संबंधित सरकारी विवरण में भी इस आदर्श वाक्य और उसके अर्थ का उल्लेख मिलता है।
इस आदर्श वाक्य में केवल ऊंचाई की बात नहीं है। यह ऊंचे लक्ष्य, उच्च मानदंड, श्रेष्ठ प्रदर्शन और राष्ट्रसेवा की भावना को भी अभिव्यक्त करता है। वायु योद्धाओं के लिए आकाश केवल उनका कार्यक्षेत्र नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और संकल्प का प्रतीक भी है।
जब कोई भारतीय वायु योद्धा आसमान में उड़ान भरता है, तो उसके साथ करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा और विश्वास की भावना जुड़ी होती है। यही विश्वास भारतीय वायु सेना की सबसे बड़ी शक्ति है।
हर भारतीय का गर्व है भारतीय वायु सेना
भारतीय वायु सेना दिवस पर देश का प्रत्येक नागरिक उन सभी वायु योद्धाओं को नमन करता है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते। उनके साहस, प्रशिक्षण और अनुशासन के कारण देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलती है।
वायु सेना की वर्दी पहनने वाला प्रत्येक जवान देश की आशाओं और विश्वास का प्रतिनिधि होता है। उसकी जिम्मेदारी व्यक्तिगत सीमाओं से कहीं आगे जाकर राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ती है।
देशवासियों के लिए यह अवसर केवल शुभकामनाएं देने का नहीं, बल्कि यह समझने का भी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के पीछे कितनी बड़ी मेहनत, तैयारी और त्याग छिपा होता है।
वीर योद्धाओं के प्रति कृतज्ञता
आज के दिन उन सभी वायु योद्धाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है जो देश की सुरक्षा के लिए अपने परिवारों से दूर रहकर अपने दायित्व निभा रहे हैं। उन पूर्व सैनिकों को भी सम्मानपूर्वक याद किया जाता है जिन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष भारतीय वायु सेना को दिए।
साथ ही उन वीरों को श्रद्धांजलि दी जाती है जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। उनका बलिदान देश के इतिहास में सदैव सम्मान के साथ याद किया जाएगा।
भारतीय वायु सेना की गौरवगाथा केवल विमानों की गति और तकनीकी क्षमता की कहानी नहीं है। यह इंसानी साहस, त्याग, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति अटूट विश्वास की कहानी है।
नई पीढ़ी के लिए संदेश
आज के युवाओं के सामने अनेक करियर विकल्प हैं। ऐसे समय में भारतीय वायु सेना का जीवन उन्हें यह सिखाता है कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए अनुशासन और समर्पण आवश्यक है।
देश की सेवा के लिए केवल सीमा पर हथियार उठाना ही आवश्यक नहीं होता। वैज्ञानिक, इंजीनियर, चिकित्सक, तकनीकी विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य अनेक पेशेवर भी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
वायु सेना दिवस युवाओं को अपने लक्ष्य निर्धारित करने, कठिन परिश्रम करने और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने की प्रेरणा देता है।
साहस, सेवा और समर्पण की परंपरा आगे बढ़ती रहे
भारतीय वायु सेना का इतिहास बताता है कि किसी संस्था की वास्तविक शक्ति केवल उसके उपकरणों में नहीं होती, बल्कि उन लोगों में होती है जो उन उपकरणों का संचालन करते हैं। आधुनिक विमान और तकनीक तभी प्रभावी हैं जब उन्हें संचालित करने वाले वायु योद्धा कुशल, अनुशासित और समर्पित हों।
इसीलिए भारतीय वायु सेना दिवस पर वायु योद्धाओं के साहस और पेशेवर दक्षता को सम्मान देना देश की सामूहिक जिम्मेदारी है। भारतीय वायु सेना की भविष्य की यात्रा भी नई तकनीकों, बेहतर प्रशिक्षण, नवाचार और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ने की दिशा में जारी रहेगी।
2025 के वायु सेना दिवस समारोह में भी भारतीय वायु सेना की आधुनिक क्षमताओं, नवाचार और स्वदेशी रूप से एकीकृत प्रणालियों पर जोर दिया गया था। उस अवसर पर वायु सेना की 93वीं वर्षगांठ मनाई गई और विभिन्न श्रेणियों में वायु योद्धाओं को सम्मानित किया गया।
देशवासियों की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं
भारतीय वायु सेना दिवस के इस गौरवपूर्ण अवसर पर देश के सभी वीर वायु योद्धाओं, अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों तथा उनके परिवारों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।
आपका साहस देश की शक्ति है।
आपका अनुशासन राष्ट्र का विश्वास है।
आपका समर्पण भारत की सुरक्षा का आधार है।
आपकी वीरता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
भारत माता की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने वाले भारतीय वायु सेना के शूरवीरों की वीरता और कर्तव्यनिष्ठा पर प्रत्येक भारतीय को गर्व है। आपके पराक्रम, समर्पण और अदम्य साहस से देश का आकाश सुरक्षित और राष्ट्र का विश्वास मजबूत होता है।
भारतीय वायु सेना दिवस पर सभी वायु योद्धाओं को शत-शत नमन।
नभः स्पृशं दीप्तम्।
जय हिन्द!
जय हिन्द की सेना!
वंदे मातरम्! 🇮🇳